जिंदगी की राहें

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Sunday, April 20, 2014

हसरतें



थी हसरतें
इस नादान दिल को
रख दूँ रेहन आपके पास !

काश! ये पागल दिल
कुछ पलों के लिए ही सही
धड़कता आपके ज़ेहन में

ये शख्स
कर देता जिंदगी आपके नाम
पल-पल.. छिन-छिन...
हो जाते आप पर क़ुर्बान

जिंदगी का हर क़तरा
प्यार.. दिल.. एहसास
होता आपका ही कर्ज़दार

सूद मे देनी होती मुझे
अपनी धड़कती साँसे
सिर्फ आपके ही नाम

होती चंद आहें भी साथ
मेरे ख़्याल.. मेरे जज़्बात..
मेरा वजूद.. मेरी नज़्म के साथ

हो जाते क़ैद
आपके दिल के
ताले लगे गिरवी घर में

उफ़्फ़!! मेरे आका..
मैं होता आपका गुलाम..
आपका गुलफ़ाम..

मेरी खामोश लबों
को दे दो न
अपनी मुस्कान

एक बार तो कहो
“आमीन” !!
_______________
प्यार व्यापार सा :)


Wednesday, April 16, 2014

आवाज


कभी सुना
आवाजें मर गई ?
आवाज तो,
सन्नाटे को चीरती है
बहते मौन हवाओं के बीच
हमिंग बर्ड की तरह..
आवर्ती गति के साथ आगे बढ़ती है
सन्नन्नन्न की गूँजती आवाज़ !!
.
सुनो!
अगर मेरे जाने के बाद
कभी भी
सुनना चाहो मेरी आवाज
मेरी स्मृतियों की खनखनाहट से
तो, लगा देना अपनी कान
फिर उस गुड-गुड करते शोर को
ब्रेल लिपि सी कुछ लिपिबद्ध कर के
अनुभव करने की करना कोशिश
देखना..
मेरी आवाज और मैं
मिलेंगे, बहुत पास ही
बस महसूस करना
और उन पलों में एक बार फिर
जी लेना मुझे...
~मुकेश~



Friday, November 22, 2013

अनमोल प्यार




अजीब सी जिंदगी
अलग सा फसाना
नगण्य उम्मीद
और फिर सब कुछ पा जाना
शायद लिखा जा सकता
या लिखा गया था
एक प्रेम तराना !!

कुछ बहुमूल्य पलों का साथ
था हाथों मे हाथ
कभी पकड़े, कभी थरथराए
एक दूसरे की
सिर्फ थी सामने नजरें
थी चमकती बोलती आंखे
थे अनबोले से एहसास
थी समीपता
थी नादानियाँ
थी बचकानी हरकतें
था तरंगित मन
बोलो! क्या नाम दूँ उसको
मनचला, मतवाला, अलबेला !!

छोड़ो न, रहने देते हैं
क्या है जरूरी ?
हर प्यार जैसे
एहसास को
संवेदना को
मिल ही जाये मंजिल
पर फिर भी
प्यार तो है प्यार
कुछ पलों का अनमोल प्यार!!

  

Sunday, September 19, 2010

~:: पल ::~

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पल

बीते हुए पल

गुजरे हुए पल

मीठे पल

दर्द भरे पल

आनंददायक पल

आह्लादित पल

उल्लासित पल

अनमोल पल

कसकदार पल

जज्बाती पल

लहूलुहान पल

खुनी पल

यादगार पल

उत्तेजित पल

उन्मादित पल

रोमांचकारी पल

रुआंसे पल

शांत पल

ठसकदार पल

आह भरते पल

बेशकीमती पल

जिंदगी के ये सारे पल!!



और इन पलो की

गुंथी हुई माला

बन जाती है स्मृतियां

यादगार स्मृतियाँ

अगर सहेज कर रखो

तो बन जाती है.......

जीने की आधार स्मृतियाँ .......


उपरोक्त पंक्तियाँ मैंने बस ऐसे ही सोचा और कागज में उतार दिया. फिर अपने एक मित्र ब्लॉगर "श्रीमती नीलम  पूरी" को बताया तो उन्होंने कुछ मिनटों में इन पंक्तियों को एक सशक्त कविता में रूपांतरित कर दिया........! वैसे सच कहूँ तो उन्होंने एक तरह से मेरी पंक्तियों पे रोड रोलर ही चलाया है, लेकिन उनका कुछ मिनटों का प्रयास अच्छा लगा, इसलिए उसको नीचे लिख रहा हूँ......:


पल

जो बीत गए कल

जो कुछ मीठे कुछ खट्टे पल

वो कसक भरे, दर्द भरे पल

कुछ आनंद दायक कुछ आह्लादित पल

कुछ कसक से भरे हुए पल

कुछ बहा ले गए जज्बाती पल

कुछ लहूलुहान करते पल

कुछ खुनी खंजर से दिल में उतारते पल

वो प्रीत के यादगार पल

जो कर गए थे उत्तेजित वो पल

उन्मादित पल

कुछ कर गए रुआंसे से

कुछ रह गए बचे हुए शांत पल

कुछ ठसकदार पल

और बाकि आह भरते हुए पल

फिर भी बेशकीमती पल

जिंदगी के ये सारे पल

जो बन गयी मेरी यादो के

कुछ दर्द भरे कुछ हसीन पल

कुछ कर गए उल्लासित वो बीते हुए पल

कुछ खुनी खंजर से दिल में उतारते हुए पल



और इन पलो की

गुंथी हुई माला

बन जाती है स्मृतियां

यादगार स्मृतियाँ

अगर सहेज कर रखो

तो बन जाती है.......

जीने की आधार स्मृतियाँ .......