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Friday, August 2, 2013

मौसम सा बदलता रिश्ता


मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !

ठंडी संवेदनाएं
और जम कर बनता बरफ
जैसा हो जाता है रिश्ता
अंधेरी सर्द भरी रात
बिलकुल घुप्प एवं ठंडी
दूरी मे रहती है गर्माहट
तो नज़दीकियाँ से हो जाती है सर्द
ये रिश्ता भी है अजीब
मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !

कभी कभी रिश्तों के बीच
चलती है लू जैसी गरम हवा
ढाती है कहर
झुलसा देती है अंदर तक
क्षण भर के कडवे गरम बोल
बना देते हैं पराये
तो ग्रीष्म ऋतु की दोपहरी के तरह
मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !

ये संबंधो का अलबेला रिश्ता
सुख-दुख के दामन के बीच
खेलता है, अठखेलियाँ करता है
फिर कभी कभी यही रिश्ता
सावन के मूसलाधार बारिश की तरह
आँखों से झर-झराने लगता है
ला देती है अंदर तक नमी  
फिर यही बरसता सावन  
लाता है गर्मजोशी
रिस जाता है दर्द …..
तो सही है कहा 

मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !