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Monday, March 23, 2015

ब्लॉग यात्रा



ऑरकुट के समय, लोगो को देखादेखी 2008 में ही ब्लॉग बना लिया था,  हिंदी का 'ह' भी नही आता था उन दिनों, पर ब्लॉग के नाम "जिंदगी की राहें" के अनुरूप पगडण्डी जैसी राह ही बनती चली गयी!

चूँकि ब्लॉग बना तो पोस्ट भी जरुरी है! और फिर जिस भी ब्लॉग पर उन दिनों नजर पड़ी वो कवितायें ही लिखते थे ! इस वजह  मन में ये धारणा बन गयी की ब्लॉग पर सिर्फ कवितायें ही पोस्ट किये जाते हैं ! हम भी तुकबन्दियाँ जोड़ने लगे ! कुछ मेरे मेंटर या हमदर्द उसपर वाह या बहुत खूब लिखते, सीना चौड़ा हो जाता !

एक बार किसी चर्चा या ब्लॉग बुलेटिन पर मेरी पोस्ट आयी,  हमें तो ऐसे फील हुआ जैसे हंस या पाखी के संपादक मेरे घर से मेरी रचना ससम्मान ले गये हों !!

गिव एन टेक का ज़माना उस समय भी था, कुछ पोस्ट पर सचिन के तरह कमेन्ट का सैकड़ा लग गया !! फिलिंग अशोक वाजपेई जैसी जन्म ले ली !! वो अलग बात है करीब डेढ़ लाख की ट्रेफिक मेरे ब्लॉग पर अब तक है 382 फोलोअर हैं !

हाँ भूल गये, रश्मि दी ने एक कविता 2010 में संकलन में प्रकाशित करवा दी ! :-D साहित्य के पुरौधा ही बन बैठे !!

हाँ सच कहता हूँ, जोड़ तोड़ नही किये, पर हिंदी ब्लोगर का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान रविन्द्र प्रभात जी के वजह से 2011 व 2012 में वर्ष के सर्वश्रेष्ठ युवा कवि के रूप में मिला :-) :-D !! हँसते मुस्कुराते रोते सफ़र चलता रहा !

अंजू चौधरी से मित्रता हुई एक अलग रास्ता मिला व देखा ! जिसकी खुद की रचनाओं में ढेरों व्याकरण की गलतियां होती है उसने सह संपादन में कस्तूरी पगडंडीयां व गुलमोहर जैसी तीन साझा संग्रह लाने की गुस्ताखी की ! इनमे करीबन सौ नये पुराने रचनाकार जुड़ चुके! प्रत्येक संग्रह की 500 से ज्यादा प्रतियाँ लोगो के हाथों तक पहुंची!

साला! वो दिन भी आ गया, जो गहरी नींद में देखा करते थे ! 'हमिंग बर्ड' की फुदकन सोलो संग्रह के रूप में सितम्बर में प्रकाशित हुआ! अगर भिखारी को एक हजार का नोट पकड़ा दे तो वो एक एक पैसे का वेल्यु समझेगा ! वैसा ही हुआ जो सोचा नही था वो मिला! हमने भी दोस्ती जिंदाबाद के नारे के साथ ऐसी कोशिश की कि 600 प्रति का पहला संस्करण ख़त्म हो कर पुनर्मुद्रित संस्करण आ चुकी है !! जियो दोस्तों :-)

अब करीब 60 नये पुराने प्रतिष्ठित रचनाकारों के साथ 'गूँज' व 'तुहिन' के नाम से दो सम्मिलित कविता संग्रह इन्फिबिम पर सिर्फ 105 रूपये में प्री बुकिंग पर है जिसका विमोचन 4 अप्रैल को संध्या 5 बजे हिंदी भवन में होना निश्चित हुआ है !! आइयेगा न !!
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"जिंदगी के राहें" के साथ समय समय पर मिलें दोस्तों , तुम्हारा शुक्रिया !

आगे भी साथ चलना प्लीज :-)
जिंदगी की राहें