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Sunday, April 20, 2014

हसरतें



थी हसरतें
इस नादान दिल को
रख दूँ रेहन आपके पास !

काश! ये पागल दिल
कुछ पलों के लिए ही सही
धड़कता आपके ज़ेहन में

ये शख्स
कर देता जिंदगी आपके नाम
पल-पल.. छिन-छिन...
हो जाते आप पर क़ुर्बान

जिंदगी का हर क़तरा
प्यार.. दिल.. एहसास
होता आपका ही कर्ज़दार

सूद मे देनी होती मुझे
अपनी धड़कती साँसे
सिर्फ आपके ही नाम

होती चंद आहें भी साथ
मेरे ख़्याल.. मेरे जज़्बात..
मेरा वजूद.. मेरी नज़्म के साथ

हो जाते क़ैद
आपके दिल के
ताले लगे गिरवी घर में

उफ़्फ़!! मेरे आका..
मैं होता आपका गुलाम..
आपका गुलफ़ाम..

मेरी खामोश लबों
को दे दो न
अपनी मुस्कान

एक बार तो कहो
“आमीन” !!
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प्यार व्यापार सा :)