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Thursday, March 7, 2013

ऐ हसीना !!


आज महिला दिवस पर कुछ पंक्तियाँ अपने जिंदगी से जुड़ी सबसे खूबसूरत महिला को समर्पित करता हूँ, आखिर जिंदगी तो उसी से है .... कुछ साधारण से शब्द उसके लिए

ऐ हसीना !!
क्या तू बन पाएगी मेरी रचना
शब्द मे सज पाएगी कभी
क्या कभी चंचल शोख अदा
ढल पाएंगे, बन पाएंगे नज्म
बालों का झटकना
कैसे दिखाऊँ अपने हरफ़ों मे
गोरा सुर्ख चेहरा, छरहरा बदन
नारी की नजाकत
कैसे लाऊं शब्दो मे ??
.
चलो कोई नहीं
तुम्हारे से ही
हो जाएगी कविता सृजित
आखिर ये रचना तुम्हें ही तो
करनी थी अर्पित
अब तो मुस्कुरा दो........

कुछ ट्रोफिज में से एक सबसे अहम .....:):):