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Wednesday, February 19, 2014

कैनवेस


गूगल से 

था एकांत! मन में आया विचार
काश! मैं होता एक ऐसा चित्रकार
हाथ में होती तक़दीर की ब्रश
और सामने होती,
कैनवेस सी खुद की ज़िन्दगी
जी भर के भरता, वो सब रंग
जो होती चाहत, जो होते सपने
.
होते सारे चटक रंग
लाल, पीले, हरे, नारंगी
या सफ़ेद, आसमानी
जैसे शांत सौम्य रंग
ताकि मेरे तक़दीर की ब्रश
सजा पाती ज़िन्दगी को
जहाँ से झलकती ढेरों खुशियाँ
सिर्फ खुशियाँ !!
.
पर इन चटक और सौम्य रंगों के
मिश्रण से ही एक और रंग बना
जो था श्याम, थी कालिख
जो है रूप अंधकार का
जो देता है विरोधाभास!!
.
दी जिंदगी ने समझ
अगर नहीं होगा दुख और दर्द
तो नहीं भोग पाएंगे सुख
अहसास न हो पायेगा ख़ुशी का.... !!
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फिर दर्द से भरे चित्र अनमोल होते है, ये भी सुना मैंने :)