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Wednesday, April 16, 2014

आवाज


कभी सुना
आवाजें मर गई ?
आवाज सन्नाटे को चीरतीं है
बहते मौन हवाओं के बीच
हमिंग बर्ड की तरह..
आवर्ती गति के साथ आगे बढ़ती
सन्नन्नन्न की गूँजती आवाज़ !!
.
सुनो!
अगर मेरे जाने के बाद
कभी भी
मेरी आवाज सुनना चाहो
मेरी स्मृतियों की खनखनाहट से
अपनी कान लगा देना..
फिर उस गुड-गुड करते शोर को
ब्रेल लिपि सी कुछ लिपिबद्ध कर के
अनुभव करने की कोशिश करना
देखना.. मेरी आवाज और मैं
बहुत पास ही मिलेंगे!!
बस महसूस करना
और उन पलों में एक बार फिर
जी लेना मुझे...
_________________

गूंज .............. एक शोर की :)



9 comments:

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

बहुत खूब… सुंदर रचना।

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (18.04.2014) को "क्या पता था अदब को ही खाओगे" (चर्चा अंक-1586)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

daisy jaiswal said...

बहोत-सुंदर मन को छू जाती है बहोत सुंदर अभिव्यक्ति...

sandhya jain said...

वाह....बहुत ही खुबसूरत !!

Aparna Sah said...

sahaz abhiwyakti....behud bhavpurn..

Aditya Tikku said...

utam-**

आशीष भाई said...

बहुत बढ़िया व सुन्दर रचना , मुकेश भाई धन्यवाद !
Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )
~ ज़िन्दगी मेरे साथ - बोलो बिंदास ! ~ ( एक ऐसा ब्लॉग -जो जिंदगी से जुड़ी हर समस्या का समाधान बताता है )

Agyaat said...

One of ur best creation !

Anju (Anu) Chaudhary said...

आवाज़ों का अपना एक अलग ही शोर है