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Tuesday, July 8, 2014

मैं कवि नहीं हूँ

 
 
नजरों के सामने
फड़फड़ाते पन्नों में
झिलमिलाते शब्दों के समूह
जिनमें कभी होता प्यार
तो कभी सुलगता आक्रोश
कभी बनता बिगड़ता वाक्य विन्यास
कह उठता अनायास
“मैं कवि नहीं हूँ”

सफ़ेद फूल में, चमकते तारे में
धुंधले दर्द में, सुनहले मुस्कुराहट में
गुजरे यादों मे, अखरते वर्तमान में
ढूँढता हूँ कवितायें
पर, पता है खुद को
“मैं कवि नहीं हूँ”

छंदों में, गीतों में,
गजल में, शेर में,
यहाँ तक की हाइकु-हाइगा में भी
देखता हूँ खुद का अक्स
पर हर बार सुगबुगाते एहसास
“मैं कवि नहीं हूँ”

मेरे अंदर की कोशिकाएं
उनके समूह उत्तक
या फिर हर एक अंग व अंगतंत्र
मेरा जिस्म भी, खिलखिला कर कह उठा
“मैं कवि नहीं हूँ”

अंततः !!
धड़कते साँसो व
लरजते अहसासों के साथ
करता हूँ मैं घोषणा
“मैं कवि नहीं हूँ”

कहा न – मैं कवि नहीं हूँ” !! 
 
 

15 comments:

निवेदिता श्रीवास्तव said...

इतना अच्छा लिख गये और ये दावा .....

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन आज की बुलेटिन, रेल बजट की कुछ खास बातें - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

सुशील कुमार जोशी said...

वाह !
वाकई आप नहीं हैं :)

डॉ. मोनिका शर्मा said...

हम तो मानेगें ... भावाभिव्यक्ति बहुत उम्दा है

parmeshwari choudhary said...

Good poem.Very well presented.loved reading it twice:)

सदा said...

छंदों में, गीतों में,
गजल में, शेर में,
यहाँ तक की हाइकु-हाइगा में भी
देखता हूँ खुद का अक्स
पर हर बार सुगबुगाते एहसास
कवि हैं तभी तो छंदों में गीतों में ..... अक्‍स नज़र आता है :)
बहुत अच्‍छा लिखा है

कालीपद प्रसाद said...

मन के भावनावों की सुन्दर अभिव्यक्ति |
नई रचना मेरा जन्म !

Digamber Naswa said...

ये खुस का दावा है या मन का आक्रोश ...
लाजवाब रचना ...

Anusha said...

आप एक बेहतरीन कवि हैं
बहुत सुन्दर लिखा है आपने

Anju said...

आपने जिस तरह से रचना रखी बहुत ही उम्दा व जोशपूर्ण वाकई एक बेहतरीन कवि हो....:)

Aparna S Bhagat said...

ditto Anju ji.. sahaj.. saarthak.. simple.. shabdon ke mayajaal se pare.. darshan ke gherav se door.. sachchi seedhi baat kehne wale..

Aparna Sah said...

bahut achhi kavita..behad bhavpurn...

parul chandra said...

बहुत सुन्दर..

Anju (Anu) Chaudhary said...

हम सब लिखने वालों में से ''कवि'' कौन


बेहद खूबसूरत शब्दों से मन की अभिव्यक्ति

महेश कुशवंश said...

मन से अभिव्यक्तियों से कवि होता कोई भी ॥ वास्तव मे सभी कवि होते है