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Monday, September 23, 2013

प्रेम गजल




अंततः एक कविता लिख ही डाली
मैंने
तुम पर !
कल रात ही तो
खबावों  के पन्ने पर
मन के कलम से.……
सच में !
बंद आँखों से
कुछ मानव जोड़े
लगते हैं बड़े खुबसूरत
प्यारा सा अहसास
प्यारी सी खुशबू
प्यारी सी फिजा
मैं तो हो गया फ़ना.!
काश !
किसी फ्रेम में टांक सकता
चलो कोई नहीं
कल गजल लिखूंगा
"प्रेम गजल"
सुनोगी न ………….  ?


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