जिंदगी की राहें

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Friday, June 27, 2014

जूते के लेस


जूते के लेस 
बेचारे बंधे बंधे रहते हैं, हर समय 
छाती पर बंधे हाथों की तरह 
एक दम सिमटे, गांठ बांधे 
पर देते हैं एहसास 
सब कुछ समेटे रखने का 
चुस्त, दुरुस्त !! 

कभी कभी थके बाहों जैसे 
जूते के लेस भी 
चाहते हैं लहराना हाथों के तरह ही
एक आगे, एक पीछे के
तारतम्य के साथ
तो, कभी बेढ़ब चाल में
चाहते हैं फुदकना
मस्त अलमस्त !!

तभी तो लेफ्ट राइट होते
पैरों के नीचे, पैंट के सतह से
टकरा कर ये लेस
करते हैं कोशिश खुलने का
बहुत बार खुल कर
दिखा ही देते हैं, आजादी
कहते हैं, बहुत हुए त्रस्त और पस्त!!

बड़े होते हैं बदमाश
ये जूते के लेस
जान बुझ कर, खुद ही
दब जाते हैं जूते से
गिर जाता है बलखा कर
जूते पर जो खड़ा था
दिखा रहा था अकड़ !

आखिर "अहमियत" भी
है एक शब्द !
जूता हो, या हो जूते का लेस
या हो सर की टोपी, या हो बटन !!



8 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

हर चीज़ का महत्व है.... मायने हैं.....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (28-06-2014) को "ये कौन बोल रहा है ख़ुदा के लहजे में... " (चर्चा मंच 1658) पर भी होगी!
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर और सार्थक लिखा
मन को छूता हुआ
सादर---

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत खूब वाह ।

Unknown said...

आखिर अहमियत भी कोई चीज है....
यदा-कदा बताते भी रहना चाहिए... सार्थक रचना

Asha Joglekar said...

आखिर "अहमियत" भी
है एक शब्द !
जूता हो, या हो जूते का लेस
या हो सर की टोपी, या हो बटन !!

सही कहा।

Preeti 'Agyaat' said...

आखिर "अहमियत" भी
है एक शब्द !
क्या बात है ! :)

Santa banta said...

सबसे अच्छे जूते
भारत में सबसे अच्छे जूते किस किस कंपनी के आते हैं ।