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Thursday, September 6, 2012

चढ़ता उतरता प्यार



































वो मिली
चढ़ती सीढियों पर
मिल ही गयी
पहले थोड़ी
नाखून भर
फिर
पूरी की पूरी..
ओंठ भर
और फिर
प्यार की सीढियों
पर
चढ़ते चले गए....

वो फिर
मिली
उन्ही सीढियों पर,
पर इस बार
सीढियाँ नीचे जाती हुई
आँखे नम थी
नीचे दरवाजे तक
एक दुसरे के आँखे टकराई
फिर दूरियां
सिर्फ दूरियां ............!!

51 comments:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत बढ़िया सही लिखा है ..प्रेम गली अति संकरी वाली बात है इस रचना में .....

expression said...

बहुत सुन्दर.....
अच्छी रचना मुकेश जी...

अनु

Reena Maurya said...

बहुत सुन्दर रचना..
सुन्दर...
:-)

Meenakshi Mishra Tiwari said...

बहुत सुन्दर रचना ..... अधूरी सी ...कुछ.....
पर अपने आप में पूरी सी....
regards

Ragini said...

Its very good, lovely & touching too.........

ऋता शेखर मधु said...

सीढ़ियाँ वही...मिलना भी वही...पर भाव बदल गए...बढी हुई दूरियों के साथ, बढ़िया रचना !!

Neelima said...

एक

रूमानी
अहसास
..कुछ
कुछ
अधुरा
सा
..... खुद
में
ही
पूरा
sa
.......... सुंदर रचना

रविकर फैजाबादी said...

उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

Rewa said...

sundar rachna

संजय भास्कर said...

बढी हुई दूरियों के साथ...दिल के सुंदर एहसास
बढ़िया रचना !!

Pallavi saxena said...

बहूत ही सुंदर एवं गहन भावभिव्यक्ति...

Anupama Tripathi said...

sundar rachna ...
shubhkamnayen ...

kshama said...

Bahut hee sundar rachana!

सुशील said...

बहुत खूबसूरत !

बिल्कुल जिंदगी
की तरह किया
उसने व्यव्हार
बच्चे की तरह
खिलकिलाते चढं
गयी ऊपर
बूढी़ हो कर
उतर आई !

ashish said...

वाह , प्रेम की अभिव्यक्ति इतनी सरलता से , कुछ तो है . मस्त

Soniya Bahukhandi Gaur said...

बहुत सुंदर रचना मुकेश जी। गहन भावों से भरी हुई। सादर

Virendra Kumar Sharma said...

ये इंस्टेंट लव है भाई ,बुखार चढ़ भी गया ,उतर भी गया .....

शुक्रवार, 7 सितम्बर 2012
क्या अपपठन (डिसलेक्सिया )और आत्मविमोह (ऑटिज्म )का भी इलाज़ है काइरोप्रेक्टिक में ?

Dimple Kapoor said...

its very difficult to control ones feelins bt in our life we hav to control them nt just for self bt for survive in d world:(
ur creation is very gud bt sad:(

वन्दना said...

्सुन्दर अभिव्यक्ति

सदा said...

वाह ... बेहतरीन ।

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

बहुत ही सुन्दर रचना |

शिवम् मिश्रा said...

वाह ...


मुझ से मत जलो - ब्लॉग बुलेटिन ब्लॉग जगत मे क्या चल रहा है उस को ब्लॉग जगत की पोस्टों के माध्यम से ही आप तक हम पहुँचते है ... आज आपकी यह पोस्ट भी इस प्रयास मे हमारा साथ दे रही है ... आपको सादर आभार !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरती से लिखे एहसास .... सीढ़ियाँ भी गवाह रहीं चढ़ते उतरते प्रेम की

रवीन्द्र प्रभात said...

एक और बेहतरीन रचना के लिए बधाइयाँ !

रश्मि प्रभा... said...

प्यार ... सीढियों से उतरकर भी नमी लिए एक झील बन जाता है

Dr.vandana singh said...

मधुर.... और भावनात्मक...

Dr.vandana singh said...

मधुर.... और भावनात्मक...

Mukesh Kumar Sinha said...

Shweta Agarwal
Chadhta Uttarta Pyaar....

Pyaar chadhta bhi mila aur uttarta bhi....aur pyaar ka ehsaas jo mittha bhi hota hai aur dard bhara bhi....uska bhi ehsaas aapne apni rachna mein karaya hai.....saral shabdon mein pyaar ka vyaakhyaan pehli baar dekha...bahut khub....aapko aapki aisi racha par bahut bahut badhayi :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (08-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

HARSHVARDHAN SRIVASTAV said...

बहुत सुन्दर कविता,काबिले तारीफ ।
मेरे नए पोस्ट - "क्या आप इंटरनेट पर मशहूर होना चाहते है?" को अवश्य पढ़े ।धन्यवाद ।
मेरा ब्लॉग पता है - harshprachar.blogspot.com

प्रवीण पाण्डेय said...

उतार चढ़ाव से भरी जीवन की ये राहें।

दिगम्बर नासवा said...

गहरे भाव लिए .... जाने और आने के बीच कितना कुछ फांसला तय हो गया ..

Anju (Anu) Chaudhary said...

ये कैसा प्यार हैं ?????

Dr.J.P.Tiwari said...

drishti badali, bhaw badale to vichar bhi kitna badal gaya. sab kuchh wahi... khoobsoorat andaaj.

Dr.J.P.Tiwari said...

drishti badali, bhaw badale to vichar bhi kitna badal gaya. sab kuchh wahi... khoobsoorat andaaj.

Saras said...

वही हम...
वही तुम..
वही अहसास ......
लेकिन हालातों के सामने मजबूर.....!!!!!!!!!

Kailash Sharma said...

सुन्दर रचना...

Monica Varma said...

sunder abhivyakti, par payar kae adhuraepan ka ehsas
.

वाणी गीत said...

मिलना बिछड़ना जीवन झरना ...
सीढियाँ चढ़ने और उतारने के बीच के पल स्मृति बन हमेशा साथ रहते हैं , प्रेम उन पलों में ठहरा होता है !

amrendra "amar" said...

behtreen rachna

मन्टू कुमार said...

गागर में सागर....उम्दा भाव से सुसज्जित बेहतरीन रचना |

Dr.Sushila Gupta said...

romanchak ,bhavnatmak rachna ke lie aapko hardik badhai.

Bhavna....The Feelings of Ur Heart said...

very nice

उपासना सियाग said...

होता है ऐसा भी कई बार , किसी जगह ...कोई बात नही ...!!

बहुत सुंदर रचना ...

BS Pabla said...

सुंदर रचना

प्रतिभा सक्सेना said...

चढ़ाव और उतार- दोनों का क्रम होता है,चलो पूरा हुआ !

दिनेश पारीक said...

बहुत खूब सार्धक लाजबाब अभिव्यक्ति।
आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
अर्ज सुनिये
कृपया मेरे ब्लॉग का भी अनुसरण करे

दिनेश पारीक said...

बहुत खूब सार्धक लाजबाब अभिव्यक्ति।
आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
अर्ज सुनिये
कृपया मेरे ब्लॉग का भी अनुसरण करे

Bhavna....The Feelings of Ur Heart said...

बहुत कम शब्दों में भी बहुत कुछ कह गयी आपकी ये रचना .... बहुत ही सुन्दर

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर रचना...

रचना त्यागी 'आभा' said...

गहरा भाव लिए हुए ............सुन्दर कविता :))