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Thursday, May 30, 2013

HAPPY BIRTHDAY “जिंदगी की राहें”!! (5th Anniversary)


आखिर वो दिन, वो मुकाम, मेरे इस ब्लॉग को हासिल हो ही गया, जो कभी सोचा तक नहीं था।
एक दो तीन ... नहीं पाँच साल। हाँ। मेरे इस प्यारे से अजीज पन्ने को, मेरे इस ब्लॉग को बनाए हुए आज पाँच साल हो गए।  

HAPPY BIRTHDAY “जिंदगी की राहें”!!
कभी भी दिमाग में ये बात नहीं आई थी कि ये मेरा ब्लॉग, मेरे लिए नया रास्ता खोलेगा, नए नए लोगो के बीच मेरे जैसे साधारण को एक पहचान देने का कारण बनेगा। बेशक एक लंबा अंतराल गुजर गया, मैंने इस ब्लॉग की दुनिया मैं, फिर भी सच कहूँ तो मेरी समझ कहती है की मैं बाल्यावस्था मे ही अपने सोच को सहेजे हुए हूँ, जो छोटी छोटी बातों पर तुनक जाता है, जो बहुत सी छोटी छोटी बातों पर खूब खुश भी हो जाता है।
31 मई 2008 से पहले की बात याद करूँ तो बस ये कह सकता हूँ हिन्दी भाषी क्षेत्र से आता हूँ, तो कुछ दूसरों के लिखे कवितायें, गजल, शेर की पंक्तियाँ अपने पत्रों मे बराबर इस्तेमाल करता था, मुझे पत्र लिखने का शौक था। इसके अलावा साहित्य में मेरी कोई खास रुचि थी नहीं, घर पर पापा, उपन्यास पढ़ते थे, पर वो सुरेन्द्र मोहन पाठक, वेद प्रकाश शर्मा, रानू, राजहंस, आदि के हुआ करते थे, जिनको मैं भी छिप कर पढ़ जाता। और हाँ बिहार से, स्नातक विज्ञान का छात्र था, तो एक हिन्दी का पेपर बराबर मेरे साथ चिपका रहा। 
कैसे मैं इस ब्लॉग की दुनिया से परिचित हुआ? ये भी बस एक घटना जैसा ही है।  मुझे याद है, मैं ऑर्कुट पर रश्मि प्रभा दी के पहले चार-पाँच मित्रों में से एक था । दी के एक कम्यूनिटी “मन के रथ” में पहली बार तुकबंदी करने की कोशिश की थी और फिर उनके ब्लॉग को देख कर ही वैसे ही बिना कुछ सोचे समझे खुद का ये ब्लॉग “जिंदगी की राहें” बना लिया। तो रश्मि दी का ही पहले कमेंट Are mera chhota bhai itni shaandaar feelings rakhta hai,bahut hi saral dhang se puri zindagi ka hisaab diya hai.. पर था, और उनका वही आशीर्वाद आज भी है ।
एक और शख्स की बात मैं करना चाहूँगा, जिनके कारण मेरे में ब्लॉगिंग का कीड़ा लगातार लगा रहा, मेरी एक और ऑर्कुट की मित्र, माँ समान मेरी दीदी अंजना सिन्हा हैं, जिनका कहना था मुकेश, तुम अपने इस शौक के लिए सिर्फ दस मिनट बराबर निकाला करो, कोशिश कर के देखो... और दीदी के कहे हुए दस-दस मिनट के जोड़ ने मुझे कहाँ से कहाँ पहुंचा दिया ।
र्कुट के दिनों में ही ब्लॉग से हट कर कुछ ऐसे मित्र जैसे अंजना दी, संवित(प्रेम प्रकाश), पुतुल पांडे, वंदना सिंह, अभिषेक, नीलम पूरी, अभिषेक दलेला, वंदना श्रीवास्तव, एहसास(मुकुल), श्रद्धा दी, अमित केशरी,  गीता, शशि मित्तल, शुभ्रा, डिंपल, सुनीता, भावना, रितु, शालिनी गुप्ता  थे, जिनहोने मुझे झेला व सराहा।
इस ब्लॉग की दुनिया से ही मुझे अंजु चौधरी, बड़े भैया (सलिल कुमार), समीर भैया, खुशदीप भैया, सतीश सक्सेना सर, रवीद्र प्रभात जी, इन्दु दी, संगीता स्वरूप दी, राजेश भैया (राजेश उत्साही), शिवम मिश्रा, शिखा वार्श्णेय, निवेदिता दी, रंजू भाटिया, सदा, रागिनी मिश्र, नीलिमा शर्मा, आशीष भैया, अर्चना दी, विभा दी  जैसे लोगो का संसर्ग मिला जिनके कमेंट्स मेरे रचनाओं को अनमोल बना देती है। मुझे याद है एक बार मेरा ब्लॉग ही गुम हो गया था, और फिर एक अनजाने शख्स बीएस पाबला सर से मैंने अपनी आईडी/पासवोर्ड शेयर की और फिर मेरा ब्लॉग मेरे सामने था। पिछले दिनो एक कविता गोष्ठी मे अरुण शर्मा अनंत से मिला था, और फिर दूसरे दिन बातों बातों में इन्होने मेरे ब्लॉग की काया ही पलट दी, इसका आज का खूबसूरत रूप इनकी देन है। इस ब्लॉग से जुड़ी ढेरों यादें दिल में बस्ती है। शुरू के दिनो मे अगर मेरी रचना किसी और ब्लॉग पर शेयर होती थी, तो ये मेरे लिए किसी पत्रिका मे छपने जैसी बात होती । हर एक से वो लिंक शेयर करता।
एक और बात, मुझे बराबर अपनी लिखी रचनाओं को पढ़ कर लगता था और है कि इसमे सुधार की गुंजाइश है। इसके लिए मैंने बराबर शुरू के दिनो मे रश्मि दी, अंजना दी, पुतुल, राजेश भैया, वंदना सिंह, अंजु चौधरी को परेशान करता, और इनके एडिटेड रचनाओं को अपना कहना, खुशी देती...!
ये आप लोगो का स्नेह ही है की इस अंतराल में मेरी दस, हाँ दस साझा कविता संग्रह आ चुकी है। वैसे सच कहूँ तो, मेरे मे छपास का रोग है, मुझे छपना खुशी देती है। मेरे साझा कविता संग्रह:
1. अनमोल संचयन 2. अनुगूँज 3. खामोश, खामोशी और हम 4. प्रतिभाओं की कमी नहीं (2011) 5.
 शब्दो का  अरण्य (पांचों रश्मि प्रभा के सम्पादन मेँ) 6. शब्दो की चहलकदमी (सम्पादन: सत्यम 
शिवम) 7. अरुणिमा (सम्पादन: अंजु चौधरी) 8. पुष्प पंखुरी (सम्पादन: सोनिया बहुखंडी गौड़)
और फिर इनके आलावे मेरे सहसंपादन मे “कस्तुरी” (सहसंपादक: अंजु चौधरी) और “पगडंडियाँ” (सहसंपादन: अंजु चौधरी और रंजू भाटिया) आ चुकी है।

और मैं खुश हो कर बता सकता हूँ की मेरे द्वारा संपादित दोनों कविता संग्रह बेस्ट सेलर भी रही। यहाँ तक की इंडिया टूड़े ने इस बात को तसदीक किया है, और इसकी समीक्षा भी छापी।

मैं 'कस्तुरी' और 'पगडंडियाँ' के अपने साझा कवि/कवियात्रियों यथा स्व. रजत श्रीवास्तव, रश्मि प्रभा दी, नीलिमा शर्मा, डॉ. वंदना सिंह, डॉ. रागिनी मिश्रा, डॉ. गुरमीत सिंह, नीलम पूरी, गुंजन अग्रवाल, गुंजन श्रीवास्तव, मीनाक्षी मिश्रा तिवारी, कुमार राहुल तिवारी, मुकेश गोस्वामी, बोधमिता, अमित आनंद पांडे, जेसबी गुरजीत सिंह, पल्लवी सक्सेना, वाणी शर्मा, रंजू चौधरी, अंजु चौधरी, हरविंदर सलूजा, रेखा श्रीवास्तव दी, वंदना गुप्ता, वाणी शर्मा दी, नीता पौदवाल
, उपासना सियाग, ऋता शेखर दी, अनुपमा त्रिपाठी, रूमी बग्गा, अंकित खरे, रजनी नैयर मल्होत्रा, कमल शर्मा, शेफाली गुप्ता, प्रियंका राठोड, सोनिया बहुखंडी गौड़, शिखा वार्श्णेय, अजय देवगिरे, मीनाक्षी पंत, राहुल सिंह का दिल से आभारी हूँ, जो सबने मेरे पर विश्वास बनाए रखा। और एक  प्रकाशक एवं मित्र के रूप मे शैलेश भारतवासी का सहयोग तो अतुलनीय था....!

ब्लॉग की दुनिया से जुड़े अपने सभी मित्र यथा, सत्यम शिवम, विभा श्रीवास्तव दी, जेनी शबनम दी, संध्या जैन, पूनम दी,अमित श्रीवास्तव, निवेदिता श्रीवास्तव दी, शशि पुरवार, हरकीरत हीर,  शेखर सुमन, रेवा, अरुण चन्द्र रॉय, सरस दरबारी दी, दिगंबर नासवा,  अर्चना चावजी दी, डॉ. दराल, संतोष त्रिवेदी जी, शलिनी रस्तोगी, प्रीति मेहता, राजीव तनेजा, माया मृग, रश्मि नाम्बियार, सुनीता शानू दी राजेश कुमारी, अंजु अनन्या, सोनल रस्तोगी, आराधना (मुक्ति), संध्या शर्मा, रचना दीक्षित, मनोज सर, आलोक खरे, तुषार रस्तोगी, सहनवाज़, सखी सिंह, सरिता भाटिया, इन्दु, आशीष भैया, कैलाश शर्मा, नीता महरोत्रा, अपर्णा अनेकवर्णा, अजय झा, शिवम मिश्रा, डॉ. जाकिर, प्रवीण पांडे, यशोदा अग्रवाल, अनूप शुक्ल, यशवंत, रश्मि मौर्य, किरण आर्य, इस्मत जैदी, रंजना वर्मा, अपर्णा बोस, साधना वैध, वंदना श्रीवास्तव, अक्षय, अनंत कुमार अरुण, अरुण राय, संगीता स्वरूप दी, संजय भास्कर, केवल भाई, किशोर खोरेन्द्र, अरुणा कपूर, मधु सिंह, सदा, आशा सक्सेना, काली प्रसाद, श्रधा जैन, रंजना वर्मा,  रचना आभा, लक्ष्मण बिसनोई, मदन, क्षमा, अजीज जौनपुरी, शलिनी रस्तोगी, कविता वर्मा, रूप चंद शास्त्री, राजेंद्र स्वर्णकार, अनुलता राज नायर, अरुणा सक्सेना, पूनम मटिया, डॉ. नूतन गइरोला, रविकर, दीपक बाबा, रश्मि रविजा,सिंघेश्वर सिंह जी, अल्पना वर्मा,  नीता महरोत्रा, ताऊ रामपुरिया, कालीप्रसाद, प्रतिभा सक्सेना, रीना मौर्या, ललित शर्मा, आशा जोग्लेलकर, दीपक बाबा, सुमन कपूर मीत आदि सबका मैं आभार प्रकट करता हूँ, जिनहोने वक़्त वक़्त पर मुझे पढ़ा, मुझे सराहा, मैंने उनका दिल से आभारी हूँ, जिनहोने मेरी गलतियों बताई। इन नामों के अलावा भी बहुत से नाम हैं, जिनको शायद मैं अपने कमजोर याद के वजह से भूल गया हूँ, पर, फिर भी उन्हे मेरी दिल से शुक्रिया !

इन बीते हुए सालों के मध्य मुझे अपने लिए दो बार तालियों की आवाज़ सुनने को मिली। वर्ष 2011 के लिए तस्लीम परिकल्पना ब्लोगुत्सव द्वारा सर्वश्रेष्ठ युवा कवि का पुरस्कार, और फिर वर्ष 2012 के लिए शोभना काव्य सृजन सम्मान, जो मेरे लिए हर्ष का विषय रहा है।

अगर आंकड़ें की दृष्टि से देखें तो ये मेरा 100 वां पोस्ट है, मेरे ब्लॉग को 312 ब्लॉगर/रचनाकर/पाठक फॉलो करते हैं, जबकि फेसबूक के माध्यम से 43 लोग फॉलो करते हैं। ब्लॉग की इंडि रंक समान्यतः 75 से 80 के बीच होती है, अब तक करीब 56000 विजिटर्स ने इस ब्लॉग को देखा है,  5000 से ऊपर कमेंट्स की संख्या है, जो एहसास दिलाती है की, हिन्दी ब्लोगस की दुनिया में मेरी भी हैसियत है। धन्यवाद।

अंत मे, मैं खुश हूँ, अपने धर्मपत्नी अपनी हमसफर अंजु के सहयोग से, तभी इस लंबे अंतराल तक आप सब से जुड़ कर रह चुका हूँ। अपने दोनों बेटों यश-ऋषभ की चमकती आंखे मुझे हौसला देती है, जब वो मेरे हाथो कोई नई पुस्तक, या कोई अवार्ड देखते हैं...


जानता हूँ
अपने को
समझता हूँ
खुद को
नहीं हूँ नगीना
पर तुम सबका
प्यार व आशीर्वाद
कर चुका चमत्कार
हूँ अचंभित
फिर भी हूँ खुश
बरसाना ऐसा ही प्यार
बार बार !!


Thursday, May 23, 2013

वक़्त





वक़्त
अजीब है तू भी
नरम हाथो से
तूने पकड़ा था हाथ
फिर हथेली पर
अश्क की बूंदें बिखर गई
टूटते खवाबों की
कतरन
ही तो थी, वे बूंदें
जो दिला रही थी याद
हर आँखों में
खवाब प्यारे नहीं लगते !!
है न........


Monday, May 20, 2013

काश!!



काश!!
मुझ में होती, नीले नभ जैसी विशालता
ताकि तुम कह पाती
मैं हूँ तुम्हारा अपना
एक टुकड़ा आसमान !

काश, मुझ में होती
समुद्र जैसी गहराई
ताकि तू डूब पाती
मेरे अहसासों के भंवर में!

काश, मुझ में होती
हिमालय सी गंभीरता
ताकि तुम्हे लगता
मैं हूँ तुम्हारे लिए कवच सा
रक्षा करने वाला, रखवाला!

काश मेरा ह्रदय होता
फूलो के पंखुड़ियों सा कोमल
ताकि तू अपने धड़कते मन में
रख पाती, सहेज कर, बाँध कर!

काश, ऐसा कुछ हो पाता
ताकि तुम मुझमे और मैं तुम में खो जाता
जो होती प्रेम की पराकाष्ठा
सिर्फ और सिर्फ प्रेम!
प्रेम !!
___________________
काश के भंवर में प्रेम ......... :)


Tuesday, May 14, 2013

फेसबूक का यमराज



हल्की सी आँख लगी
धमक से यमराज की गदा चली
सपने में आँख मिचमिचाई
मेरी आवाज भर्राई
क्या हुआ देवधिदेव !
काहे नींद तोड़ रहे हो
अपराध तो बताओ
बिना बताए क्यों आए
सोने से पहले कुछ हुआ नहीं
थे अच्छे नींद में हम सोये
अब आधी रात क्यों आए
दयानिधान! अब बता भी दो
क्या सच में लेने आए हो
या बस नींद खड़काने ही आए हो
ले चलने से पहले फेयरवेल तो करवाओ
सबसे गले तो मिलवाओ ...

जल्दी चल बावरे!
तेरी गलती की सजा तो मिल के रहेगी
आज ही चित्रगुप्त ने बताया है
तुमने मेरा फ्रेंड रिकुएस्ट ठुकराया है
ऊपर से ब्लाक भी करवाया है
तेरी इत्ती हिम्मत,
अब तेरी फूटेगी किस्मत
अब तू बच नहीं पाएगा
चल मेरे साथ,
नरक का इंटरनेट तू ही चलाएगा
अब हर दिन --- डालेगा --- मेरा स्टेटस
मेरा फेक प्रोफ़ाइल कहलाएगा
फेसबूक पर मुकेश यमराज कहलाएगा ...
हा हा हा हा ! सोच मूरख
क्या से क्या हो जाएगा
क्या से क्या हो जाएगा ..........







Thursday, May 9, 2013

पोस्टर !!



10 फरवरी को विश्व पुस्तक मेला में लोकार्पित हुई मेरे सह सम्पादन मे साझा कविता संग्रह "पगडंडियाँ" से मेरी एक रचना आप सबके लिए... J

पोस्टर !!
नाम सुनते ही, बस
बस आ जाते हैं फिल्मी दृश्य
जेहन मे, है न !
पर सोचना, क्या है जुड़ा नहीं ये
जिंदगी के हर पड़ाव से ...

याद है मुझे
मिक्की-डोनाल्ड या कार्टून के पोस्टर्स
जो होते थे काफी
हम नन्हें दिल को खुश करने के लिए ...

मुझे याद है वो दिन भी
जब क्रिकेट करती थी पागल हमें
और मेरा कमरा पटा होता था
"कपिल द जबाब नहीं " व
गावस्कर की बैटिंग स्टाइल से ...
खेल मे बेशक नहीं थे पारंगत
पर पोस्टर्स, थे न हर दीवाल पर ...

हंसी आती है उस याद पर
जब अमिताभ के पोस्टर्स को देख कर
आईने मे बनती थी "हेयर स्टाइल"
तभी तो कानो के ऊपर
लहराते थे लंबे बाल...

हाँ मैं भूल गया बताना
कालेज मे था, किसी इंस्टीट्यूट
का प्रचार का पोस्टर
बस तो हो गई थी जरूरी
वहाँ नामांकन पढ़ाई के लिए
ऐसा असर देता था पोस्टर .... 

वो बनने वाली थी माँ
किसी ने कहा, सुबह जो वो देखेगी
उसका असर होगा गर्भ पर
और फिर, थे चारो और पोस्टर्स पोस्टर्स
कृष्णा, राम, लक्ष्मी बाई के भी ....
मोटे तंदुरुस्त खूबसूरत बच्चो के भी
काश हुआ हो, उसका असर...

आप भी जब गुजरते होंगे सड़कों पर
दिख जाता होगा
हर तरह का पोस्टर्स
कभी प्रॉडक्ट तो कभी मॉडल
खींच लेता है अपनी ओर
किसी भी व्यवसाय को
बढ़ा देते हैं ये खूबसूरत पोस्टर्स

तो फिर क्या कहते हैं
है न जिंदगी के हर लम्हे से जुड़ा
पोस्टर्स, हर तरह का पोस्टर्स ....
जिंदगी के हर रूप को रु-ब-रु कराते पोस्टर्स..............

अगर ये संग्रह आप खरीदना चाहें तो 150/- मूल्य की पुस्तक सिर्फ 120/- मे  (infibeam.com) साइट से खरीद सकते हैं... 


Saturday, May 4, 2013

A report on press clippings of पगडंडियाँ



पिछले दस फ़रवरी को विश्व पुस्तक मेले के दौरान पगडंडियाँ (साझा कविता संग्रह) जिसका सह संपादन मैंने अंजू चौधरी और रंजू भाटिया के साथ मिल कर किया था, का लोकार्पण वरिष्ठ कथाकार श्रीमति चित्रा मुदगल, श्री विजय किशोर मानव, कवि व पूर्व संपादक "कादंबनी", श्री बलराम, कथाकार व संपादक, "लोकायत", श्री विजय राय, कवि व प्रधान संपादक, "लमही" एवं श्री ओम निश्चल, कवि-आलोचक ने किया। 

जहाँ हिंदी के कविताओं का जायदा बड़ा बाजार नहीं है फिर भी इस पुस्तक को लोगो ने ऑनलाइन खूब ख़रीदा और "इंडिया टुडे" तक ने कहा की ये पुस्तक बेस्ट सेलर बनने के और अग्रसर है। 


और फिर "इंडिया टुडे" ने अपने २४ अप्रैल के अंक में पगडंडियाँ की समीक्षा भी प्रकाशित की, जो हमारी कविता संग्रह के प्रकाशन को सराह रहा था, हम सब इस समीक्षा को पढ़ कर अभिभूत थे



इस पुस्तक के लोकार्पण की खबर को लोकायत पत्रिका (जो मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में बिकने वाली बेहतरीन पत्रिका है) ने एक पुरे पेज पर दिया



इसके आलावा "मेरी दिल्ली" और "दैनिक प्रभात चक्र", "दिशाएं", "बी पी इन टाइम्स" जैसे समाचार पत्र ने इस समाचार को  प्रमुखता से जगह दी, जो हम जैसे नौसिखिये रचनाकारों के लिए प्रसन्नता का विषय था।


यह पुस्तक सारी प्रमुख ऑनलाइन बिज़नस साइट्स पर २० % डिस्काउंट के बाद १२०/- रूपये में उबलब्ध है .



अब कुछ अपनी बात, पिछले दिनों 17.04.2013 को शोभना वेलफेयर सोसाइटी (जिसके संयोजक सुमित प्रताप सिंह हैं) के तत्वाधान में गांधी पीस फ़ाउंडेशन, नई दिल्ली में आयोजित "शोभना सम्मान 2012" में "शोभना काव्य सृजन सम्मान 2012" का पुरस्कार मुझे भी प्राप्त हुआ !!



उस से पहले होली के पूर्व संध्या पर एक शाम कवियों के नाम (टीवी चैनल वन) पर 26.03.2013 को रात 8 से 9 बीच मैंने भी कविता पाठ किया . 








एक पत्रिका "ट्रू मीडिया" में मेरी एक रचना "लाइफ इन मेट्रो" को भी स्थान मिला 

इतना सब कुछ आप सबको बता कर मैं खुश हो रहा हूँ ....
आप सबकी शुभकामनायें मेरे साथ रहेंगी, बस यही उम्मीद है ........