जिंदगी की राहें

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Monday, May 20, 2013

काश!!



काश!
मुझ में होती, नीले नभ जैसी विशालता
ताकि तुम कह पाती
मैं हूँ तुम्हारा अपना
एक टुकड़ा आसमान !
काश, मुझ में होती
समुद्र जैसी गहराई
ताकि तू डूब पाती
मेरे अहसासों के भंवर में!
काश, मुझ में होती
हिमालय सी गंभीरता
ताकि तुम्हे लगता
मैं हूँ तुम्हारे लिए कवच सा
रक्षा करने वाला, रखवाला!
काश मेरा ह्रदय होता
फूलो के पंखुड़ियों सा कोमल
ताकि तू अपने धड़कते मन में
रख पाती, सहेज कर, बाँध कर!
काश, ऐसा कुछ हो पाता
ताकि तुम मुझमे और मैं तुम में खो जाता
जो होती प्रेम की पराकाष्ठा
सिर्फ और सिर्फ प्रेम!
प्रेम !!
काश के भंवर में
डूबता उतरता प्रेम ......... 
~मुकेश~


49 comments:

खोरेन्द्र said...

bahut sundar kavita

खोरेन्द्र said...

bahut sundar kavita

Archana Chaoji said...

एक दूजे में खोने की जद्दोजहद के बीच ...
अंजू का चित्र लाजवाब ...फोटोग्राफर को बधाई

दिगम्बर नासवा said...

जब प्रेम है तो सब कुछ ही है ... बस उसी प्रेम से सब कुछ मिल जाएगा ... गहरे भाव ....

Sadhana Vaid said...

कोमल अहसासों से परिपूर्ण भावुक मन के खूबसूरत उद्गार ! बहुत सुंदर रचना !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वाह .... बहुत खूबसूरत खयाल .... जब खयाल हैं तो ऐसा ज़रूर होगा ।

Aruna Kapoor said...

काश!...कहने के लिए बहुत कुछ है ..काश!...कि हर ईच्छा की पूर्ति हो!..बहुत सुन्दर रचना!

shashi purwar said...

komal anubhuti mukesh , kash aisa ho paata .....sirf pavitra prem ..shubhkamnaye :) . jeevan ka aadhar hi prem hai

प्रवीण पाण्डेय said...

प्रकृति की हर सुन्दर वस्तु छिपी है प्रेम में।

Unknown said...

prem ke khoobshurar rang aur khushoo se sarabor rachna,new pot bate kae

Rajendra kumar said...

बहुत ही गहरे भाव लिए बेहतरीन प्रस्तुति.

shikha varshney said...

प्रकृति और प्रेम. बहुत सुन्दर .

सदा said...

काश!!! पर टिकी प्रेम की अभिलाषा सहज से शब्‍दों में जीवंत बनाती
अनुपम भाव संयोजन
आभार

vandan gupta said...

गज़ब के भाव सहेजे हैं मुकेश

Khare A said...

सुन्दर सृजन! बधाई कबूले

Asha Lata Saxena said...

कोमल अहसासों की सुन्दर अभिव्यक्ति |
आशा

anilanjana said...

प्रेम स्वयं में ही रेशम है ..उतना ही सुकोमल तुम्हारा ''काश''' ..जिसने तुम्हे पाया उसे इस काश की ज़रुरत नहीं पड़ेगी जानती हूँ ....इस मखमली भावाभिव्यक्ति के लिए स्नेहाशीष मुकेश ...तुम्हारा आकाश वृहद् होता देखना सुखद है ...और उतना ही सुखद इस ब्लॉग का नया कलेवर देखना ..बहुत बधाई ...

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २ १ / ५ /१ ३ को चर्चामंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां स्वागत है ।

Unknown said...

आपकी यह रचना कल मंगलवार (21 -05-2013) को ब्लॉग प्रसारण अंक - २ पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन भारत के इस निर्माण मे हक़ है किसका - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

ANULATA RAJ NAIR said...

सच मानो..
तुम में जो कुछ है वही प्रेम है उसके लिए.....

:-)

अनु

कालीपद "प्रसाद" said...

बहुत बहुत सुन्दर भाव!.बहुत सुन्दर रचना!



latest postअनुभूति : विविधा
latest post वटवृक्ष

Tamasha-E-Zindagi said...

बहुत खूब | बढ़िया लेखन | सुन्दर अभिव्यक्ति विचारों की | सादर

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

Aparna Bhagat said...

एक गीत याद आया.. 'कभी किसी को मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता... कभी ज़मीन तो कभी आसमान नहीं मिलता...' इस 'काश' का एहसास भी बहुत है प्रेम के लिए.. जहाँ आप प्रिय को सब कुछ और भी अच्छा देना चाहते हैं.. सुन्दर लिखा है मुकेशजी

Ranjana verma said...

बेहतरीन रचना....!!

Ranjana verma said...

बेहतरीन रचना....!!

Tamasha-E-Zindagi said...

बढ़िया |

kavita verma said...

bahut sundar rachna ..

***Punam*** said...

काश ऐसा होता.....

ऋता शेखर 'मधु' said...

बहुत सुंदर लग रहा है...ब्लॉग...और उससे भी सुंदर कविता...कभी पूछ कर देखा है...जो तुम्हारे लिए काश है वह उसके लिए सच हो...ढेरों आशीर्वाद के साथ शुभकामनाएँ!!

Anju (Anu) Chaudhary said...

भीनी-भीनी प्यार की खुशबू का अहसास तो हो रहा है ...बहुत अच्छी प्रस्तुति

Unknown said...

बहुत अच्छी कविता

वाणी गीत said...

जब इतना कुछ काश है तो काहे परेशां होना :)
मगर लिखा बढ़िया है , भावपूर्ण !

रंजू भाटिया said...

बेहतरीन रचना सुन्दर अभिव्यक्ति

Guzarish said...

शुभम मुकेश जी
बहुत बढ़िया प्रस्तुति
बधाई

Laxman Bishnoi said...

सुन्दर रचना !!
बहुत कुछ का अनुसरण करें और बहुत कुछ देखें और पढें



उम्मीद है आप मार्गदर्शन करते रहेंगे

sandhya jain said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति... :-)

sandhya jain said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति... :-)

nayee dunia said...

यह काश मन में फांस बन कर ही चुभता रहता है ...बहुत सुन्दर लिखा आपने मुकेश जी

Madan Mohan Saxena said...


बहुत सुंदर .बेह्तरीन अभिव्यक्ति शुभकामनायें.
आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/
http://mmsaxena69.blogspot.in/

kshama said...

Wah! Aur kewal wah!

अज़ीज़ जौनपुरी said...

सुंदर अभिव्यक्ति ,लाजवाब चित्र

Dr. Vandana Singh said...

अभिव्यति के बिना प्रेम का अस्तित्व अपनी अहमियत खो देता है.... और यदि अभिव्यक्ति इतनी असरदार हो तो क्या कहने.... बहुत बहुत शुभकामनायें आपके प्रेमपूर्ण जीवन के लिए :)

shalini rastogi said...

kaaaash ... bahut sundar !

sandhya jain said...

बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति..... :-)

sandhya jain said...

बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति..... :-)

प्रतिभा सक्सेना said...

मनचाहा हो जाये तो बात ही क्या है !

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की ५५० वीं बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन की 550 वीं पोस्ट = कमाल है न मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Tamasha-E-Zindagi said...

सुन्दर और भावपूर्ण रचनात्मक अभिव्यक्ति...