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Saturday, September 4, 2010

राखी की चमक

 (दीदी, जीजाजी, उनकी तीन बेटियां और मेरे दो बेटे) 

वैसे तो आज मेरा जन्मदिन है..........:),
लेकिन मैं आज किसी और वजह से यहाँ ब्लॉग पे हूँ. पिछले दिनों 29.08.2010 को आधी रात में  मेरी प्यारी बड़ी दीदी ने मेरे सामने अस्पताल में दम तोड़ दिया..वो बहन जो मेरे से सिर्फ ३ वर्ष बड़ी थी.......वो जो मेरे लिए एक अच्छी दोस्त जैसी थी, जिसके साथ पूरा बचपन बिताया, खेले, पढ़े, मार-पीट की. वो उस दिन बिना बताये चली  गयी , और मैं कुछ नहीं कर पाया...जिंदगी में क्या क्या दिन देखने को मिलते हैं, ये उस दिन समझ में आया....जिस दीदी के लिए मैं समझता था, वो भाग्यशाली  है, हम जैसे माध्यम वर्गीय परिवार में जन्म लेने के बाबजूद उसके पति आज रांची उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसे पद पे हैं.........लेकिन ऊपर वाले को कुछ और मंजूर था.............अपने तीन कम उम्र की बेटियों को छोड़ कर पता नहीं कहा किस दुनिया में चली गयी........अब क्या कहूँ, भगवन उसकी आत्मा को शांति देना..........!!

कुछ पंक्तियाँ उसके लिए.............

आधी रात का वो पहर जो थी बहुत काली
अस्पताल का एक कमरा
जिसके बेड पर थी
मेरी वो दीदी
जिसने दो दिन पहले ही
उसी बेड पर बैठे हुए 
मेरी कलाई पे बंधी थी राखी
वो राखी जो दो दिन बाद तक 
चमकते हुए कह रही  थी
ऐ! दीदी के भैया 
कर कोशिश, बचा के रख 
उसकी जीवन नैया!!
तू है खैवैया!!!
पर वो मनहूस रात!!
जब मैं बैठा था सिराहने
सामने बेड के ऊपर लगा स्क्रीन
और उसकी आवाज
बता रही थी दीदी की वजूद
एक विश्वास - कुछ नहीं होगा!!

मैंने ली एक झपकी 
तो लगा दीदी ने दी थपकी
खोली आँख तो सामने दिखी
अश्रुपूरित नयन, जिसमे था दर्द
उफ़! आँखों में भी दिख 
सकता है दर्द
ये बस हो रहा था अनुभव
मैं हो रहा था सर्द!!
मैंने प्यार से किया स्पर्श 
"दीदी"! मैं हूँ न!!
"पागल हो क्या??"
बस एक की थी कोशिश
की दे सकूँ ढाढस !!!

पर होना था वही 
जो दिल चाहता था नहीं
एकाएक स्क्रीन के सारे
मीटर हो गए ग़ुम
मैंने खुली आँखों से 
उस मंजर को देखा
क्या कहूँ दिल चिहुंका..
चिल्लाया ...........दीदी..............!!!!!
लेकिन वो हो चुकी थी स्थिर
निस्तेज, शांत
जा चुकी थी चिर निद्रा में 

ऐसे लगा जैसे 
सब हैं खामोश
सारा अस्पताल खामोश
मैं भी एकदम से 
स्तंभित!! स्तब्ध!!
ऐ दीदी................!!!
पर मेरे कलाई की राखी
की चमक कह रही थी.........
पगले!! मैं हूँ तेरे साथ
कहाँ भागेगा मेरे से
विश्वास न हुआ,, पर उस माहौल में भी
मेरा चेहरा धीरे से मुस्कुराया था..........
पता नहीं क्या सच था.......
क्या जीवन है...........
क्या जीवन था..........

(मेरे दीदी के साथ अंतिम राखी.)

44 comments:

putul said...

दर्द स्पष्ट है ....पर मेरे शब्द खामोश हैं....मुकेश.......

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

नि:शब्द कर देने वाली अभिव्यक्ति ...

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और आपको यह दुःख सहने की क्षमता ...

शुभकामनायें .

putul said...

कलम में जान होती तो आँसू दिखते...इन पन्नो पर...इन शब्दों के बीच ...तुम्हारा दर्द बहुत खूब उतर आया है....आँसू भी दिखे हैं ,बेबसी भी झलकी है , ...यही जीवन है ....मान लेना होगा ..

रश्मि प्रभा... said...

इसे अंतिम मत कहो, यह हमेशा साथ रहेगा ..... ज़िन्दगी के इस पल में मेरे पास कोई शब्द नहीं होते, बस मैं साथ होती हूँ,
मैंने तुम्हारे सर पे हाथ रख दिया है मुकू भईया .......

geeta said...

mukeshji
etne dard bhari kavita jisko padkar kuch bhi kahne ke shamta mere mai tu nahi hai or kuch bhi kahuge tu mere shabd kam hi lagege so bas etna hi ki bhgwan unke aatma koshanti deor unke beteyo ko jindgi mai har vo khushi de jo unke ma unko na de saki

geeta said...

aapko aapke janam din ke shubh din par mere taraf se bas yahi dua hai

Aapko ashirwad mile bado se,
sahayog mile chhoto se,
Khushiya mile jag se,
pyar mile sab se,
daulat mile rab se,
yahi dua hai
DIL SE!

सतीश सक्सेना said...

बेहद अफसोसजनक .........

शारदा अरोरा said...

कलम ही तो इस दर्द को इस अहसास को उजागर कर सकती है , फिर हम पाते हैं कि कितनों का दर्द एक सा है ।

Udan Tashtari said...

दुखद...


दीदी की आत्मा को ईश्वर शान्ति दे, यही कामना है.

Shekhar Suman said...

dukhad....
bhagwaan unki aatma ko shanti de....

आशा ढौंडियाल said...

mukesh jiaapko jis dard se aaj rubaru hona pad raha hai wo dard hum apne shabdon se baant nahin sakte...keval mahsus kar sakte hai....kisi apne priy ko khone ki tees kitani peeda dayak hoti hai jaan sakti hun..
ishwar didi ki aatma ko shanti aur aapko is dukh ko sahne ka samble pradan kare.....yahi kamna karti hun..

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

मुकेस बाबू,
मन भर गया आपका पोस्ट पढकर... पहिले सोचे कि कुछ नहीं लिख पाएँगे हम..लेकिन फिर लगा ईश्वर भी केतना क्रूर मज़ाक करता है… मन कचोटता है, छोटी छोटी बच्ची सब को देखकर.. दीदी जैसी महान आत्मा को हमरा स्रद्धा सुमन… उनके आत्मा को सांति मिले!!
सलिल

ρяєєтι said...

kya kahu ?
kya likhu ?

bas yahi Prabhu Prathna - sadgat ki aatma ko shaanti mile...!

Mukesh Kumar Sinha said...

Comment got on Buzz:
Anand Dwivedi - mukesh..kya kahoon aisee halat me tumse kabhi kbhi shabd baune ho te jaate hain.....rakhi ka bandhan fir jeewan se mukti...aur fir tumhara janmadin....jeewan ki aboojhta ki or ishara karta sara ghatna kram khair..bhagwaan di ki aatma ko shanti de aur...unke pariwar sply teeno bhanjiyon ko ye aghat sahne ki taakat de !Sep 4

दिगम्बर नासवा said...

मार्मिक ... दर्द और उसकी वजह भी है .... भगवान आपको और परिवार को दर्द सहने की हिम्मत दे ...

indu puri said...

अँगुलियों पर गिनती लगाई.उन्नतीस अगस्त????? यानि........
काश इस समय मैं तुम्हारे पास होती.
समय सब और हर ज़ख्म को भर देता है.ये भी भर जाएगा.ऐसा ना होता तो हर व्यक्ति कई कई नासूर लिए मौत माग रहा होता या जीवन से भाग जाता.
तुम अकेले तो नही बाबु !जिसने तुम्हारे अपने को खोया है?
बच्चियों का ??? दादा दादी हैं??
अभी कुछ समय सब रहेंगे घर पर,पर......उसके बाद? बड़ी होती बच्चियां है,उनको कैसे मदद करना है? वो सोचना अब मैंन ऐम होना चाहिए.सबसे ज्यादा कोई खोता है तो या तो एकदम छोटे छोटे बच्चे या कम उम्र बेटियां..माँ के बिना उनका जीवन,बचपन बहुत कुछ खो देता है जिसकी क्षतिपूर्ति हो ही नही सकती.उनकी तरफ देखो,तुम्हारा दर्द छोटा लगने लगेगा.
समय समय उन्हें सम्भालना,उनके लिए कुछ करना वही दीदी के प्रति तुम्हारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और मामा होने का फर्ज तो अब तुम्हे पूरा करना है,सही रोल तो अब निभाना है बाबु! ईश्वर तुम्हे शक्ति देगा. आँसू पोंछो अपने दुःख से बाहर आ कर बच्चियों को बहादुर बनाओ,हिम्मत दिलाओ. एक भी आँसू उनके सामने नही ना तुम्हारे ना किसी ओर की आँखों में.
मासूम बच्चियों को 'बेचारगी' का अहसास दिलाने वालों को भी रोको.ईश्वर हर कदम पर तुम अभी का साथ दे.

दीपक 'मशाल' said...

सोचा था आपको जन्मदिन की बधाई दूँ मुकेश जी.. लेकिन ये सब जानकर मन कितना दुःख से भर गया कह नहीं सकता.. ईश्वर आपको ये सब सहने की शक्ति दें और उन पुण्यात्मा को शान्ति..

Babli said...

बहुत ही दुखद और मार्मिक! भगवान से प्रार्थना करती हूँ कि आपको एवं आपके परिवार को इस दुःख को सहने की हिम्मत दें! दीदी की आत्मा को शांति मिले!

Tripat "Prerna" said...

wah! behad sunder abhivyakti :)

http://liberalflorence.blogspot.com/

Mukesh Kumar Sinha said...

On facebook!!

Anirudh Mishra: Kaash aapka blog nahin padhta mukesh babu...Koi shabdh...Koi abhivyakti...Kuch nahin hai mere pass...hai toh sirf aapki tarah ek dukhad anubhav...meri shradhanjaliyaan didi ko...ishwar hi ek matra satya hai..

Mukesh Kumar Sinha said...

On facebook!!

Amitabh Ranjan: Dear Mukesh, This is really very shocking. May her soul rest in peace and god give you and family members courage to overcome from the tragedy soon

रजनी नैय्यर मल्होत्रा said...

देर से ही सही par दिल se दुआ है, आपको आपके जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं मुकेश जी . मै २ सितम्बर से बाहर थी और वापस आने par मेरा pc खराब हो गया. कैसे हैं आप ?

दीदी के देहांत ka हमें भी काफी अफ़सोस है भगवान् उनके आत्मा को शांति दे. अपनों के चल जाने ka दुःख क्या होता है समझ सकती हूँ आपकी भी पीड़ा par हिम्मत से बांधे रखिये खुद को .पिछली साल मेरे पति ने भी अपनी एकलौती बहन को राखी के २ दिन बाद के खो दिया वो भी चली गयी इस संसार से.जानती हूँ अपनों के चल जाने ka दुःख क्या होता है.

Mumukshh Ki Rachanain said...

नि:शब्द कर देने वाली अभिव्यक्ति ...

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और आपको यह दुःख सहने की क्षमता ...


चन्द्र मोहन गुप्त

निर्मला कपिला said...

मार्मिक अभिव्यक्ति है। मगर भगवान के आगे किस का वश चलता है। आपको जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई। वट वृक्ष से आपके ब्लाग का लिन्क मिला। शुभकामनायें

रेखा श्रीवास्तव said...

कहने को कुछ शेष नहीं है, बस यही की ईश्वर दीदी की आत्म को शांति दे और सभी परिजनों को धैर्य.
बस इस जगह हम उसकी हाथ की कठपुतली होते हैं, जिसको नचाया नाच लिए और जब चाहा उठा लिया तो भूमिका ख़त्म.
उसके आगे किसी की नहीं चलती, हिम्मत से काम लो और उन्हें हिम्मत दो जिन्हें तुम्हारे सहारे की जरूरत है अभी.

रेखा श्रीवास्तव said...

कहने को कुछ शेष नहीं है, बस यही की ईश्वर दीदी की आत्म को शांति दे और सभी परिजनों को धैर्य.
बस इस जगह हम उसकी हाथ की कठपुतली होते हैं, जिसको नचाया नाच लिए और जब चाहा उठा लिया तो भूमिका ख़त्म.
उसके आगे किसी की नहीं चलती, हिम्मत से काम लो और उन्हें हिम्मत दो जिन्हें तुम्हारे सहारे की जरूरत है अभी.

रेखा श्रीवास्तव said...

कहने को कुछ शेष नहीं है, बस यही की ईश्वर दीदी की आत्म को शांति दे और सभी परिजनों को धैर्य.
बस इस जगह हम उसकी हाथ की कठपुतली होते हैं, जिसको नचाया नाच लिए और जब चाहा उठा लिया तो भूमिका ख़त्म.
उसके आगे किसी की नहीं चलती, हिम्मत से काम लो और उन्हें हिम्मत दो जिन्हें तुम्हारे सहारे की जरूरत है अभी.

रेखा श्रीवास्तव said...

कहने को कुछ शेष नहीं है, बस यही की ईश्वर दीदी की आत्म को शांति दे और सभी परिजनों को धैर्य.
बस इस जगह हम उसकी हाथ की कठपुतली होते हैं, जिसको नचाया नाच लिए और जब चाहा उठा लिया तो भूमिका ख़त्म.
उसके आगे किसी की नहीं चलती, हिम्मत से काम लो और उन्हें हिम्मत दो जिन्हें तुम्हारे सहारे की जरूरत है अभी.

Mukesh Kumar Sinha said...

On Facebook:
Roli Bindal apke blog pe ye behad hairan aur dukhi karne wali rachna padh ke mai nishabd hoon bhai.....ishwer didi ki atma ko shanti den aur apko ye dukh sahne ki himmat den......

संजय भास्कर said...

भगवान से प्रार्थना है कि आपको एवं आपके परिवार को इस दुःख को सहने की हिम्मत दें! दीदी की आत्मा को शांति मिले!

शोभना चौरे said...

दीदी की आत्म को शांति दे एवं बच्चियों को यह दुःख सहने की शक्ति दे ईश्वी से यही प्रार्थना है |

mridula pradhan said...

apka dard ekdam samne aa gaya.
sahne ke alawa koi upaye nahin hai .

राजेश उत्‍साही said...

आप इस अजाब से गुजर रहे हैं,क्षमा करें,खबर ही नहीं हुई। बहुत दुख हुआ पढ़कर। हालांकि यह पूछने का कोई मतलब नहीं है,फिर भी एक जिज्ञासा है क्‍या हुआ था उन्‍हें? क्‍योंकि राखी यानी चार दिन पहले की तस्‍वीर देखकर ऐसा नहीं लगता कि वे किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थीं।
उनकी आत्‍मा को शांति मिले यही प्रार्थना है।
4 सितम्‍बर को आपका जन्‍मदिन था,सो शुभकामनाएं। और इन शुभकामनाओं की तो आपको और जरूरत है।

Apanatva said...

kitne asahaay ho jate hai hum...........
kuch bhee to hamare hath nahee..........
aapkee vedana samajh saktee hoo..........ab to yado ka khazana hee aatmbal badaega............ise ghadee hum sub aapke sath hai...........

mai abhee bhee bahar hee hoo .regularly blog padna nahee ho paraha hai....isee se vilamb huaa .

anju choudhary..(anu) said...

नि:शब्द कर देने वाली अभिव्यक्ति ...इस से आगे तो और कुछ नहीं कहा जा सकता
दुःख महसूस किया जा सकता है आपका पर उसे बांटा नहीं जा सकता

ZEAL said...

.
अत्यंत दुखद...
इश्वर दीदी की आत्मा को शान्ति दे, और आपको हिम्मत दे। बड़ी बहेन का प्यार , आशीर्वाद, साथ बिताये सुन्दर लम्हे तो हमेशा जीवित रहेंगे। आपके दुःख में हम सभी आपके साथ हैं।
.

arvind said...

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और आपको यह दुःख सहने की क्षमता ...

बेचैन आत्मा said...

मार्मिक पोस्ट।
बाबा विश्वनाथ से कामना है कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे व आपको इस दारूण दुःख को सहने की शक्ति।

हरकीरत ' हीर' said...

ओह......
हम जानते हैं मृत्यु निश्चित है ......पर अपनों के जाने का दुःख ....वो बचपन की बातें ......और आगे का बचपन .....
बहुत सी जिम्मेदारियां अब आप पर .....
रब्ब उनकी आत्मा को शांति दे ......
जन्मदिन की बधाई .....

वीना said...

वह अंतिम राखी नहीं बल्कि वो राखी है जो जीवन भर आपकी यादों में जीवंत रहेगी...
आपके ब्लॉग पर पहली बार हूं और इतनी दर्द भरी रचना पढ़ने को मिली...दर्द के पीछे एक भाई का प्यार है...यहीं पर इंसान हार जाता है...
http://veenakesur.blogspot.com/

Mukesh Kumar Sinha said...

aap sabke concerns ko dekh kar, man abhibhut ho gaya..........dhanwayad!!

Neelam said...

[:((((((((((]

anilanjana said...

दीदी को श्रध्हंजली देते हुए यही कहूँगी मुकेश.....उन्हें अपनी यादों में हमेशा जीवित रखना..और जो भी बन सके उनके प्रिय जानो के लिए उपयोगी रहना ..तुम्हारी उनके प्रति ये ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी..
भावपूर्ण रचना...एक भाई..अपनी दीदी के कितना करीब होता है बतानेमें सर्वथा समर्थ है..

स्वाति said...

नि:शब्द...
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे...