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Monday, April 26, 2010

कैनवेस






एकांत में बैठे बैठे सोचा
काश! मैं होता एक ऐसा चित्रकार
हाथ में होती तक़दीर की ब्रश
और सामने होती, एक ऐसी कैनवेस
जो होती खुद की ज़िन्दगी
जिसमे मैं रंग पाता अपनी चाहत
भर पाता वो रंग, जो होते मेरे सपने
.
जरुरत है कुछ चटक रंगों की
लाल, पीले, हरे, नारंगी
या सफ़ेद, आसमानी
जैसे शांत सौम्य रंग
ताकि मेरे तक़दीर की ब्रश
सजा पाए ज़िन्दगी को
जहाँ से झलके बहुत सारी खुशियाँ
सिर्फ खुशियाँ !!
.
तभी किसी ने दिलाया याद
इन चटक और सौम्य रंगों के मिश्रण में
एक और रंग की है जरूरत
जिसे कहते हैं "काला"
जो है रूप अंधकार का
जो देता है विरोधाभास!!
.
तब मुझे आया समझ
जब तक दुःख न होगा
दर्द न होगा
नहीं भोग पाएंगे सुख
अहसास न हो पायेगा ख़ुशी का
.
और इस तरह
मैंने अपने सोच को समझाया
अब हूँ मैं खुश, प्रफुल्लित
अपनी ज़िन्दगी से
अपने इस रंगीन कैनवेस से
जिसमे भरे है मैंने सारे रंग
दुःख के भी
दर्द के भी
साथ में सहेजे हैं,
ख़ुशी के कुछ बेहतरीन पल..............!!!