जिंदगी की राहें

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Monday, May 20, 2013

काश!!



काश!
मुझ में होती, नीले नभ जैसी विशालता
ताकि तुम कह पाती
मैं हूँ तुम्हारा अपना
एक टुकड़ा आसमान !
काश, मुझ में होती
समुद्र जैसी गहराई
ताकि तू डूब पाती
मेरे अहसासों के भंवर में!
काश, मुझ में होती
हिमालय सी गंभीरता
ताकि तुम्हे लगता
मैं हूँ तुम्हारे लिए कवच सा
रक्षा करने वाला, रखवाला!
काश मेरा ह्रदय होता
फूलो के पंखुड़ियों सा कोमल
ताकि तू अपने धड़कते मन में
रख पाती, सहेज कर, बाँध कर!
काश, ऐसा कुछ हो पाता
ताकि तुम मुझमे और मैं तुम में खो जाता
जो होती प्रेम की पराकाष्ठा
सिर्फ और सिर्फ प्रेम!
प्रेम !!
काश के भंवर में
डूबता उतरता प्रेम ......... 
~मुकेश~