
मम्मा!
मुझे भी,
भैया की तरह,
इस चमकती दमकती दुनिया मैं आने तो दो......
मम्मा!
तुम स्वं बेटी हो
हम जैसी हो
तो क्यों न
बेटी की माँ बन कर देखो.....
मम्मा!!
माना की तुम्हे मामा के तरह
मिला नहीं प्यार
माना की जिंदगी के हर मोर पे
बेटी होने का सहा दर्द बारम्बार.........
मम्मा!!
पर कैसे एक जीवन दायिनी
बन सकती है जीवन हरिणी
कैसे तुम नहीं अपना सकती
अपनी भगिनी..........
मम्मा!
तुम दुर्गा हो, लक्ष्मी हो
हो तुम सरस्वती को रूप
तो फिर इस अबला के भ्रूण को
लेने तो न जीवन को स्वरुप .......
मम्मा!
तेरी कोख से
तेरी बेटी कर रही पुकार
जरुर अपनाना
पालन पोषण करना
फिर तेरी ये नेह
फैलाएगी दुनिया मैं प्यार.......
प्यार.....