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Thursday, April 11, 2013

ये वाइल्ड फेंटेसिस (Wild Fantasies)



ये वाइल्ड फेंटेसिस
और उसमे सिर्फ तुम
सच में, ढाती है कहर !

अस्पताल का
बेड न. 26, वार्ड न. 3
उसके जिस्म से जुड़ा मशीन
दिखा रहा था
सारे ग्राफ मौत के करीब ..
उसके बदन से जुड़े थे ढेरों पाइप
जिसमें से जा रहा था ब्लड,
फूड पाइप भी थी जुड़ी 
आंखो के सामने धुंधला दृश्य
पावर शायद होगा +15 या +16
पर डाक्टर का आश्वासन
जिंदगी अभी बाकी है ....

पर वो वाइल्ड फेंटेसिस
जिसमे थी सिर्फ तुम ! तुम !
एक कातिल मुस्कुराहट के साथ!
और फिर
10-12 दिन से एडमिट रोगी ..
जिस्म हो गया उसका
ठंडा-निस्तेज-निर्विकार !

उफ़्फ़ !! ओ कातिल हसीना......




29 comments:

अरुण चन्द्र रॉय said...

BHAYANK FANTASY...

Vibha Rani Shrivastava said...

रोंगटे खड़े हो गए ........

सदा said...

शब्‍दश: एक आकृति ... सामने सजीव हो उठी

Dimple Kapoor said...

(Y)...uff vo fantasy ..

ranjana bhatia said...

शब्दचित्र उभर आया पढ़ते हुए ..कुछ अलग है यह ..

expression said...

ये फेंटेसी है या नाईट मेयर !!!!

अनु

Aditi Poonam said...

रोंगटे खड़े हो गए सच ही....

vandana gupta said...

ये कैसी फ़ैंटेसी …………ऐसे डराते हैं क्या ?

vandana gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (13 -4-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

प्रवीण पाण्डेय said...
This comment has been removed by the author.
प्रवीण पाण्डेय said...

रोमांचित करता स्वप्न

Dr.J.P.Tiwari said...

क्या कहें इसे? करुना आनन चाहती है, आ नहीं पाती. भयानक तो नहीं कहेंगे इसे लेकिन वह हावी है और एक अजीब सा विम्ब सोचती है है. मुकेश जी यहाँ तो पहचान करनेवाले लाद्खादा जायेंगे. ऐसी परीक्षा न लो यार. चित्र कितना भायक लगी रखी है, यहाँ दया उमड़ती है तो सिहरन भी. कौन सा रस इसमें कहा जाय इसी सोच में पड़ा हुआ हूँ.

Dr.J.P.Tiwari said...

क्या कहें इसे? करुना आनन चाहती है, आ नहीं पाती. भयानक तो नहीं कहेंगे इसे लेकिन वह हावी है और एक अजीब सा विम्ब सोचती है है. मुकेश जी यहाँ तो पहचान करनेवाले लाद्खादा जायेंगे. ऐसी परीक्षा न लो यार. चित्र कितना भायक लगी रखी है, यहाँ दया उमड़ती है तो सिहरन भी. कौन सा रस इसमें कहा जाय इसी सोच में पड़ा हुआ हूँ.

Pallavi saxena said...

इसे पढ़कर एक अस्पताल का एक दृश्य सा उभरकर आरहा है सामने... :)

शालिनी कौशिक said...

भावात्मक अभिव्यक्ति dara diya aapne to . आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें नरेन्द्र से नारीन्द्र तक .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-1

shikha varshney said...

ये क्या था ..... :0

Aziz Jaunpuri said...

uda di need meri aap ne kyun?

उपासना सियाग said...

बहुत बढ़िया

Neelima sharrma said...

Anokha shabd chitr

अजय कुमार झा said...

ई फ़ैंटेसी है या फ़ैंटेसी की ऐसी तैसी है जी :)

तुषार राज रस्तोगी said...

बहुत सुन्दर लेखन | पढ़कर आनंद आया और पता चला के क़िबला फंतासी ऐसी भी होती हैं | आप ज़रूर अनोखे हैं तभी ऐसी अनोखी फंतासी सोचते हैं हुज़ूर | आशा है आपकी मनोकामना पूरी हो और आप अपने लेखन से ऐसे ही हमे कृतार्थ करते रहेंगे | आभार


कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

एक कातिलाना अंदाज़ ... क्या है ये सब ?

Shalini Rastogi said...

ऐसी फैंटेसी ..उफ़ तौबा!

yashoda agrawal said...

डर लगता है

Brijesh Singh said...

A scene from a Horror movie!
Please visit-
http://voice-brijesh.blogspot.com

Kailash Sharma said...

डरावना ख्वाब, पर सुन्दर शब्द चित्र ...

रचना त्यागी 'आभा' said...

वाह !! कुछ हटके !! :-)

Pratibha Verma said...

बेहतरीन रचना
पधारें "आँसुओं के मोती"

Kaustubhi Creations said...

बहुत ही सुदर अभिव्यक्ति |
http://utkarshita.blogspot.in/