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Wednesday, April 16, 2014

आवाज


कभी सुना
आवाजें मर गई ?
आवाज सन्नाटे को चीरतीं है
बहते मौन हवाओं के बीच
हमिंग बर्ड की तरह..
आवर्ती गति के साथ आगे बढ़ती
सन्नन्नन्न की गूँजती आवाज़ !!
.
सुनो!
अगर मेरे जाने के बाद
कभी भी
मेरी आवाज सुनना चाहो
मेरी स्मृतियों की खनखनाहट से
अपनी कान लगा देना..
फिर उस गुड-गुड करते शोर को
ब्रेल लिपि सी कुछ लिपिबद्ध कर के
अनुभव करने की कोशिश करना
देखना.. मेरी आवाज और मैं
बहुत पास ही मिलेंगे!!
बस महसूस करना
और उन पलों में एक बार फिर
जी लेना मुझे...
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गूंज .............. एक शोर की :)

~मुकेश~



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