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Tuesday, August 22, 2017

अपाहिज प्रार्थना



"या देवी सर्वभूतेषु...."
गूंजती आवाज के साथ
जैसे ही शुरुआत की प्रार्थना की
पर नाद अनुनाद में बंध कर
बिना किसी मुकम्मल गूँज के
धप्प से दब कर रह गयी प्रार्थना!
बेशक रही हो
अंतर्मन से निकली आवाज
पर, सिसकती रुंधी हुई
किसी दूर बैठी लड़की की आवाज के
हल्के से रुदन में खो गयी प्रार्थना!
ऐसे लगा, प्रार्थना ने की हो कोशिश
सफ़र कर देवियों तक पहुँचने की
पर पगडण्डियों से हाइवे/ मेट्रो तक
जाने की दौड़ में
वाहन के पायदान पर फिसल गयी प्रार्थना!
अपाहिज हो कर बेचारी..
ऐसे में कचरा ढोने वाले
म्युनिस्पेलीटी के ट्रक पर
उछल कर बैठ ही गयी प्रार्थना!
न ही हवाओं ने दिया साथ
न ही संघनित बादल ही ले जा सके
खुद के साथ दूर तलक
बहुत बुरा हुआ, बादलों ने बरस कर
सूखी मिटटी में खो दी
सच्चे दिल की प्रार्थना!
ये इन्कार कुछ कहता है शायद
मत करो सिर्फ प्रार्थना!!
समझ गये न, क्या कह रही है देवियाँ !!
~मुकेश~

लोकजंग में प्रकाशित कविता "एक्वारजिया"

Tuesday, August 1, 2017

भीगती कविता


काश मेरे शब्द होते
बारिश की बूंदों से निश्छल
जो भावों के रूप में संघनित हो कर
हरहरा कर बरस पड़ते
और, बस बन जाती ताजगी भरी 
मासूम सी कविता!
काश मेरे उदर के बदले
दिमाग में गुडगुड करते अक्षर
फिर एंटासिड की गोली की तरह
सहेजे हुए उसके प्रेम सिक्त बोल
उन अक्षरों को बना देती
प्रेम कविता !
काश तुम्हारा सौंदर्य, लावण्य,
जिसको देख कर मेरे कलम में
भर जाती
सन-स्क्रीन लोशन व टेलकम पाउडर
ताकि कागज़ पर उतर पाती
यौवन के रस को छलकाती
बेहतरीन सी कविता !!
काश
कोई तो वजह होती
ताकि बन पाती
तुम्हें समर्पित करने हेतु
एक खास कविता !
____________________
काश !


😊💐

Tuesday, July 25, 2017

बारिश की बूंदें और स्मृतियाँ


थोडा बुझा सा मन और
वैसा ही कुछ मौसम
शुन्य आसमान  पर  टिकी  नजरें, और
ठंडी हवा के झोंके के साथ

जागी, उम्मीद बरसात की
उम्मीद छमकते बूंदों की
उम्मीद मन के जागने की !!

होने  लगी स्मृतियों की बरसात
मन भी हो चूका बेपरवाह
सुदूर कहीं ठंडी सिहरन वाली हवा

सूखी-सूखी धूल धूसरित भूमि
सौंधी खुश्बू बिखेरती पानी की बूंदे
मन भी तो, होने लगा बेपरवाह
टप-टप की म्यूजिक के  बेकग्राउंड के साथ
छिछला बरसाती पानी
सूरज की उस पर पड़ती सीधी किरणें
परावर्तित हो, दे रही
सप्तरंगी चकमक फीलिंग !

गोल गोल गड्ढों में
बिखरे स्टील के थाली से
चमकते जल
और उसमे पल-पल
बदलती तस्वीरें

एकदम से आ ही गयी एक
चंचल शोख मुस्कराहट
क्योंकि
एक थाली में था मैं निक्कर टीशर्ट में
तो, दुसरे में जगमगा रही थी तुम
रेनबो कलर वाले फ़्रोक में !!

नकचढ़ी तुम,  अकडू मैं
मुस्कुराते मन ने कहा तुम्हे 'धप्पा'
और खेलने लगे आइस-पाइस
तो कभी उसी पानी में मारा बॉल
खेला 'पिट्टो'

ठंडा बरसाती पानी ने बरसा ही दिया मन
खिलखिलाया आसमान
सहेजी स्मृतियों के साथ.......!

ओ बारिश की बूँदें
फिर बरसना .........
खोलूं खिड़की या दरवाजा ......

करूँगा इन्तजार
तुम्हारा और उस
नकचढ़ी का भी ............!!

आओगे न!
-----------
ये बारिश की बूंदें और स्मृतियाँ !!


Tuesday, July 4, 2017

पैकेज शानदार व्यक्तित्व का


चाहिए मानवीयता का विटामिन
दयालुता का प्रोटीन
पुरुषार्थ से लबालब कार्बोहाईड्रेट
और
फिसलती हुई प्यारी सी वाणी की हो वसा भी !
ताकि सबको घोंट पीट कर
बना पाऊं खुद का
एक सम्पूर्ण पैकेज
कुछ शानदार व्यक्तित्व सा !!
काश इन उपरोक्त
संवेदनाओं से परिपूर्ण
मानवीय पोषक पदार्थों के छोटे पैकेट
होते मार्केट में उपलब्ध
हम
लो मीडियम इनकम ग्रुप वाले लोगो के लायक
तो सच्ची !!
खरीद लाता
हरेक का एक दो पैकेट
अपने कमियों के हिसाब से
किसी डाक्टर के सलाहानुसार
फिर बस, बना कर होम्योपैथी दवा सी खुराक
पुर्जे में छोटी बड़ी गोलियां और पाउडर
सुबह नाश्ते से पहले, ब्रश के बाद
दोपहर खाने के बाद, पानी के साथ
और
रात, सोने के बाद, सपने देखने से पहले !
फिर कुछ हो ऐसा
कि, कहे सब, देखो
आमूलचूल, अभूतपूर्व परिवर्तन
हो चला इसमें !!
अब नहीं है शिकवा या गिला किसी को !
सुनो !
बस, ये पता तो बता दो
कहाँ मिलेगा ये
संवेदनाओ से परिपूर्ण पोषक तत्व !!

इन्तजार है !!

Friday, June 30, 2017

प्रेम का भूगोल



आज अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग दिवस के तौर पर हम सभी ब्लॉगर मना रहे हैं , तो ये प्रेम कविता झेलिये :)

भौगोलिक स्थिति का क्या प्रेम पर होता है असर ?
क्या कर्क व मकर रेखा के मध्य
कुछ अलग ही अक्षांश और देशांतर के साथ
झुकी हुई एक ख़ास काल्पनिक रेखा
पृथ्वी के उपरी गोलार्ध पर मानी जा सकती है ?
ताकि तुम्हारे उष्ण कटिबंधीय स्थिति की वजह से
ये आभासी प्रेम का तीर सीधा चुभे सीने पर
फिर वहीँ मिलूँगा मैं तुम्हारे सपने में
आजाद परिंदे की मानिंद
और हाँ, वो ख्व़ाब होगा मानीखेज
उस ख़ास समय का
जब सूर्य का ललछौं प्रदीप्त प्रकाश
होगा तुम्हे जगाने को आतुर
हलके ठन्डे समीर के कारवां में बहते हुए
तुम्हारे काले घने केश राशि को ताकता अपलक
उसमें से झांकता तुम्हरा मुस्कुराता चेहरा
कुछ तो लगे ऐसा जैसे हो
बहती गंगा के संगम सा पवित्र स्थल
और खो चुके हम उस धार्मिक इह लीला में
क्या संभव है हो एक अजब गजब जहाज
जो बरमूडा ट्रायंगल जैसे किसी ख़ास जगह में
तैराते रहे हमें
ताकि ढूंढ न पाए कोई जीपीएस सिस्टम
बेशक सबकी नजरें कह दे कि हम हो चुके समाधिस्थ
पर रहें हम तुम्हारे प्रेम के भूगोल में खोएं
एक नयी दुनिया बसायें
अपने ही एक ख़ास 'मंगल' में
काश कि तुम मिलो हर बार
मेरे वाले अक्षांश और देशांतर के हर मिलन बिंदु पर
काश कि
हमारे प्रेम का ध्रुवीय क्षेत्र सीमित हो
मेरे और तुम्हारे से ....

~मुकेश~


Wednesday, June 21, 2017

~पप्पा~



बेवजह मुस्कुराते हुए पापा
इनदिनों खिलखिलाते नहीं हैं
आजकल बिना गुस्सा किये
बच्चो से इतराते हुए
नकार देते हैं, हम सबकी कही बातों को
शायद वे ऐसा करके
अपने दर्द को जज्ब करते हुए
दूसरे पल ही देखते हैं नई जिंदगी

सबसे प्यारा लगता है,
जब वो मम्मी के बातों को करते हैं अनसुना
फिर मम्मी के चिल्लाने पर तिरछी हंसी के साथ निश्छल भाव से देखते हैं ऐसे
जैसे कह रहे हों,
बेवकूफ, मैं तो अपनी ही चलाऊंगा ताजिंदगी
बेशक तुम्हे लगे बात मान लूंगा

खाते हुए खाना या पीते हुए दूध
अक्सर गन्दा करते हैं शर्ट,
फिर होती है उनकी जिद
पल में बदलने की
पापा को अब भी पसन्द है
झक्क सफेद बुशर्ट पहनना
पापा नहीं चाहते कभी भी
बूढ़ा कहलवाना

मम्मी के इतना भर कहते ही कि
बूढ़े हो गए हो
चाहते हैं तन कर खड़े होने की करें कोशिश
आंखों में बचपना कौंधता है
या शायद अपनी खूबसूरत जवानी

बाहर से कमरे में ले जाते समय
चौखट पकड़ कर
मचाते हैं जिद
कुछ देर और....
शायद खुले आकाश से रहना चाहते हैं पापा
पापा हम सबके आसमान ही तो हैं

अपने छोटे बेटे को देखते ही
आंखे छलछला जाती है इनकी,
क्योंकि उम्र केयर मांगती है
जो बेहद संजीदगी से पूरा कर पाता है वो
पर बड़े बेटे से
कभी भी बहुत करीब न होकर भी
उसके दूर जाने की कसक
नम कर जाती है पलकें इनकी ।

जिंदगी हर पल नम होती हुई बताती है
पापा आपका जीना,
बताता है अभी मुझमे भी बचपना है
थोड़ा बहुत बाकी

इनदिनों आपके बचपन में
ढूढने लगा हूँ अपना बुढापा
दिन बेहद तेजी से गुजर रहा है पापा।

जीते रहिये पप्पा 😊

~मुकेश~

Friday, June 16, 2017

टिफिन


एयरटाइट प्लास्टिक टिफिन के
डब्बे का
लिड युक्त लीक प्रूफ ढक्कन
से बंद होना
इस आश्वस्ति के साथ 
कि संजोयी गयी है ताज़गी
तभी तो
भोजन की सोंधी सोंधी ख़ुशबू को
संजोये रखता है
ये कलरफुल डब्बा
अपने अन्दर
डब्बे के अन्दर ही
रोटियां तो कभी परांठे
लिपटी होती है
सिल्वर फॉयल में
जैसे किसी ने बाहों में भर कर
फूंक रखी हो ताजगी
साथ ही होती है
सब्जी की अलग कटोरियाँ
सलाद व अचार जैसा भी कुछ
ऐसे लगता है,
जैसे प्यार का बहता स्वरुप !!
करीने से रखा एक चम्मच भी
माने, एक परिवार जिसके
कुछ सदस्य हैं साथ साथ
अलग अलग रंग रूप में
दोपहर में
जैसे ही खुलता है
ये ढककन और हटती है फॉयल
खुशबू भोजन की
खुशबू प्यार की
खुशबू मेहनत की
खिलखिला कर कह उठती है
प्रेम का रास्ता
बनता है
उदर के माध्यम से ही
हर बार
पेट भर जाने के बाद
अँगुलियों से आती है खुशबू
तुम्हारे प्यार की
बस
प्रेम और पेट की भूख बनी रहे !
एक अजूबा सा ख्याल टिफिन के डब्बे से !!

पुरवाई पत्रिका में मेरी कविता

Tuesday, May 23, 2017

स्किपिंग रोप: प्रेम का घेरा





स्किपिंग रोप
कूदते समय रस्सी
ऊपर से उछल कर
पैरों के नीचे से
जाती है निकल 
जगाती है
अजब सनसनाती सिहरन
एक उत्कंठा कि वो घेरा
तना रहे लगातार
एक दो तीन ... सौ, एक सौ एक
इतनी देर लगातार !!
बैलेंस और
लगातार उछाल का मेल
धक् धक् धौंकनी सी भर जाती है ऊर्जा!
जैसे एक कसा हुआ घेरा
गुदाज बाहों का समर्पण
आँखे मूंदें खोये
हम और तुम !!
उफ़, सी-सॉ का झूला
अद्भुत सी फीलिंग
साँसे आई बाहर, और रह गयी बाहर
ऐसे ही झूलते रहा मैं
तुम भी ! चलो न !
फिर से गिनती गिनो, बेशक ...
बस पूरा मत करना !!
काश होती वो रस्सी थामे तुम और
.....और क्या ?
मैं बस आँखे बंद किये बुदबुदाता रहता
एक दो तीन चार पांच...............निन्यानवे ...........एक सौ तेरह ...!!

Thursday, May 11, 2017

लजाती भोर



सुखी टहनियों के बीच से
ललछौं प्रदीप्त प्रकाश के साथ
लजाती भोर को
ओढ़ा कर पीला आँचल
चमकती सूरज सी तुम
मैं भी हूँ बेशक बहुत दूर
पर इस सुबह के
लाल इश्क ने
कर दिया मजबूर
तुम्हे निहारने को !!
_______________
सुनो ! चमकते रहना !


Saturday, April 22, 2017

जिंदगी में फड़फड़ाता अखबार

दो न्यूज पेपर - एक हिंदी व एक अंग्रेजी के
एक रबड़ में बंधा गट्ठर
फटाक से मेरे बालकनी में
गिरता है हर सवेरे
मुंह अँधेरे !
हमारी जिंदगी भी
ऐसे ही हर दिन सुगबुगाती
लिपटे चिपटे चद्दरों में बंधे
चौंधाई आँखों को खोलते हुए
अखबार का रबड़ हटाते हैं
और छितरा देते हैं बिछावन पर
जैसे स्वयं छितर जाते हैं
चाय से भरे कप के साथ
हमारे बीच का संवाद
रहता है
कभी हिंदी अखबार सा
प्रवाह में पिघलता हुआ तो
कभी अंग्रेजी सा
सटीक व टू द पॉइंट
आदेशात्मक
हर नए दिन की शुरुआत
अखबार के हेडिंग की तरह
मोटे मोटे अक्षरों में
बिठाते हैं मन में
आज फलाना ढिमका कार्य
जरूर सलटा दूंगा
और देर नही हो सकता है अब!
पर
कुछ मर्डर मिस्ट्री वाले न्यूज़ की तरह
कोई न कोई
अलग व अजीब सा कार्य
टपक ही पड़ता है हर दिन
तो, अख़बार के संपादकीय की तरह
होता है अहम
जिंदगी में भी अर्द्धांगिनी के
दिशा निर्देश!
मन तो भागता है
साहित्यिक पुनर्नवा या
स्पोर्ट्स पेज पर
लेकिन दाल चावल की महंगाई
व कम आमदनी
खोल देता है
व्यापारिक परिशिष्ट या
बिग बाजार जैसे सेल के प्रचार का पृष्ठ
मैन विल बी मैन
बेशक न पढ़े अंग्रेजी समाचार पत्र
पर उसके सिटी न्यूज और
कलरफुल पेज थ्री
चेहरे पर भरते हैं रंग
तो अखबार और जिंदगी
दोनों ही कभी होते हैं तह में
सब कुछ परफेक्ट
तो कभी फड़फड़ाते दोनों
रहते हैं गडमगड
लेकिन एक अंतिम उम्मीद
जिंदगी रद्दी अख़बार सी
कबाड़ न बन कर रह जाए
बस अंत होने से पहले
बेशक ठोंगे या पैकिंग मटेरियल बन कर ही
उपयोगी बन दिखाएँ
काश मेरी जिंदगी ख़त्म हो कर भी
रीसाइकल्ड हो जाए


Tuesday, April 11, 2017

APN न्यूज़ पर म्यूजिकल शो "मेरा भी नाम होगा"


"टेक रीटेक, साउंड कैमरा म्यूजिक, हाफ स्केल ऊपर-नीचे"

हाँ तो कुछ ऐसे शब्दों से वास्ता पड़ा, जब APN न्यूज़नेटवर्क के नोएडा सेक्टर 68 स्थित शानदार स्टूडियो में उनके आगामी म्यूजिकल रियलिटी शो "मेरा भी नाम होगा" के पहले राउंड के लिए होने वाले सुरोत्सव हेतु मैं भी एक क्रिटिक ज्यूरी के रूप में उपस्थित था |

APN विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और पूर्वांचलके दर्शकों के बीच अपने ख़ास जुड़ाव के लिए उस क्षेत्र के दर्शकों के लिए बेहद लोकप्रिय श्रेणी के टीवी चैनल में अपना स्थान रखता है | APN खबर के साथ साथ अन्य सांस्कृतिक माध्यम के द्वारा जनजागृति में अपना योगदान बराबर देता आया है | और इसी अभियान के एक कड़ी के रूप में इस न्यूज़नेटवर्क ने अब पूर्वांचल की माटी की सौंधी सुंगंध वाले भोजपुरी लोकसंगीत के माध्यम से भी जनचेतना जगाने हेतु एक अनूठे प्रयास के तौर पर म्यूजिकल रियलिटी शो "मेरा भी नाम होगा" लेकर आयी है | जिसमे म्यूजिकल धुनों के अलावा बिरहा, चैता, कजरी, छठ, निर्गुण गायकी, भजन आदि के माध्यम से सामाजिक सरोकारों से जुड़े विविध कार्यक्रमों पर प्रतिभागियों से ये अपेक्षा की जाएगी की वो सुरों में अपनी बात रखें |



गायिकी के क्षेत्र में बड़ा नाम तृप्ति शाक्या ने जैसे ही इस राउंड का आगाज फिल्म काला पानी के गीत "नजर लागी राजा तोरे बंगले पर....." के साथ दमदार और सुरीली प्रस्तुति के साथ शुरू किया, एक समां बंधता चला गया जो पूरे समय जानदार तरीके से सबकी मेहनत और सुरों को समेटे दीखता रहा | कार्यक्रम के जज के रूप में तृप्ति शाक्या, म्यूजिक डायरेक्टर शेखर त्रिपाठी, स्टैंड अप कामेडियन सिद्धार्थ सागर और दर्शन जी के रूप में विराजमान थे और हर बार इनके कमेंट्स सुनकर ऐसा लग भी रहा था कि जजों से जो अपेक्षा रहती है उससे जरा भी कमतर नहीं हैं ये |


क्रिटिक ज्यूरी के तौर पर मिडिया से हिन्दुस्तान के सीनियर एडिटर विशाल ठाकुर, शायर जुनैद खान और एक कवि/ब्लॉगर के रूप में मैं उपस्थित था | इंडियन आयडल फेम रवि त्रिपाठी और न्यूज़ एंकर अभिलाषा ने मंच सञ्चालन के लिए जो समा बाँधा, वो उल्लेखनीय है, रवि ने अपने सुरों के साथ और अभिलाषा ने अपने शब्दों की बाजीगरी के साथ दर्शकों को बांधे रखने की बेजोड़ कोशिश की !!बैक स्टेज पर मनीष और सोनाक्षी अपने कार्यों के साथ दिख रहे थे, कि मेहनत करनी पड़ती है, एक प्रोग्राम के सक्सेस के लिए | मैंने अपने वक्तव्य में एक दम से कुछ सुनी सुनायी पंक्तियों को ही तोड़ मरोड़ कर एक पंक्ति कही जो दिल की बात थी :
".....मैंने चाहा ही नहीं, वरना हालात बदल सकते थे
मैं तो चुप ही रहा वरना खुशियों होंठों से छलक सकती थी
मैं तो रुका ही रहा झील की तरह, बहता तो निकल सकता था दरिया के तरह .........
..........हाँ, चाहत होती तो अपने समय में मैं भी तो कह सकता था "मेरा भी नाम होगा"  |"

प्रतिभागियों के रूप में अलग अलग जगहों से आये हुए युवक/युवतियां और एक नन्ही परी भी उपस्थित थी | कौशलेन्द्र, शुभम, आव्या, मुस्कान, रितेश, श्रेया, अमन, राहुल और आशुतोष ने बखूबी अपने गायकी से ये दिखाने की कोशिश की कि क्यों वो "मेरा भी नाम होगा" में आये हैं, और वो क्यों चाहते हैं कि उनका नाम हो | हर गायक/गायिका अपने परफोर्मेंस के साथ सर्वश्रेष्ठ था | इन युवाओं के लिए कुछ पंक्ति कहना चाहूँगा, याद रखना बच्चो :)
मिटटी पे धंसे पाँव
देते हैं आधार
देते हैं हौंसला
देते हैं पोषण

हमने संगमरमर पर
बराबर फिसलते देखा है
नर्म पांवों को ... !

स्टैंडअप कामेडियन सिद्धार्थ सागर ने भी कुछ देर के लिए अपने जलवे से एक अलग छटा बिखेरी, ये देखना की उन्हें भी म्यूजिक के साथ गजब का लगाव है, अच्छा लगा, क्योंकि हार्मोनियम के साथ उन्होंने वडाली बंधुओं की शानदार आवाज निकाली |

कुल मिला कर एक शानदार एंटरटेनमेंट पैकेज जो सामाजिक सरोकार से जुड़ा होने के बावजूद कभी भी नीरस नहीं लगा, पूरा प्रोग्राम एकदम शानदार ग्रिप में कसा हुआ था, और मेरी उम्मीद कहती है, एक ब्लॉक बस्टर शो का आगाज बस होने ही वाला है ......! अगर मैं समीक्षक भी होता तो इस शो के लिए अभी से पांच में साढ़े चार स्टार तो दे ही सकता हूँ !!






Monday, April 3, 2017

खास उम्र की महिलाएं



उम्र की एक निश्चित दहलीज
पार कर चुकी खुबसूरत महिलायें!!
उनके चेहरे पर खिंची हलकी रेखाएं
ऐसे जैसे ठन्डे आस्ट्रेलिया के
'डाउंस' घास के मैदान में
कुछ पथिक चलते रहे
और, बन गयी पगडंडियाँ
ढेरों, इधर उधर
पथिकों की सुविधानुसार !!
चलते चलते थकी भी, रुकी भी
अपने पैरों पर चक्करघिन्नी काटी
और, बस चेहरे पर बन गए, कुछ अजूबे से
गड्ढे, डिम्पल ही कह लो !!
क्या जाता है
लटें उनकी
कुछ बल खाती काली, तो कभी सुनहरी
आ कर गिरती हैं चेहरे पर
जैसे हरीतिमा और
उनमे कुछ सुन्दर लाल या सफ़ेद जंगली फूल
यूँ तो उम्र हर एक की होती है
पेड़ जो ठूंठ बन कर सो रहे
या जो हरी पत्तियों और चमकीले फूलों संग लह लहा रहे !!
कभी देखा है ?
सूखे ठूंठ संग ली गयी सेल्फी
लगती है न मन को भली !!
समझ गए न !!
वैसे भी एंटी एजिंग क्रीम का जमाना है
फिर बरगद जितना पुराना उतना छायादार!
ये खास उम्र की महिलाएं,
होती हैं अपने में परिपूर्ण
चाहें तो समेट ले अपने में,
करा दे खुबसूरत सी जिन्दगी का अहसास .!!
पर, होती हैं, संवेदनाओं और मान्यताओं से बंधी
नहीं चाहती उनके वजूद में कोई और खोये
या वो अधर जो लगे हैं सूखने
नहीं हो किसी और के वजूद से गीले !!
एक सच और भी है
इन को भी चाहने वाले करते हैं इन्तजार, बहुत देर तक !!
इन्तजार !! जान तो नहीं लेगा न !!


Tuesday, March 21, 2017

एलोवेरा


हाँ, एलोवेरा के सिंदूरी फूल सी ही 
लगती हो ‘तुम’ 
बिना भीगे प्यार
बिन खाद-दुलार
कंटीले से पौधे में भी 
हरे-भरे अजब से माँसल
पत्तों के बीच
सहज सरल सम्मोहन संग
हर बार जब भी खिली खिली सी
दिखी तुम

औषधि सी तुम
हाँ ज़रा सी तुम
पुरअसर बेजोड़
दिलोदिमाग पर काबिज़
न जाने कब तक के लिए
शायद अब सांस भर
पकी उम्र की दरकार बन
लम्बे समयांतराल में
चमकती हो तुम .....!

सम-विषम परिस्थिति में
बिना जद्दोजहद
एलोवेरा को अपनी है कदर
इसलिये है अपनी फिकर
स्व को स्वीकार कर ही
संभव है परजन हिताय
ज़िंदगी के अभ्यारण्य में
एलोवेरा पुष्प सी प्रेरणा बन
अवतरित होती हो तुम
लम्बी छरहरी चमकीली, आल्हादित कर देने वाली
सिंदूरी रंग में सजी तुम
जीवन की चमक लिये
तुम हाँ तुम ही तो
एलोवेरा की फूल सी तुम

सुनो
यूँ तो हरवक्त नजर नहीं आती
पर, जब भी दिखती हो
छाई सी रहती हो दिलो दिमाग के गलियारे में
वैसे पता तो है ही तुम्हे
फिर भी सुनो
मैं चाहता हूँ
एलोवेरा तुम्हारा वर्चस्व बना रहे
पुष्पित हो
नसों से साँसों तक
दिलोँ से दिमाग़ तक
दुनिया से दुनियादारी तक
हर वक़्त हर जगह ......!!!



Monday, March 6, 2017

चीटियाँ



जा रही थी चींटियां
गुजर रही थी भरे बाजार से
शायद किसी मिठाई की दुकान की ओर
पर थी पंक्तिबद्ध
हर एक के पीछे एक !
तल्लीनता और तन्मयता से भरपूर
कदम दर कदम, सधे क़दमों से
'रुके नहीं, थके नहीं' के आह्वान के साथ
जबकि कई एक बार
किसी न किसी इंसान ने
कर ही दिया जूतों तले मर्दन
की कोशिश कि टूट जाए अनुशासन
कुछ हो गईं शहीद चींटियों को छोड़
बढ़ रही थीं सभी, ऐसे, जैसे कह रही हों
वीर तुम बढे चलो
सिंह की दहाड़ हो ..!
रुके नहीं कभी कदम
थी कुछ अपवाद इन में भी
लगा ऐसे, जैसे है कुछ में नेतृत्व की क्षमता
तभी तो उनमें से कुछ
लम्बे डगों के साथ
कतारबद्ध बढ़ते चीटियों पर
छलांग कर/फलांग कर बिना पक्तियों को तोड़े
बढ़ रही थीं सबसे आगे।
हाँ,इन्हीं में से कुछ को निकलेंगे 'पर'
इन्हीं फड़फड़ाते परों के साथ
उड़ निकलेंगे जौहर दिखाने की कोशिश के साथ
पल भर में मर कर, गिर कर समझा देंगी ये सबको
घातक है पंखों का फड़फड़ाना!
याद रखना
है अगर नेतृत्व क्षमता
है अनुशासन
है निष्ठा
तो बढ़ते रहोगे आगे
बहुत आगे
बस, फड़फडाना मना है !


गायत्री गुप्ता के हाथों में हमिंग बर्ड 

Tuesday, February 28, 2017

आइना


आईने के सामने खड़ा अकेला व्यक्ति
एकांत का प्रतिरोध करने की
एक वाजिब सी कोशिश के साथ !!

वो और उसका प्रतिबिम्ब
जैसे दो बचपन के यार
जैसे एक और एक दो नहीं
हो जाएँ ग्यारह, ऐसी हो उम्मीद !!

होता है न सच्चा और सार्थक
एक ऐसे शख्स का साथ
जो होता है स्वयं जैसा
एक जैसे गुण, दुर्गुण सद्गुण के साथ !!

यानि हँसे तो वो भी मुस्काया खिलखिलाया
रोये तो उसने भी मुंह बनाया, टपकाए आंसू !!

आता है प्यार, उस पर, जो होता है
आईने के उस पार !
जो करते हैं खुद को प्यार
उन्हें आईने में दिख जाता है
हमसफ़र, हमदम हमनजर !!

मतलब, जैसे आईने के सामने वो बुदबुदाया
- 'लव यू'
तो लगा ऐसे,  जैसे  सामने से होंठ हिले
दर्पण के उस पार
हमशक्ल ने कहा 'सेम टू यू' !!


Thursday, February 16, 2017

"विंड चाइम"


सुविधा-संपन्न सोसायटी फ्लैट्स में 
दरवाजे के ऊपर लटकी दिखती हैं 'विंड चाइम्स'
और दरवाज़े से झांकती दिखती है एक अकेली 'मैजिक आई' शक से घूरती
उनकी परछाईं तले, नीचे, पीछे गरीब बस्तियों की किवाड़ों पर होता है अक्सर एक स्वास्तिक, 'ॐ', 786, कभी कोई खंडा और दरके हुए किवाड़ों में होती हैं दरारें कभी दो तख्तों के बीच चिरी लम्बी सी झिर्री झिर्रियों से छनती हवा कभी नहीं निकालती 'ओम' का स्वर
'वन वे मिरर' है 'मैजिक आई' ज़िन्दगी को एकतरफा देख पाने का जरिया जबकि टूटी झिर्री या सुराख आँखों में आँखे डाले, जुड़ने का दोतरफा रास्ता 'मैजिक आई' समृद्धि की चुगली करता जिसकी आज्ञा सिर्फ अन्दर की ओर से आँख लगाये वो एक शख्स ही दे सकता है
उलट इसके, झिर्रियों से झांकते हुए देख सकता है दूर तक कोई भी, अन्दर का घुप्प अँधेरा अभाव यहीं कहीं रहता है रेंगता है 'जीवन' के नाम से जाना जाता है चूल से लटकती तो कभी बस टिकी हुई किवाड़ों पर पुते स्वास्तिक या 'ओम' का खुला सिरा नहीं समेट पा रहा 'खुशहाली' जबकि विंड चाइम की टनटनाहट पंखे के कृत्रिम हवा के साथ भी फैला रही समृद्धि

कल ही ख़रीदा है एक 'विंडचाइम'!

Wednesday, January 18, 2017

आइना झूठ नहीं बोलता



आईना
है वो चश्मदीद गवाह
कटघरे में खड़े अभियुक्त जैसे
अपने सामने दिख रहे चेहरे के लिए
जो बता पता है, या यूं कहें, बता सकता है 
अपराध से अभियुक्त का कोई वास्ता नहीं
आईना
बेशक हो 'एलीबी'
अपराध न करने की,
लेकिन कहते हैं न
झूठ के हज़ार मुंह
और एक चुप सच का
शख्सियत को
जानने समझने के लिये
उतरना पड़ता है
आँखों की गहरायी में
महसूसना पड़ता है
पनियल आँखों की तराई को
जिससे नज़रों का
परावर्तन/अपवर्तन
जोड़ पाये कुछ दरकते बंध
आईना !
मैंने खुरच दी है
तुम्हारे दूसरे तरफ की
सिल्वर सुरमई कलई
जिससे खुल न पाये कलई
तुम्हारी गवाही से
ताकि डाल सकूँ खुद की आँखों में आँखें
बेपरवाह बिंदास ..
आईना!
डरता हूँ तुमसे ...
तुम्हारी सच्चाई से
कह सकते हो कभी भी
हर व्यक्ति
होता है गुनाहगार
अरे रुको !!!
कमियों के भण्डार तुम भी कम नहीं
जानते हो ने
कितनी कमज़ोर है तुम्हारी याददाश्त
और उल्टा ही दिखाते हो
मेरा सीधा हो जाता है तुम्हारा उल्टा
आखिर सजा देना/पाना
इतना आसान भी तो नहीं