जिंदगी की राहें

जिंदगी की राहें

Followers

Saturday, September 7, 2013

सिर्फ तुम !




पल पल
हर क्षण
जर्रे जर्रे में
तुम
सिर्फ तुम !

मेरे सपने
मेरी हसरतें
मेरी शर्तें
मेरी जरूरतें
मेरी शरारतें
मेरी रातें
मेरे फलसफे
मेरी डायरी
मेरे शब्द
मेरा दिल
मेरी धड़कन
मेरी जान
मेरी तन-मन-धन !

हर जगह तो
बसने लगी हो
तुम
सिर्फ तुम

पर
इनमें
मैं कहाँ हूँ ?
कैसे ढूँढूँ ?
कब-कब ?
कहाँ-कहाँ ?
किधर ?
उफ़्फ़!!
मैं हूँ भी ??
या नहीं ??



38 comments:

Amrita Tanmay said...

बहुत सुन्दर..

Anju (Anu) Chaudhary said...

तुम ....''सिर्फ तुम'' में छिपे हो

खूबसूरत अहसास तुम्हरी इस कविता के बहुत खूब

Unknown said...

Jo aapke mann mein iss kadar basaa ho ..uske mann mein aapke liye bhi kuch to ahsaas hote hi hain...bahut achi abhivyakti ...God bless u always!!!!!!!

विभा रानी श्रीवास्तव said...

मैं कहाँ हूँ ?
कैसे ढूँढूँ ?
कब-कब ?
कहाँ-कहाँ ?
किधर ?
उफ़्फ़!!
मैं हूँ भी ??
या नहीं ??
लाजबाब
बेमिसाल
जबाब मिलना बहुत मुश्किल
हार्दिक शुभकामनायें

Asha pandey said...

sirf tum .........

Anonymous said...

बहुत सुन्दर

Ramesh pandey said...

सुन्दर.. सिर्फ तुम

मेरा मन पंछी सा said...

सिर्फ तुम में बसी सुन्दर रचना...
:-)

shalini rastogi said...

मेरा मुझ में कुछ नहीं.... बस ...तू ही तू ..

ANULATA RAJ NAIR said...

ढूंढो......यहाँ वहां सब जगह....

सोचो कि तुम हो कि नहीं....
रहस्य प्रेम को और गहरा करते हैं :-)

अनु

निवेदिता श्रीवास्तव said...

जब ये " तुम " मिल जाए तो फिर " मैं " कहाँ बचा जो तुम खोज पाते ...... बहुत अच्छा लिखा :)

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन अब रेलवे ऑनलाइन पूछताछ हुई और आसान - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Rewa Tibrewal said...

pyar mey aisa hi hota hai

आभा खरे said...

waah! behad khoobsurat ... itna saara tum .. fir main raha hi kahan ? kya karenge dhoondh kar .. jaane do .. samvednaaon ke taar yun hi to nahi jud jaate ... too gud Mukesh ji

अरुन अनन्त said...

नमस्कार आपकी यह रचना कल रविवार (08-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

Tamasha-E-Zindagi said...

बहुत खूब

Ranjana verma said...

बहुत खुबसूरत लिखा .....

Rajendra kumar said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती।

प्रवीण पाण्डेय said...

कहाँ रहे तुम..
कहाँ नहीं तुम..

दिल की आवाज़ said...

बहुत बढिया ...

Saras said...

पूर्ण समर्पण ...!!!!

Pallavi saxena said...

nivedita ji ki baat se sahamat hoon :)

दिवेंद्र सिंह 'देव' said...

बहुत खूब

दिवेंद्र सिंह 'देव' said...
This comment has been removed by the author.
Neeraj Neer said...

सुन्दर !!!!

poonam said...

बहुत सुंदर....

Unknown said...

kuch chote-chote shabdon se abhiwyakti de dena....sirf wah..

Anju said...

मैं कहाँ हूँ ?
कैसे ढूँढूँ ?
कब-कब ?
कहाँ-कहाँ ?
किधर ?
उफ़्फ़!!
मैं हूँ भी ??
या नहीं ??
बहुत खुबसूरत .....

डॉ. मोनिका शर्मा said...

समर्पण के सुंदर भाव

Unknown said...

Hum-tum ke darmyan sabkuch,chote-chote shabdon se abhiwyakti de dena.....sirf wah..

दिगम्बर नासवा said...

जब तुम ही तुम हो ... मैं हो भी कहां सकता हूं ... ओर मेरा होने के मायने भी क्या ...

shikha varshney said...

खुद को न देख पाओ ..दिखे सिर्फ तुम ही वही तो प्रेम है:). सुन्दर रचना.

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर अहसास.

Unknown said...

सुन्दर रचना

Kailash Sharma said...

बहुत ख़ूबसूरत रचना...

कविता रावत said...

समय समय की बात है ..
बहुत सुन्दर रचना

संजय भास्‍कर said...

उफ़्फ़!!
मैं हूँ भी ??
या नहीं ??
बहुत खुबसूरत ..... !!!!

Niraj Pal said...

बहुत ही सुन्दर.........भावपूर्ण।