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Friday, June 26, 2015

क्षणिकाएं




1. 
मेरी राख पर 
जब पनपेगा गुलाब
तब 'सिर्फ तुम' समझ लेना
प्रेम के फूल !!
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इन्तजार करूँगा सिंचित होने का :)


2. 
मेरी इच्छाएं रहती है हदों में, 
पर नींद में कर जाता हूँ 
सीमाओं का अतिक्रमण !!
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हदों के पार :)


3.
कल रात ख़्वाबों के बुने स्वेटर
पर भोरे भोरे एक फंदा उतरा
सारे सपने ही उधड़ते चले गये 
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चलो गर्मी आ गयी इस रात सपनों का पंखा चलेगा
 !!



Tuesday, June 16, 2015

ऐसा ही प्यार


हूँ मुग्ध तुझ पर
जैसे दूर से आती
'कस्तूरी' की सुगंध
जो कभी भी नही आती पास
है तमन्ना तेरी ही
ऊपर नीचे होती साँसों में खोंने की
उस 'गुलमोहर' के पेड़ तले
ताकि लाल पंखुड़ियाँ गिरे टप से
तेरे चेहरे पर, मेरी नजरों के सामने
है लालसा तेरे हरपल
सान्निध्य की स्पर्श की
चाहत तेरे रक्तिम होंठो की
हाँ, बेशक खो जाऊं 'पगडंडियों' में
बस ऊँगली उलझी हो तेरे साथ
पुकारूं तुझे
और, बस 'गूँज' उठे फलक
'हमिंग बर्ड' के जूँ करती
धीमी सी आव़ाज
और तेरी छमक से
हो ऐसा ही बस आगाज
तुम चलों
'तुहिन' से नम भींगे घास पर
वो भी नंगे पाँव
ताकि मैं निहारूं उन धब्बों को
जो बनाते बढ़ जाओ तुम
हाँ मर ही जाऊं
तो हो जाऊं तृप्त
तेरी बाँहों में
तेरे ख्यालों में
तेरी बातों में......
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हमिंग बर्ड, कस्तूरी, पगडंडियाँ, गुलमोहर, गूँज और तुहिन मुझ से जुडी किताबें जो मेरे अन्दर कहीं आत्मसात हैं, तुम्हारे तरह ही !!



Tuesday, June 9, 2015

मोर



मैं
मेघ की आहट में
मचलता मोर
मेरे रंगीले सपने
जैसे मोर के सुनहले पंख!
मेरी उम्मीद
जैसे छोटा सा उसका
तिकोना चमकता मुकुट!
मेरी वास्तविकता
नाचते मोर के भद्दे पैर!
नजर पड़ी जैसे ही
उन कुरूप पैरों पर
रुक गया नाचना थिरकना
मैं ! एक मोर !
उम्मीद सपने और वास्तविकता के साथ !!
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मैं मोर नहीं उसका भद्दा पैर !!