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Monday, May 11, 2015

दो क्षणिका


खाली कनस्तर सी हो गयी
तुम्हारी स्मृतियाँ, झूठी - सच्ची
रखूं किसी अलमारी में, या
या, कबाड़ी वाले को ही न बेच दूं ??
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ऐसे ही एक ख्याल :)

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मेरी हथेली में
है कटी-फटी रेखाएँ
जीवन, भाग्य और प्रेम की
पर है सिर्फ एक
खुशियों का आभासी द्वीप
अंगूठे के नीचे
ठीक बाएं कोने पर !!
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उम्मीदें जवां हैं :)


Saturday, May 2, 2015

प्यारी ठिठोली


ओन ऑफ करते
पिट पिट की आवाज के साथ स्विच

रिमोट से भर भर करते हुए
स्वैप करते टीवी चैनल्स

नल के पानी के नीचे
काटते या रोकते जलधारा

दूर बैठ कर रिमोट से ही
कार के दरवाजे की बीप बीप सुनते

गुलाब के फूल की पंखुरियां
एक उसके नाम एक मेरे

छोटे छोटे कंकडो से
टिप टिप निशाना बांधते खनक के साथ

मोबाईल के अक्षर
बिना सोच के डाल देते स्टेटस पर

शायद बचपना है
या उँगलियाँ भी जता रही
प्यार भरी बेचैनियाँ !!

आखिर हाथ की नसें सुनती है
प्यारे दिल की बात !!
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ऐवें ठिठोली :-)