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Wednesday, August 19, 2015

अर्ध-निर्मित घर





अर्ध-निर्मित घर
और उसमे रहने वाले लोग!

प्लास्टर, रंग रोगन व साज सज्जा की
बाट जोहता अधूरा घर
ठीक वैसे ही जैसे
उसको बनवाने वाला शख्स
उम्र गुजर चुकने के बाद भी
नही मिला उसे वो स्तर,
वो तकदीर !!
जिसकी थी उम्मीद,
उस बौद्धिक मेहनतकश को ,
पर थी उम्मीद बरकरार ! इन्टैक्ट!
उस ढीले हो चुके किवाड़ की तरह
जो है बेअसर
अर्ध निर्मित घर की प्राइवेसी को
समेटने में !
फिर भी वो किवाड़
हर बार चर्र की प्रतिध्वनि के साथ
खुलता बंद होता !

शायद, जल्द ही
हो पाए प्लास्टर विथ प्लास्टर ऑफ़ पेरिस
एंड वाइट सीमेंट !
फिर लगेगा जरुर रंग व पेंट
मेरा वाला ग्रीन !

शायद जल्द ही
मिल पाए वो सब कुछ
हर दिन करता है वो
भगवन की मिन्नत -
पैसा भगवान् तो नही
पर उसके बाद है सब कुछ !!

उम्मीदें बरकरार !
क्योंकि उस अर्धनिर्मित घर की
ढिबरी की लौ में
पढ़ने वाला जोड़ेगा नया सीमेंट
दसवीं में वो पा चुका 96 परसेंट !

उम्मीदें सुकून देती हैं, और
अर्ध निर्मित घर की नींव को
बनाती हैं अम्बर सरिया सा मजबूत !!
--------------
उम्मीदें - जीने के लिए विटामिन बी काम्प्लेक्स !!
(हर अधूरा - नहीं होता बुरा)


8 comments:

Arun Roy said...

बहुत बढ़िया कविता

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 20 - 08 - 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2073 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Aparna Sah said...

उम्मीदें बरकरार --इस छलावे के बगैर भी कुछ नहीं-- सार्थक लिखे हो.

Samta Sahay said...

उम्मीदें सुकून देती है ,इरादों को मजबूत बनाती है
बेहतरीन कविता !

हिमकर श्याम said...

सुंदर, सटीक और सार्थक रचना

Onkar said...

उत्कृष्ट प्रस्तुति

रचना दीक्षित said...

आशा और उम्मीद बनी रहनी चाहिए. सुंदर प्रस्तुति.

रश्मि प्रभा... said...

अधूरेपन में सच्चाई होती है