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Thursday, November 27, 2014

वर्चस्व की लड़ाई


कुछ बातें अचंभित करती है
जैसे कहते है,
जंगल में, होता है एक शेर!
बेवकूफ बनाते हैं, देखा है मैंने
गिर वन में, कुछ दुरी पर 
दो !! अलग अलग शेर
वैसे फारेस्ट ऑफिसर भी बता रहा था
होती है, वर्चस्व की लड़ाई उनमें !!
गुर्राते हैं, एक दुसरे पर, भाव खाते हैं
ऐसे जैसे, कोई एक ही है
है उस जंगल का शहंशाह
ये भी बताया उन्होंने
कई बार उनके बीच के झगडे में
लगा कोई एक मारा जायेगा !!
आखिर उन्हें बहुत रखना पड़ता है ध्यान
संरक्षित जीव जो हैं !!
पर घटनाएँ, आश्चर्यचकित करती हैं
लड़ाई शेरों के बीच होती है
लेकिन मारे जाते हैं
बारहसिंघा, खरगोश या बकरे भी
आखिर हर बड़ी लड़ाई की परिणति
ख़त्म होती है
दावत और राउंड टेबल पर
फिर परोसे जाते हैं 'नरम मांस'
और हाँ! शेर क्या सियार भी नहीं मरते
आखिर कोई समझौता करवाने वाला भी तो हो
हमारे राजनितिक शेरों के बिसात में भी
होता है, ऐसा ही न !!
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मैंने अपने में खरगोश देखा है !!
(पुनश्च : शेरों के वर्चस्व की लड़ाई जारी रहेगी, ताकि लोकतंत्र कायम रहे )
यश-ऋषभ हमिंग बर्ड के साथ 

Saturday, November 15, 2014

खुली आँखों से देखा सपना


मेरे कुछ ज्यादा चलते दिमाग ने
एक दिन, लगाई घोड़े सी दौड़
होगा एक दिन
स्वयं का ख़्वाबों सा घर
खुद के मेहनत के पैसों से
ख़रीदे हुए ईंट, रेत व सीमेंट का !
आभासी, ह्रदय के आईने में
देखा, उसमें कहाँ होगा दरवाजा
कहाँ होगी खिड़कियाँ, रौशनदान भी
गमले रखूँगा कहाँ
ये भी पता था मुझे !!

घर के लॉन में
हरे दूब पर नंगे पाँव चलते हुए
कैसे ओस के बूँद की ठंडक
देगी सुकून भरा अहसास
और तभी, एक गिलहरी पैरों के पास से
गुजर जायेगी
इस्स !! ऐसा कुछ सोचा !

उस आभासी घर के
डाइनिंग टेबल पर बैठ कर
चाय की सिप लेते हुए
खिड़की से दिखते दरख्तों के ठीक पीछे
दूर झिलमिलाती झील के कोने पर
बैठी सफ़ेद फ्लेमिंगो, एक टांग उठाये
कौन न खो जाए उसके खूबसूरती में
आखिर वो मेरे से ही मिलने तो आएगी
माइग्रेट कर के, बोलीविया के तटों से !!

मुझे पता नहीं और क्या क्या सोचा
जैसे बालकनी में
मनीप्लांट के गमले के
हरे पत्ते पर हल्का सफ़ेद कलर
मैं भी उस पत्ते को प्यार से थपकी देते हुए
महसूस रहा था
छमक कर आ रही
बारिश की बूंदों को !!

बहुत सोचने से अच्छी नींद आती है न
फिर ख़्वाबों में खोना या बुनना किसको बुरा लगे
पर, ये प्यारा सा ख़्वाब
फिर, नींद टूटते ही
- पापा!! स्कूल फीस !! आज नहीं दिए, तो फाइन लगेगा !!
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जिंदगी में कितने सारी उम्मीदें, सोच जवान होती रहती है ....... है न !!

Tuesday, November 4, 2014


धरती पर कहीं स्वर्ग है 
तो सिर्फ यहीं हैं, यहीं है, यहीं है
ऐसा जपने वालों
ए कश्मीर के निवासियों 
पहली बार देखा व झेला तुमने 
भीषण दर्द और विभीषिका बाढ़ की 
पुरे देश की हेड लाइंस में 
फिर से आ ही गए,
चौतरफ़ा छा ही गये
चौकुठे कैमरे के साथ 
गंभीर बैठा मीडीया
उधेड़ रहा अब तुम्हारे
ज़ख़्मों की बखिया
दर्शाते हुए चिंता
घोषित किया गया
इसे राष्ट्रीय आपदा
और तुरंत फुरंत ही पूरा देश
खड़ा है अब तुम्हारे पीछे
हर भारतीय को प्यारा है कश्मीर
आख़िर हमारा है कश्मीर
हमें दिली हमदर्दी है कश्मीर !
आखिर दिल में बसते हो यार
सुन रहे हो न ए-कश्मीर !!
बेशक घाव देते रहे हो, तुम
फिर भी हमें चिंता है तुम्हारी !!

पर कभी तुमने
उस बिहार की बाढ़ विभीषिका पर
हलकी अधमुंदी नजर भी डाली
वही बिहार, जो इस देश का कभी सिरमौर था
वहां हर वर्ष होता है त्राहिमाम
नेपाल से निकलती नदियाँ
लीलती है लाखों जानें
मूक..बिना अखबारों की सुर्खियां बने
लाखों लाशें बह.. गल.. जल जाती हैं
फिर भी बिहार, नहीं होती हकदार
किसी खास पॅकेज का
अनुदान का, संवेदना का
आंसू तक नहीं मिलते, टपकाने वाले
फिर भी ये बिहार, मजबूती के साथ
तुम्हारे साथ खड़ा है, कश्मीर !!

याद रखना कश्मीर
हर बिहारी के दिल में, बसते हो तुम !!
वैसे भी हर बदमाश बच्चे का ध्यान
माँ बाप ज्यादा ही रखते हैं
ऐसा सुनते आये हैं हम .....
करते भी आए हैं हम...
सच ही है न .......!!
कश्मीर!! कभी दिल में बिहार को
बसा कर देखो न .......प्लीज !!
शायद दिख जाए कभी
एक हल्की झलक तुम्हारी,
पीर कहाँ मेरी-तेरी
एक ही तो है हमारी !
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काश हम रहे साथ जिए साथ 
हरदम साथ साथ