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Saturday, July 7, 2012

प्रेम-गीत





















ताजमहल की
एतिहासिक पृष्ठभूमि
यमुना नदी के जल की
कल कल ...
और
हम तुम !
खामोश जुबान
खामोश निगाहें..
पर
गुनगुनाता दिल !
जब हो हाथ में हाथ
साथ में हो वो !!!
ऐसी हो प्रीत !!
बेशक न हो साथ
तो भी काल्पनिक
क्षणिक
स्वपन !
उसके साथ का ...!
ला देती है
मनभावन
सुखद
खुबसूरत
मादक -
अहसास !!!
भर जाते हैं
गुदगुदाते
जज्बात...!!
करते हैं
नृत्य !!
खिलखिला उठता है
मनमयूर....!!
तुम्हारी अनुभूति
और तुम..
मेरे लिए अनमोल...