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Friday, November 29, 2013

विवाह-वर्षगांठ


कल अपनी एनिवरसरी है 
और आज रात 
चलचित्र के भांति 
सामने से गुजर रहा 
तुम्हारा ये तेरह साल का साथ !!
पहली बार तुम्हारे ही ऑफिस मे मिलना
दूसरे बार एक साथ रिक्शे पर सफर
तीसरे बार इंगेजमेंट पर स्पर्श
और फिर चौथी, पाँचवी ... अंतहीन
सफर व साथ ... अबतक ... !!

जब भी मैं याद करता हूँ तुम्हारा प्यार
तो याद आता है तुम्हारा गुस्सा
पर साथ में मेरे लिए
तुम्हारा केयर व पोजेसिवनेस
कई बार देखा व परखा
जब भी हमारे में होते हैं झगड़े
तुम रेक पर रखे लकड़ी के लव वर्ड्स
के चोंच को लगती हो मिलाने
घर के ईशान कोण पर
थोड़ा पानी का रखना
ताकि दाम्पत्य जीवन रहे खुशहाल !!

याद है मुझे
तुम्हें नहीं था पसंद
चाय, चाकलेट, बिस्किट आदि
और भी बहुत कुछ !
पर आज वो सब है पसंदीदा
क्योंकि तुम्हें चाहिए बस मेरा साथ !
याद है मुझे वो दिन भी
जब हाथ-पैर दोनों तुड़वा बैठा था
और तुम दिखाना चाह रही थी साहस
पर डाक्टर के सामने
तुम्हारी बेहोशी के साथ दिखी तुम्हारी
बेचैनी और प्यार !!

उफ़्फ़, 12 बजने वाले हैं
और देखो हम दोनों की मोबाइल का अलार्म
बता रही है
हमें एक दूसरे को करना है विश
क्योंकि हैं एक दूसरे के लिए अहम !!
सदैव रहेंगे न !!
___________________________
आज हमारे शादी की सालगिरह है, आप सबके शुभकामनाओं की जरूरत है 




Friday, November 22, 2013

अनमोल प्यार




अजीब सी जिंदगी
अलग सा फसाना
नगण्य उम्मीद
और फिर सब कुछ पा जाना
शायद लिखा जा सकता
या लिखा गया था
एक प्रेम तराना !!

कुछ बहुमूल्य पलों का साथ
था हाथों मे हाथ
कभी पकड़े, कभी थरथराए
एक दूसरे की
सिर्फ थी सामने नजरें
थी चमकती बोलती आंखे
थे अनबोले से एहसास
थी समीपता
थी नादानियाँ
थी बचकानी हरकतें
था तरंगित मन
बोलो! क्या नाम दूँ उसको
मनचला, मतवाला, अलबेला !!

छोड़ो न, रहने देते हैं
क्या है जरूरी ?
हर प्यार जैसे
एहसास को
संवेदना को
मिल ही जाये मंजिल
पर फिर भी
प्यार तो है प्यार
कुछ पलों का अनमोल प्यार!!

  

Tuesday, November 19, 2013

विमोचन : गुलमोहर


                   गुलमोहर - मुकेश कुमार सिन्हा और अंजु(अनु) चौधरी द्वारा सम्पादित 30 कवियों के साझा काव्य संग्रह का विमोचन 16 नवम्बर 2013 को दिल्ली के हिंदी भवन में वरिष्ठ कवि माननीय श्री लीलाधर मंडलोई जी के करकमलों से श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, निदेशक, आकाशवाणी, श्रीमती सुमन केसरी अग्रवाल तथा श्री ओम निश्चल जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। 



                 प्रतिभागी कवियों में से उपस्थित कवियों के काव्य पाठ ने उस सभा को गुलमोहर के रंगों से भर दिया । गुलमोहर के प्रतिभागी रचनाकार हैं : अपर्णा अनेकवर्णा, अरुण शर्मा अनंत, अशोक अरोड़ा , आभा खरे, अनुराग त्रिवेदी, नीलिमा शर्मा, शलिनी रस्तोगी, किशोर खोरेन्द्र, रंजू भाटिया, बोधमिता, उपासना सियाग, नीलु पटनी, दिवेन्द्र सिंह, दीपक शुक्ला, ऋता शेखर, संध्या जैन, महिमा मित्तल, सत्यम शिवम, हुकम चंद भास्कर, गुंजन श्रीवास्तव, नितीश मिश्रा, हरी शर्मा, कमल शर्मा , पवन अरोड़ा, भरत तिवारी, राज रंजन, कुमार जेमिनी शास्त्री, रागिनी मिश्रा, अंजु चौधरी व मुकेश कुमार सिन्हा।



               हिंदी युग्म प्रकाशन के साथ मिल कर पिछले बरस जो मुहीम शुरू हिई थी,  उसकी ये तीसरी कड़ी है । इस से पहले भी अंजु चौधरी और मुकेश कुमार सिन्हा ने मिल कर ‘कस्तुरी’ और ‘पगडंडियाँ’ के नाम से दो कविता संग्रह प्रकाशित किया है, जिस में अधिकतर नवोदित कवियों को जगह दी है। पिछले दिनों इंडिया टूडे के अनुसार “पगडंडियाँ” बेस्ट सेलर भी रही। “गुलमोहर” सारे प्रमुख ई-स्टोर पर उपलब्ध है। 


अशोक अरोरा 
पवन अरोड़ा 

लीला धर मंडलोई 

अनुराग त्रिवेदी 

अंजू चौधरी 

भरत तिवारी  

सुमन केशरी 

अरुण शर्मा अनंत 

कमल शर्मा 

राज रंजन 

नीलू पटनी 

महिमा मित्तल 






























लक्ष्मी शंकर वाजपेयी 















            इक झलक जो मिली उसकी आँखों की चमक बढ़ गयी सौम्य लाल सा रूप था उसका और गुलमोहर की पखुरियाँ और केसर भी मन को छू गए जब 'गुलमोहर' हाथ में आई, मानो जीवन के अनुभवों की तपती दोपहरी में शान से खड़े रक्ताभ पुष्पों से ढके हुए वृक्ष की तरह बहुत कुछ कह रहा हो... कुछ अपनी .. कुछ जग की... कच्ची मिटटी के घड़े से होते हैं नए कवी.. रचनाकार... मन में अपार भावनाओं.. संभावनाओं का सागर लिए... डूबते उतराते रहते हैं... बहुत कुछ कहना चाहते हैं.. कभी अनुभव.. कभी भाषा-अभिव्यक्ति का कच्चापन वो पैनापन नहीं दे पाता है जिस से एक रचनाकार बेफिक्र हो कर आम्विश्वास से बस लिखे... इन्हें एक मंच मिलने में बरसों भी लग जाते हैं... पर आज ये अनुभव से कह सकते हैं की एक ज़रा सा संबल बहुत सुन्दर परिणाम ला सकता है.. 


















अर्थात अगर कोशिश सही हो, तो बहुत से नए लोग हिन्दी कविता के माध्यम से आगे पहुँच सकते हैं, और यहीं दोनों संपादक द्वय का मानना भी है और ऐसा ये चाहते भी हैं।  हिंदी साहित्य जगत विराट है.. अनेक नक्षत्रों.. तारकों से सुसज्जित, ऐसे सघन वन में 'कस्तूरी' मृग सी शर्मीली, शुरुआत ने 'पगडंडियाँ' को अपने अनुभव और सफलता से सुरभित किया।  और इस बार देखते ही देखते उस पगडण्डी के दोनों ओर 'गुलमोहर' के तरुण-तरुओं की कतार लग गयी। जो धीरे धीरे कलिकाओं से झूम उठी.. और 'गुलमोहर' अपने संपूर्ण प्रस्फुत्तित सौन्दर्य के साथ प्रस्तुत हुयी.. अपनी कविताओं की विनम्र भेंट के साथ...

गुलमोहर 
(साझा कविता संग्रह)
मूल्य : 150/- 
प्रकाशक : हिन्द युग्म 
1, जिया सराय, हौज खास, नई दिल्ली 

- अपर्णा अनेकवर्णा 

Wednesday, November 13, 2013

विमोचन : गुलमोहर


हम गुलमोहर के रचनाकर
अपनी खुशियों में करना चाहते हैं
आपको शामिल .....
चाहते हैं आपकी शुभकामनाएँ
आपकी गरिमामय उपस्थिति
आप सबका प्रदीप्त सान्निध्य।
तो आएँगे न ...
जरूर आइएगा
इंतज़ार करेंगे हम सब.......

30
कवियों की प्रतिनिधि कविताओं के संग्रह "गुलमोहर"
का विमोचन

सान्निध्य :
लीलाधर मंडलोई, वरिष्ठ कवि
सुमन केशरी, वरिष्ठ कवयित्री
लक्ष्मी शंकर वाजपेई, वरिष्ठ कवि-गीतकार
ओम निश्चल, वरिष्ठ कवि-लेखक
मनीषा कुलश्रेष्ठ, चर्चित कहानीकार

स्थान : हिंदी भवन, आईटीओ के पास
तृतीय तल
विष्णु दिगम्बर मार्ग
नई दिल्ली 

दिन : 16 नवम्बर 2013
समय : दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक

गुलमोहर के प्रतिभागी रचनाकार :

अपर्णा अनेकवर्णा
अरुण शर्मा अनंत
अशोक अरोड़ा
आभा खरे
अनुराग त्रिवेदी
नीलिमा शर्मा
शलिनी रस्तोगी
किशोर खोरेन्द्र
रंजू भाटिया
बोधमिता
उपासना सियाग
नीलू पटनी
दिवेन्द्र सिंह
दीपक शुक्ला
ऋता शेखर
संध्या जैन
महिमा मित्तल
सत्यम शिवम
हुकम चंद भास्कर
गुंजन श्रीवास्तव
नितीश मिश्रा
हरी शर्मा
विवेक अरोरा
भरत तिवारी
राज रंजन
कुमार जेमिनी शास्त्री
पवन अरोड़ा
अंजु चौधरी
मुकेश कुमार सिन्हा

गुलमोहरमेरे और अंजु(अनु) चौधरी द्वारा सम्पादित 30 नवोदित कवियों के साझा कविता संग्रह का विमोचन 16 नवम्बर 2013 दिन मे 1 बजे से 4 बजे के बीच दिल्ली के हिंदी भवन, विष्णु दिगंबर मार्ग, नई दिल्ली में लीलाधर मंडलोई, वरिष्ठ कवि, सुमन केशरी, वरिष्ठ कवयित्री, लक्ष्मी शंकर वाजपेई, वरिष्ठ कवि-गीतकार, ओम निश्चल, वरिष्ठ कवि-लेखक व मनीषा कुलश्रेष्ठा, चर्चित कहानीकार के सान्निध्य मे सम्पन्न होना निश्चित हुआ है। गुलमोहर के प्रतिभागी रचनाकार हैं : पवन अरोड़ा, अपर्णा अनेकवर्णा, अरुण शर्मा अनंत, अशोक अरोड़ा , आभा खरे, अनुराग त्रिवेदी, नीलिमा शर्मा, शलिनी रस्तोगी, किशोर खोरेन्द्र, रंजू भाटिया, बोधमिता, उपासना सियाग, नीलु पटनी, दिवेन्द्र सिंह, दीपक शुक्ला, ऋता शेखर, संध्या जैन, महिमा मित्तल, सत्यम शिवम, हुकम चंद भास्कर, गुंजन श्रीवास्तव, नितीश मिश्रा, हरी शर्मा, विवेक अरोरा, भरत तिवारी, राज रंजन, कुमार जेमिनी शास्त्री, अंजु चौधरी व मुकेश कुमार सिन्हा। ये कविता संग्रह शैलेश भारतवासी का हिन्द युग्म प्रकाशित कर रहा है। इस से पहले भी हमने मिल कर कस्तुरीऔर पगडंडियाँके नाम से दो कविता संग्रह में बहुत से नवोदित कवियों को जगह दी है। पिछले दिनों इंडिया टूडे के अनुसार पगडंडियाँ बेस्ट सेलर भी रही। अर्थात अगर कोशिश सही हो, तो बहुत से नए लोग हिन्दी कविता के माध्यम से आगे पहुँच सकते हैं, और यहीं हमारा मानना है और ऐसा ये चाहते भी हैं ।

एक जो महत्वपूर्ण बात है, जो मैं फिर से कहना चाहता हूँ, मैं आज भी समझता हूँ, मैं इस लायक नहीं हूँ की किसी और की कविताओं को सम्पादित कर पाऊँ, पर फिर भी ये तीसरी साझा कविता संग्रह है और इसके पहले प्रकाशित हुए दोनों संग्रहों को सबने सराहा है ! और आगे भी आप सबसे यही उम्मीद रहेगी !! 

इन वेबसाइटों से आप अपनी प्रतियाँ सुरक्षित कर सकते हैं-

@Snapdeal: http://www.snapdeal.com/product/gulmohar/1909245992 (मात्र रु 105 में, कैश ऑन डिलीवरी सुविधा के साथ, अगर आप प्रतिभागी कवियों और संपादकों द्वारा हस्ताक्षरित प्रति पाना चाहते हैं तो इसी वेबसाइट से बुक करें)

@Homeshop18: http://www.homeshop18.com/gulmohar/author:mukesh-kumar-sinha/books/poetry/product:31025581/cid:10938 (मात्र रु 108 में, कैश ऑन डिलीवरी सुविधा के साथ, घर मँगाने का कोई अतिरिक्त खर्च नहीं)

@Infibeam: http://www.infibeam.com/Books/gulmohar-hindi-anju-anu-chaudhary-mukesh/9789381394595.html (मात्र रु 120 में, कैश ऑन डिलीवरी सुविधा के साथ)

@BookAdda: http://www.bookadda.com/books/gulmohar-anju-anu-9381394598-9789381394595 (मात्र रु 143 में, कैश ऑन डिलीवरी सुविधा के साथ)

*कैश ऑन डिलीवरी का आशय यह है कि आपको इस किताब को ऑनलाइन खरीदने के लिए क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ट/नेट बैंकिंग आदि के माध्यम से पहले मूल्य नहीं चुकाना है, बल्कि जब किताब आपके घर पहुँच जाए तो कोरियर वाले को नगद पैसे देने हैं।


आप सबका इंतज़ार रहेगा !!


Tuesday, November 5, 2013

हाँ तुम !!


तुम हाँ तुम !! मेरे लिए हो रोटी-चावल-दाल जैसे ठोस जरूरी खाद्यान जीने के लिए जरूरी, अहम ! तुम मेरे लिए, मेरे अंदर पिघलता द्रव हो लाल बहते रक्त प्रवाह के तरह या फिर आंखो से बहते खारे पानी की जलधारा जो दर्द/खुशी हर समय बह निकलती है
तुम आक्सीजन हो साँसो में हर क्षण अंदर – बाहर जिया ही नहीं जा सकता तुम बिन ! तुम पदार्थ की हरेक अवस्था की तरह हो जरूरी ठोस-द्रव-गैस
तुम मेरी जरूरत मेरी शकसियत मेरी जिंदगी बस तुम ही तो हो !!
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मेरी धर्म पत्नी अंजू का आज जन्मदिन है, उसको शुभकामनायें !!