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Monday, June 24, 2013

पतवार


झील का शांत जल
ठंडाशीतल
पर एक पत्थर या कंकड़
के गिरते ही
झंकृत कर देती है
जल तरंग संगीत
और फिर
नाविक की पतवार
जब करती है
जल को पीछे की ओर
आगे बढ़ता नाव
और पृष्ठ भूमि से
एक बंगला गीत
"जोदी तोर डाक सुने केयू
ना आसे तोबे एकला चलो रे ...... "  


34 comments:

सुज्ञ said...

सुन्दर अभिव्यक्ति!!
अथाह जल (बाधाओं) को पिछे छोड सकारात्मक दृष्टि का संकेत।

Madan Mohan Saxena said...

उत्क्रुस्त , भावपूर्ण एवं सार्थक अभिव्यक्ति .
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें .

Rajesh Kumari said...

बहुत सुन्दर, कोमल भाव गिन्दगी की नाव् भवसागर में यूँ ही गुनगुनाते चलती रहे बधाई एवं शुभ कामनाएं

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ही सुन्दर कविता, चित्रसम।

राजेंद्र कुमार said...

भावपूर्ण एवं सार्थक अभिव्यक्ति

Anupama Tripathi said...

Sachitra sunder bhav......

Reena Maurya said...

सुन्दर चित्र के साथ सुन्दर रचना..
:-)

दिगम्बर नासवा said...

लम्हे को शब्दों में बाँधने का प्रयास ... लाजवाब चित्र उर उसपे किल्हे बोल ...

तिलक राज कपूर said...

खूबसूरत।

Rewa tibrewal said...

sahi kaha...humne sandesh deti rachna

vibha rani Shrivastava said...

"जोदी तोर डाक सुने केयू
ना आसे तोबे एकला चलो रे
एकला चलो रे
एकला चलो रे

shashi purwar said...

बेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (26-06-2013) के धरा की तड़प ..... कितना सहूँ मै .....! खुदा जाने ....!१२८८ ....! चर्चा मंच अंक-1288 पर भी होगी!
सादर...!
शशि पुरवार

Pallavi saxena said...

sundar bhavpoorn rachna...jal tarangon main bhi jivan ka sach chupa hai ki aaj ko jiyo aur kal ko piche chodte hui bas aage badho aur badhtey chalo...:)

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर चित्र के साथ....खूबसूरत रचना !!

Aparna Bose said...

jodi tor dak shune keu na ashe....tobe akla chalo re... wakai... very nice composition.

प्रतिभा सक्सेना said...

शान्त-शीतल जल का विक्षोभ,तरंगों का संगीत बन जाता है !

के. सी. मईड़ा said...

सकरात्मक भाव को दर्शाती हुई सार्थक रचना।.......

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर...

तुषार राज रस्तोगी said...

सुन्दर रचना

Ranjana Verma said...

लाजवाब..!!

Ranjana Verma said...

लाजवाब..!!

sadhana vaid said...

आगे बढ़ने का सार्थक सन्देश देती एक सुंदर रचना !

Dr. Vandana Singh said...

भाव प्रवण शब्द चित्रण हेतु अनेकानेक शुभकामनाएं ....

कालीपद प्रसाद said...

रविंद्रनाथ की यह गीत बहुतों के लिए प्रेरणा स्रोत है -आपने उसे अच्छा प्रोयोग किया
latest post जिज्ञासा ! जिज्ञासा !! जिज्ञासा !!!

sushila said...

सुंदर बिंब लिए सुन्दर रचना।
बधाई !

Mahesh Barmate said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति :)

रचना दीक्षित said...

सुंदर सोच का परिणाम यह सुंदर कविता. शुभकामनाएँ

madhu singh said...

सुन्दर अभिव्यक्ति!

ज्योति-कलश said...

सुन्दर भावमय प्रस्तुति ...

Aziz Jaunpuri said...

nice creation

Aparna Sah said...

bhavpurn abhiwyakti hai...khubsurat chitr ke sath.....

Aditya Tikku said...

lajawab-***

Anju (Anu) Chaudhary said...

कोमल सी रचना

Renu Mishra said...

aklaa chalo re....behtareen kavita