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Sunday, February 20, 2011

वेलेंटाइन डे
























पिछले दिनों वैलेंटाइन डे पर मेरी ये रचना वट वृक्ष
पर आयी, जिसको मैं फिर से आप लोगो के समक्ष रखना चाहता हूँ........




वेलेंटाइन डे 
शब्द विदेशी
याद भी विदेशी
लेकिन एक साधारण दिन में असाधारण अहसास
वो भी बिलकुल देशी...
क्योंकि मोहब्बत का
प्रेम का, प्यार का साथ
देता है खुबसूरत विश्वास.....
एक दूसरे के प्रति चाहत हो जाती है उस दिन खास...

वैसे ये मुआ प्रेम है क्या?
हमारी देशी सोच कहती है
सब कुछ समर्पित कर देना
बिना सोचे सब कुछ खो देना
और फिर चहकते रहना.
किसी दूसरे के लिए सिर्फ जीना....है न...

प्रेम - अपने अन्दर
समेटे रखता है पूरी कायनात
जिंदगी की अनगिनत सच्चाई
होती है उस में लिपटी..
ये है वीरान जिंदगी में
खिला ऐसा फुल
जो महकाता है ब्रह्माण्ड

पर हाँ! इस खास दिन का प्रेम
बन गया ग्लोबल प्रेम
क्यूंकि इस प्रेम में उपस्थित
सेक्स व देहिक सोंदर्य
हो गया है लौकिक और फिजिकल !!

अगर इस दिन
हो जाए हमारी सोच निर्मल
बन जाये हमारा प्यार पवित्र गंगा जल
बिलकुल कोमल जैसे नदी की कल कल...
फिर हमारा कथन
होगा सच्चा चरितार्थ करता हुआ
"यू आर माय वैलेंटाइन ..."


Wednesday, February 9, 2011

इंडिया मांगे वर्ल्ड कप




एक बार फिर आया मौसम

बल्ले और बाल के बीच युद्ध का 
जमीनी चौकों और उड़ते छक्को का
विकेट के ऊपर से उडती गिल्लियों का
"हॉउस देट: के सम्मिलित अपील का
अपने ग्यारह नौजवानों के हौसला अफजाई का ...........

बहुत हुआ इंतज़ार
"धोनी" जल्दी से हो जा तैयार
ताकि हम देख सकें तुम सबो को
जीत के घोड़े पे सवार...
पता नहीं कब तुम सब हमारे मन में बसे
क्योंकि तुम्हारी जीत हम आम भारतियों में
लती है खुशियों का संचार....
तभी तो आटा गुंथती अम्मा का चेहरा
भी चहक उठता है...
जब "सचिन" तुम्हारा बल्ला बोलता है....
हमारे दिल की बजे मृदंग
यदि "सहवाग" का बल्ला बोले "हुर्र हुर्र दबंग"
"विराट, रैना व गंभीर"
जिनके शाट बताये ये हैं वीर, शुर वीर
"युसूफ और युवराज"...तुम इतने मरो चौक्के छक्के
की पूरा स्टेडियम गूंजे "चक दे, चक दे फट्टे"
"हरभजन-पियूष" अपनी फिरकी के दिखा दे जलवे
ताकि हम नाचते हुए कहेँ "बल्ले बल्ले"
"जाहिर, मुनाफ और नेहरा"
काश! तुम बालर्स पर बांध जाये जीत का सेहरा...

अंततः 
हम सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों का सपना
ये प्यारा विश्व क्रिकेट का कप कर दो अपना.............
यही है हमारी दिली तमन्ना.........:)



आप सबो से गुजारिश है ...अपनी शुभकामना सन्देश जरुर पोस्ट करें...........:)

Thursday, February 3, 2011

आज की अदालत



हमारे देश के आज की अदालत!

जो बनी थी, दूर करने के लिये अदावत!!

पर क्यूं फरियादी यहाँ सहता है जलालत!!!

क्यूं खून चूसते है, वकील जो करते हैं वकालत!!!!



अदालत का शांत कमरा

सन्तरी की तेज आवाज

बा-अदब बा-मुलायजा होशियार!

जज साहब पधार रहे हैं...

एक कटघरे में खड़ा फरियादी

भींगी आँखों में जिसकी है उम्मीद....!!

जज साहब की कड़क आवाज

आर्डर आर्डर!!!

जिसका अर्थ तथाकथित वकील समझता है

सच का कर दो "मर्डर"!!

काले लबादे में खड़ा वकील ...

अदब से...."माई लोर्ड"!!

दुसरे कटघरे में खड़ा ये मुजरिम

है बहुत बड़ा "फ्रॉड"!!

पर वो दे चूका है "रिवार्ड" !!

अत्तः दे दो इसको 'वेल' का "अवार्ड"!!



हाय रे न्याय का मंदिर!

तेरी अजब कहानी है

अपनी भूख मिटाने वाला

पांच - दस रूपये का चोर

हो जाता है अन्दर!!

और करोडो रूपये डकारने वाले

नेता....कहलाते हैं सिकंदर!!!

क्योंकि जज साहब के नजर में

वो होते हैं देश के जरुरत

देश के पालनहार..!!!!



यहाँ तक की अपनी अस्मत लुटा चुकी एक अबला

करती है रुदन चीत्कार..!

माई लोर्ड ! करें मेरे साथ न्याय

सामने खड़े व्यक्ति ने किया है बलात्कार!!

दानव रूपी वकील की ठहरती हुई आवाज

जो भूल चूका भारतीय संस्कार!!!

ऐसे ऐसे प्रश्नों की करता है बौछार!!!!

लगता है भरी सभा में फिर से

कईयों ने किया उस अबला का फिर से बलात्कार...!!!!!



फिर भी जब भी दिखती है

ढकी आँखों वाली न्याय के देवी की मूर्ति!

हर न्याय पसंद इंसान की उम्मीद...

कभी तो ये पट्टी हटेगी!

कभी तो न्याय का तराजू का पलड़ा होगा बराबर

कभी तो अमीरी गरीबी के न्याय में

नहीं होगी पैसे की दीवार...

कभी तो सबको मिलेगा न्याय

नहीं होगा अन्याय....

कभी तो ऐसा होगा...

कभी तो.............!!