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Friday, May 18, 2012

~ कल और आज ~



"अगे मैया

मर जइबे"

छाती की बढती धड़कन

का दर्द

या,

कभी कभी न पढने का बहाना !

फिर

मचा देती थी

कोहराम......... मेरी दादी माँ!

.

आज पूरी रात

अथाह परेशानियों के दर्द तले

सो जाते हैं

सिसकते हुए, बिना आंसू के

और फिर नयी सुबह

"टिंच" पैंट शर्ट के साथ

हल्की मुस्कराहट के साथ

पहुँच जाते हैं ऑफिस ! ऑफिस !!


Thursday, May 3, 2012

facebook पे हम !






विभिन्न लुभावनी


बदलती

display picture

के साथ

यहाँ नजर आते हैं हम ।

उस पर दिखते likes

की संख्या से

अपने को खुश करते हैं हम ।

पर आईने के सामने

खुद को खड़ा करने से

बचते हैं हम ।

घर पर trust को तोड़ कर

बहुतों बार विश्वास और भरोसे

से wall को सजाते हैं हम ।

मन व उसकी उड़ान को

key board से computer screen

तक बांध कर रखते हैं हम ।

काम बेशक कम हो

उपलब्धियों की लिस्ट से

खुद को सजाते हैं हम ।

Jeans, t-shirt मे बैठकर

कानो मे लगे earphone

पर Madonna की आवाज के साथ

भारतीय संस्कृति बचाने

की topic पर

हिस्सा लेते हैं हम ।

चमकती आंखे हैं

पर दृष्टि नहीं

दर्द एवं पीड़ा से

लुटपीट कर

अपने को सरताज बनाते हैं हम |

बेशक पूरी जिंदगी

एकाकीपन मे काट दी

दोस्ती पर हर दिन

नए शेर post करते हैं हम ।

गंदी नजर, घृणित सोच के साथ

हर समय female friend

के दिल पर

राज करने की कोशिश

करते हैं हम ।

अपनो से बेशक

मुंह फुलाए रहे

आभासी दुनिया मे

muaaaah.।

kisses..।

love...।

जैसे शब्द जताते हैं हम ।

स्वयं को

दो profile मे

बाँट कर

दोहरी जिंदगी जीने की कोशिश

करते हैं हम.।

अपने काले चेहरे को बेदाग

दिखाते हैं हम..।

ऐसे है हम.।

facebook पे हम ।

- मुकेश सिन्हा