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Thursday, February 16, 2017

"विंड चाइम"


सुविधा-संपन्न सोसायटी फ्लैट्स में 
दरवाजे के ऊपर लटकी दिखती हैं 'विंड चाइम्स'
और दरवाज़े से झांकती दिखती है एक अकेली 'मैजिक आई' शक से घूरती
उनकी परछाईं तले, नीचे, पीछे गरीब बस्तियों की किवाड़ों पर होता है अक्सर एक स्वास्तिक, 'ॐ', 786, कभी कोई खंडा और दरके हुए किवाड़ों में होती हैं दरारें कभी दो तख्तों के बीच चिरी लम्बी सी झिर्री झिर्रियों से छनती हवा कभी नहीं निकालती 'ओम' का स्वर
'वन वे मिरर' है 'मैजिक आई' ज़िन्दगी को एकतरफा देख पाने का जरिया जबकि टूटी झिर्री या सुराख आँखों में आँखे डाले, जुड़ने का दोतरफा रास्ता 'मैजिक आई' समृद्धि की चुगली करता जिसकी आज्ञा सिर्फ अन्दर की ओर से आँख लगाये वो एक शख्स ही दे सकता है
उलट इसके, झिर्रियों से झांकते हुए देख सकता है दूर तक कोई भी, अन्दर का घुप्प अँधेरा अभाव यहीं कहीं रहता है रेंगता है 'जीवन' के नाम से जाना जाता है चूल से लटकती तो कभी बस टिकी हुई किवाड़ों पर पुते स्वास्तिक या 'ओम' का खुला सिरा नहीं समेट पा रहा 'खुशहाली' जबकि विंड चाइम की टनटनाहट पंखे के कृत्रिम हवा के साथ भी फैला रही समृद्धि

कल ही ख़रीदा है एक 'विंडचाइम'!

Wednesday, January 18, 2017

आइना झूठ नहीं बोलता



आईना
है वो चश्मदीद गवाह
कटघरे में खड़े अभियुक्त जैसे
अपने सामने दिख रहे चेहरे के लिए
जो बता पता है, या यूं कहें, बता सकता है 
अपराध से अभियुक्त का कोई वास्ता नहीं
आईना
बेशक हो 'एलीबी'
अपराध न करने की,
लेकिन कहते हैं न
झूठ के हज़ार मुंह
और एक चुप सच का
शख्सियत को
जानने समझने के लिये
उतरना पड़ता है
आँखों की गहरायी में
महसूसना पड़ता है
पनियल आँखों की तराई को
जिससे नज़रों का
परावर्तन/अपवर्तन
जोड़ पाये कुछ दरकते बंध
आईना !
मैंने खुरच दी है
तुम्हारे दूसरे तरफ की
सिल्वर सुरमई कलई
जिससे खुल न पाये कलई
तुम्हारी गवाही से
ताकि डाल सकूँ खुद की आँखों में आँखें
बेपरवाह बिंदास ..
आईना!
डरता हूँ तुमसे ...
तुम्हारी सच्चाई से
कह सकते हो कभी भी
हर व्यक्ति
होता है गुनाहगार
अरे रुको !!!
कमियों के भण्डार तुम भी कम नहीं
जानते हो ने
कितनी कमज़ोर है तुम्हारी याददाश्त
और उल्टा ही दिखाते हो
मेरा सीधा हो जाता है तुम्हारा उल्टा
आखिर सजा देना/पाना
इतना आसान भी तो नहीं

Tuesday, December 20, 2016

कहीं इमरोज न बन जाऊं



प्रेम से पल्लवित कोंपलें
होती हैं जवां,
दो नादाँ खुशमिजाज और चहकते दिलों में
हिलोरे मारती है चाहत
शायद हो कोई जूलियटलैला या रांझा
जो थामे उसके हाथों को
और प्यार भरी नजरों से ताकते हुए कह भर दे
वही घिसे पिटे तीन शब्द
आई लव यू !

बदलती उम्र का तक़ाज़ा
या देर से उछला प्रेम स्पंदन
या यूँ कह लो
प्रेम भरी साहित्यिक कविताओं का
नामालूम असर
कहीं अन्दर से आई एक आवाज
चिंहुका प्रेम उद्वेग
हो मेरे लिए भी कोई अमृता -
जो मेरे पीठ पर नाख़ून से
खुरच कर लिख सके
किसी साहिर का नाम!

कहीं इमरोज न बन जाऊं !


100कदम की प्रतिभागी 

Thursday, December 1, 2016

तड़ित


फटे हुए एम्प्लीफायर स्पीकर की तरह
गडगड़ाता बादलनमी से लबालब
ट्रांसफॉर्मर के कनेक्शन वाले मोटे तार से
ओवरलोडेड पॉवर सप्लाई के कारण
कड़ कड़ाती बिजलीजो दूर तलक़ दिख रही

किसी रोमांटिक मूवी की बेहद ख़ूबसूरत अभिनेत्री सी
भीगे पल्लू के साथ भागती बारिश
ठहरती/थमती कभी तेज चालों से झनमनाती
कभी लयबद्ध तो कभी बिना किसी लय के

सारा फैला एक टुकड़ा आकाश
राजकपूर की मंदाकिनी सा
गीला-गीला हो उठा,
है हर एक की नजर
आकाश के विस्तार पर जमी

बिखरे टूटे पत्ते व
भीगी सौंधी मिट्टी की महक
चुपके से कह उठी
हाँ वो अभी अभी तो आई थी

एक या दो बूँद
मेरी पलकों पर भी छमकी
आखिर उसकी ही वजह से
बेमौसम मेरे मन का मानसून
टपक पड़ा

स्मृतियों में दरकती मेरी तड़ित
कहींतुम मुझे जला मत देना ..........

पल भर में !!
27 नवम्बर के दैनिक जागरण में 100 कदम की समीक्षा



Friday, November 11, 2016

500 का नोट और प्रेम


सुनो
पिछले बारयाद है न
कैफे कॉफी डे के काउंटर पर
मैंने निकला था 500 का कड़क नोट
लेना था केपेचिनों का दो लार्ज कप

वो बात थी दीगर
किपे किया था तुमने
जिससे
थोड़ी असमंजस व संकोच की स्थिति के साथ
फिर से डाल लिया थापर्स के कोने में
अकेला नोट पांच सौ का !

उस पल लगा था अच्छा,
चलो बच गए पैसे !!
प्यार और प्यार पर खर्च
क्यों होते हैं बातें दीगर

आखिर खाली पॉकेट के साथ भी तो
चाहिए थी
प्यार व साथ

सुनो
पर वहीँ 500 का नोट
सहेजा हुआ है पर्स में
तुम्हारे दिए गुलाब के कुछ पंखुड़ियों के साथ
क्योंकि तुमने काउंटर से जब उठाया था
कि पे मैं करुँगी
तो तुम्हारे हाथों के स्पर्श से सुवासित
वो ख़ास नोट
हो गयी थी अहम्

सुनो
शायद तुम्हारी अहमियत पर भी लग चुका है पहरा
तभी तो
अब तक सहेजा हुआ था वो ख़ास नोट
कल ही बदल कर ले आया
सौ सौ के पांच कड़क नोट

सुनो
चलें चाय के ढाबे पर
दो कटिंग चाय आर्डर करूँगा
उसी सौ के नोट के साथ

कल मिलोगी न!!
____________________

:) :) :)


Friday, October 28, 2016

पटाखे


बीडी पटाखे के लड़ियों की
कुछ क्षण की चिंगारी जैसा
तुम्हारा प्यार
फिस्स्स्सस !!

इस्स्स्सस
की हल्की छिटकती ध्वनि
जैसे कहा गया हो - लव यू
जिसकी प्रतिध्वनि के रूप में
छिटक कर बनायी गयी दूरी
जैसे होने वाली हो आवाज व
फैलने वाली हो आग
और उसके बाद का डर
- 'लोग क्या कहेंगे'

शुरूआती आवाज न के बराबर
पर फिर भीफलस्वरूप
हाथ जल जाने तक का डर
उम्मीदआरोप से सराबोर

पटाखे के अन्दर का बारूद 'मैं'
उसके ऊपर लिपटे सारे लाल कागज़
तुमसे हुए प्रेम के नाम के
और फिर मेरी बाहों जैसी
प्रेम सिक्त धागों की मदमस्त गांठे
धागे के हर घुमाव में थी लगी ताकत
ताकि छुट न पायें साथ
ताकि सहेजा रहे प्रेम
पटाखे के पलीते जैसे तुम्हारे नखरे
चंचल चितवन !!

पटाखे के ऊपर लिखे
स्टेट्युरी वार्निग सी
सावधानी बनाये रखें
प्रेम भी जान मारता है !!
-----------------
ये पटाखा चायनीज नही है .^_^

100 कदम की प्रतिभागी 

Thursday, October 13, 2016

उम्मीदों का संसार



"लो मीडियम इनकम ग्रुप" के लोग
मतलब इतनी सी आमदनी
किबस पेट ही भर सके
पर हैचाहत यह भी कि
रख सके एकाध निवाले शेष

हो घर की दीवारों पर
मटमैली सी रौशनी
लेकिन दरवाजे पर झीने परदे के टंगने के लिए
कर रहे इन्तजार
अगले दीपावली पर बोनस का

बहुत सोच-समझ कर
जलाये हैप्पी बर्थडे का कैंडल
परकेक व दो पारले जी के बिस्किट के साथ
रहे उम्मीद
आने वाले गिफ्ट का

ऑफिस में हर दिन
बेशक खाएं डांट
औरपा जाएँ कामचोरी का तमगा
पर,
रौब दिखाएँ अपनी सरमायेदारी का

फेयर एंड लवली का छोटा पैकेट
पोंड्स पाउडर का इकोनोमी डब्बा
व गुच्ची के नकली बैग के सहारे
कोशिश हो मिले
पत्नी की सूखती मुस्कराहट का
और हो चाहतपार्टी में
इतरायें पत्नी को 'मैडमबना पाने के गुमान पर

गृह प्रवेश की
कुंठित इच्छाओं की पूर्ति के लिए
किराए के मकान में
लगा ले नेम प्लेट
"श्री" के संबोधन के साथ

बेशक बैंक की पासबुक में
हो निल बटा सन्नाटा
पर अपडेट करवाएं पन्ना
हर महीने

मने
हम
लो मीडियम इनकम ग्रुप के लोग
रचते हैं उम्मीदों का संसार
हर दिन देखते हैं सपनों का बाजार
छलछलाती नज़रों के साथ ......!
100कदम: एक प्रतिभागी रचनाकार के साथ