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Friday, November 22, 2013

अनमोल प्यार




अजीब सी जिंदगी
अलग सा फसाना
नगण्य उम्मीद
और फिर सब कुछ पा जाना
शायद लिखा जा सकता
या लिखा गया था
एक प्रेम तराना !!

कुछ बहुमूल्य पलों का साथ
था हाथों मे हाथ
कभी पकड़े, कभी थरथराए
एक दूसरे की
सिर्फ थी सामने नजरें
थी चमकती बोलती आंखे
थे अनबोले से एहसास
थी समीपता
थी नादानियाँ
थी बचकानी हरकतें
था तरंगित मन
बोलो! क्या नाम दूँ उसको
मनचला, मतवाला, अलबेला !!

छोड़ो न, रहने देते हैं
क्या है जरूरी ?
हर प्यार जैसे
एहसास को
संवेदना को
मिल ही जाये मंजिल
पर फिर भी
प्यार तो है प्यार
कुछ पलों का अनमोल प्यार!!

  
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