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Tuesday, August 11, 2015

स्पेसिफिक कोना

गूगल से

जरुरी है
डायरी के पन्ने का पलटा जाना
क्यूंकि कहीं न कहीं
पिछले किसी खास पन्ने पर
होगा ही, उसका हस्ताक्षर !!
साथ में लिखा होगा "लव यू"

चमकता गुलाबी गुलाब
खुशबू बिखेरता अच्छा लगता है
पर डायरी में सहेजा
वो खास सूखे गुलाब की पंखुड़ी, इस्सस
उसके जैसा तो शायद कोई भी बुके नही
बस, कुछ भी पुरानी अहमियत
अच्छा लगता है!

पता नही कितनी सारी
पढ़ी प्रेम कहानियां
पर वो मिलना बिछुड़ना
कुछ तो खास कसक थी उसमे
बनती अगर प्रेम मूवी
सेल्युलाइड पर हिट हो ही जाती!

कॉलेज का वो स्पेसिफिक कोना
वो खास गुलमोहर का पेड़
जिसके नीचे रखे उस खास पत्थर पर
चिपक कर बैठे
गुजारा समय कई बार
आज भी ताजमहल लगता है!

चलना, चढ़ना, उतरना
हांफना दौड़ना भागना
सब होता है आज भी
पर वो खास ठोकर
जो खाई थी हमने
उसको निहारने के चक्कर में,
उसको याद कर हलकी सी विस्सल करना
मुनासिब ही लगता है!

कुछ महकते जर्द पन्ने
ता जिंदगी
भरते हैं एक्स इफ़ेक्ट की खुशबू !!
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हलकी चोर मुस्कराहट, होती है खास वजह :-)


4 comments:

संजय भास्‍कर said...

कुछ महकते जर्द पन्ने
ता जिंदगी
भरते हैं एक्स इफ़ेक्ट की खुशबू !!

wow...Beautiful,amazing one !!

Aparna Sah said...

कॉलेज का वो स्पेसिफिक कोना
वो खास गुलमोहर का पेड़
जिसके नीचे रखे उस खास पत्थर पर
चिपक कर बैठे
गुजारा समय कई बार
आज भी ताजमहल लगता है---कितना अपना सा --एकदम सटीक और प्यारा।

Onkar said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति

Madan Saxena said...

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति