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Friday, January 20, 2012

''आभासी मैं''


चेहरे पे ब्रश से फैलाता


शेविंग क्रीम..

तेजी से चलता हाथ

आफिस जाने के जल्दी

सामने आईने में

दिखता अक्स...

ओह !!

आज अनायास

टकरा गयीं नज़रें

दिखे ..दो चेहरे..

शुरू होगई

आपस में बात

एक तो ''मैं'' ही था

और..!!!

एक ''आभासी मैं''...!!

.

मैंने कहा

आधी से ज्यादा जिंदगी गयी बीत...

वो बोला...

हुंह! अभी आधी जिंदगी पड़ी है मित्र...

मैंने कहा..

.....तो क्या हुआ? क्या कर लिया?

क्या कर पाउँगा..?

उत्सुकता से पूछा उसने ..

बहुत जल्दी है तुम्हें...??

क्या नहीं कर पाया? सिर्फ ये तो बता?

पढ़ लिया उसने

मेरे चेहरे पर

मेरा जवाब..और हताशा भी

मुझे खुद से थी बहुत सी उम्मीदें...

थे खालिस अपने सपने..

जुडी..थी जिनसे अपनों की उम्मीदें..

कहीं खोती चली गए...

जिंदगी के दोराहें में.....



वो हंसा... बेवकूफ इंसान!!

सपने, उम्मीदें, आवश्यकता,...

पूरे होने का नहीं होता पैमाना..

होती है सिर्फ सुन्तुष्टि

होती है सिर्फ खुशियों की महक..

आँखे बंद कर के सोच

फिर होगा अनुभव

कितना कुछ पाया..

क्या शाम को घर पहुचते ही

नहीं करती स्वागत

कुछ चमचमाहट भरी आँखे..(

क्या कभी किसी मित्र ने

तुम्हें देख, फेरा चेहरा..??

नहीं न..........

ऐसी थी उम्मीद कभी?

यही तुने पाया .

कम है क्या??

खुश रहना सीख..



अब तक कट चुकी थी दाढ़ी

''आभासी मैं'' से

फिर मिलने का वादा ..

आईने में दिखा

अपने ही अक्स में

कुछ नया सा..अनोखा आकर्षण

थोड़ी ज्यादा चमक..

थोडा ज्यादा विश्वास

क्योंकि आभासी चेहरे ने

आईने के ओट से..

मुझे दिखा दी थी

मेरी ही अपरमित क्षमताओं की पोटली

और जगा दी थी मुझमें

फिर से उम्मीद

बहुत सारे उम्मीद...
 

76 comments:

Akhilesh said...

बहुत सुन्दर भाव ...

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत बढ़िया सर!


सादर

रश्मि प्रभा... said...

आभासी मैं .... सच ही कहता जाता है

ऋता शेखर मधु said...

क्योंकि आभासी चेहरे ने
आईने के ओट से..
मुझे दिखा दी थी
मेरी ही अपरमित क्षमताओं की पोटली
और जगा दी थी मुझमें
फिर से उम्मीद

क्षमताएँ दिख जाएँ और उम्मीद जगी रहे..इससे अच्छी बात तो हो ही नहीं सकती,बहुत सुंदर रचना|

कुश्वंश said...

बेहतरी काव्य बधाई

संजय भास्कर said...

शुरू होगई

आपस में बात

एक तो ''मैं'' ही था

और..!!!

एक ''आभासी मैं''...!!

बहुत सुंदर...मन के सीधे सच्चे भाव उकेरे हैं आपने.....

कौशल किशोर said...

बहुत सुन्दर रचना..............

Pallavi said...

यूँ तो असल ज़िंदगी मे हर इंसान मुखौटे लगाये ही घूमता है मगर अक्सर जब आईने से सामना होता है तब आभासी "मैं" ही हमारा असली चहरा होता है। बहुत सुंदर काव्य!!! बहुत खूब ....

अरुण चन्द्र रॉय said...

गज़ब का विम्ब उठाया है मुकेश जी आपने .... बहुत बढ़िया कविता....

प्रवीण पाण्डेय said...

अपने से ऐसे ही बतिया लेना बड़ा आश्वस्त कर जाता है।

सुबीर रावत said...

अच्छी रचना. आभार ! ...... संतोष का अर्थ कितना लोग समझ सकते हैं भाई. और जिस दिन यह समझ में आ जायेगा वह दिन सबसे हसीन होगा.

ana said...

गहरे भाव लिए हुए आपकी कविता.....बहुत सुन्दर

sushma 'आहुति' said...

गहन अभिवयक्ति........

अनुपमा त्रिपाठी... said...

आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 21/1/2012 को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

गहरी बात, वाह !!!

vidya said...

बहुत बढ़िया...
खुद से खुद का संवाद...
बेहतरीन.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आभासी मैं ने सिखाया कैसे मिले संतुष्टि .. सुन्दर भाव

दर्शन कौर 'दर्शी' said...

कभी -कभी दिल की बात चेहरा पढ़ लेता हैं ..और सवाल -जवाब भी दे देता हैं ...और हम मानो सपने से जाग उठते हैं ..इक नई संभावनाओं के साथ ......

anju(anu) choudhary said...

आभासी सोच का सत्य ...सटीक

Arti jha... said...

waah bahut khubsurat aabhash dikha aapka.....behad hi sundar rachna......achha lga padh ke...sach kahe to humare sabse achhe aalochak or sabse bade prshanshak humri khud ki aabhasi hi hoti hai...or jo wo kahe ekdum sahi..........

सदा said...

वाह ...बहुत बढि़या।

शिवम् मिश्रा said...

अपने आप से मिलना सच में जरुरी होता है ... साथ साथ रोचक भी !

Er. सत्यम शिवम said...

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यही सच्चाई है.....हम आभासी हो गये है...बहुत ही सुंदरता से अपने भावों को प्रेषित किया है आपने...लाजवाब।

JAINA said...

Guzar Rahi Hai Zindagi Imtehan Ke Daur Se.
Ek Khatam Hua Toh Dusra Tayar Mila Hai. ...bhut hi badhiya

Dr. vandana singh said...

बहुत ही साधारण शब्दों में साधारण और दमदार बात कहने का क्या खूब शानदार तरीका है... अच्छा लगा भाव और अभिव्यक्ति...

Richa said...

hum zindagi ko badi badi uplabdhiyon me dhoondhte hain... magar asal me wo to choti choti baaton me panap rahi hoti hai...
bahut pyari rachna hai.

Richa said...

hum zindagi ko badi badi uplabdhiyon me dhoondhte hain... magar asal me wo to choti choti baaton me panap rahi hoti hai...
bahut pyari rachna hai.

shashi purwar said...

हमारा अस्क ही हमारा सच्चा दोस्त होता है ... हमारा ही आइना . रोज एक नयी चेतना , नयी उम्मीद का दिया दिखता हुआ ..दिल में जोश जगाता हुआ . कोई इसे आधा गिलास भरा समझता है , तो कोई आधा खाली समझता है .........पर फिर भी हमारा आभास बहुत प्यारा होता है ... अच्छी रचना . बधाई . पढ़ा कर मुस्कान आई ..............:)

Dr.Nidhi Tandon said...

जीवन की रोजमर्रा चीज़ में से निकाल के खूबसूरत रचना.

दिगम्बर नासवा said...

खुद से खुद की गुफ्तागू ... मजेदार रही ...

shikha varshney said...

संतुष्टि सदा सुखी.
सुन्दर भाव हैं कविता के.

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

राजा दशरथ ने भी दर्पण देखा था

Mukesh Kumar Sinha said...

Shweta Agarwal:
GOOD NOON........Aabhasi mein....Zindagi ka sach bayaan ho gaya.....bahut badhiya likha hai aapne Mukeshji....Insaan ko Zindagi mein har haal mein khush rehna chahiye...yahi bataya hai aapne apni is rachna mein.

matia poonam said...

आईने में दिखा

अपने ही अक्स में

कुछ नया सा..अनोखा आकर्षण

थोड़ी ज्यादा चमक..

थोडा ज्यादा विश्वास...........sach hai jab chehra -mohra sudhar jaata hai .vyaktitv nikhar ke aata hai .aatm-vishavaas bad jaata hai ...abhaaasi kuchh nayi ummeed de jaata hai.......pm

shashi mittal said...

ayena le ke sanwarne ki zaroorat kya hai
bheerh mein tum ko guzarne ki zaroorat kya hai

band aankhon mein tere husn ke jalwe raqsan
aur naqaboon mein chupane ki zaroorat kya hai..:):):)

mukesh ji jis din khud ko insan pahchan jata hai us din uske pas duniya ki sab se badi dolat aa jati hai..

UNKNOWN said...

youn to ye ek aam bat ho gai hai jo bahot sari kitabo aur kavyo me dekhi jati hai per jis tarah apne ise krambaddha tarike se aage badhya aur jeevan k barikiyoun se ru-b-ru karaya ye kabil-e-taarif hai......bahot umda aur uccha koti ka.......

डॉ. जेन्नी शबनम said...

जीवन की सत्ता में 'मैं' और 'आभासी मैं' का सच बहुत ख़ूबसूरती से लिखा और जिया है, बधाई मुकेश.

Rahul Singh said...

सच का आइना, आइने का सच.

Neelima said...

मुझे खुद से थी बहुत सी उम्मीदें...

थे खालिस अपने सपने..

जुडी..थी जिनसे अपनों की उम्मीदें..

कहीं खोती चली गए...

जिंदगी के दोराहें में.....बहुत सुन्दर रचना..............

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

अच्छा होता है कभी कभी खुद से बतियाना.. आभासी तो होता ही नहीं कुछ, सब वास्तविक है.. और जो वास्तविक है वो कभी गलत राह नहीं दिखाता, ख़ास कर तब जब वो आप का अपना अक्स हो!!
बहुत ही खूबसूरती से मन का दर्पण दिखाया है!!

तिलक राज कपूर said...

Great!

Minakshi Pant said...

सुन्दर भाव से सजी खूबसूरत रचना |

वाणी गीत said...

कभी आईना तो कभी कोई मित्र या अनजान भी हमारी साधारणता को असाधारण बना जाता है !
प्रेरक भावाभिव्यक्ति!

Udan Tashtari said...

आभासी मैं ही बेहतर जी रहा है अभी तो...उम्दा सोच!

राजेश उत्‍साही said...

विचार सशक्‍त है,कविता कमजोर।

वन्दना said...

तभी कहते हैं दर्पण झूठ नही बोलता………सुन्दर भाव्।

Atul Shrivastava said...

खुद में खुद की तलाश करने पर ही पता चलता है जीवन में क्‍या खोया.... क्‍या पाया।
सुंदर रचना।
गहरे अहसास।

सूत्रधार said...

आपके इस उत्‍कृष्‍ठ लेखन के लिए आभार ।

Kailash Sharma said...

कभी कभी अपने आप से बात करना भी बहुत कुछ सीख दे जाता है...बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

gurmeet said...

बेहतरीन ... आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भरी हुई बेहद उम्दा रचना .
" क्योंकि आभासी चेहरे ने आईने के ओट से..मुझे दिखा दी थी
मेरी ही अपरमित क्षमताओं की पोटली और जगा दी थी मुझमें
फिर से उम्मीद ...बहुत सारे उम्मीद..


वरना अक्सर आईने में खुद को खोजने में ही डर लगता है की कही मेरा ही अक्स मुझसे पूछ ना बैठे .. "बता तू कौन है ???

JAINA said...

Dekha hai zindagi ko kuch itna qarib se
chehare tamam lagane lage hain ajeeb se........BHUT HI UMDA SOCH MERE DOST

pravesh soni said...

आभासी चेहरा ...संतोष की राह समझाता हुआ ,अपनी क्षमताओ से परिचय करवाता हुआ ...जीवन को सकरात्मकता की और बढ़ने के लिए प्रेरित करता हुआ ,इस चेहरे का आभास प्रत्येक इंसान को होना चाहिए ....अच्छी रचना के लिए बधाई

Mamta Bajpai said...

वाह ...कितनी सकारात्मक सोच है

mita said...

saral seedhi bhasha me jeevan ka saar rakh diya da.... bahut hi pyari si rachna hai....

मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली said...

bahut khoob...prernadayi rachna

S.N SHUKLA said...

बहुत ख़ूबसूरत , आभार.

मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" पर भी पधारने का कष्ट करें, आभारी होऊंगा.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

क्या बात है!!! सुन्दर विमर्श.

वन्दना said...

आपके ब्लोग की चर्चा गर्भनाल पत्रिका मे भी है और यहाँ भी है देखिये लिंक ………http://redrose-vandana.blogspot.com

mahendra verma said...

आभासी ‘मैं‘ ने वास्तविकता से परिचय कराया.......
कितनी खूबसूरती से आपने बहुत गहरी बात कह दी...! !

Mukesh Kumar Sinha said...

Punam Sinha: kabhi kabhi khud se bhi milna sukhad hota hai....! ham hamesha doosaron se hi milne mein hi lage rahte hain.......! sukhad aashcharya.....! kabhi to nazar milao...dosaron se kahte hain.....apne se bhi to nazar milaao......
22 hours ago · UnlikeLike · 2

Mukesh Kumar Sinha said...

Shalini Gupta: bhaiya bahut bahut bahut pyari kavita..apne hume positive thinking di hai...aur aapki pic's bete ke saath bahut sunder..father-son relationship bahut gehri dikhai pad rahi hai..ye rishta aise hi bana rahe
21 hours ago · UnlikeLike · 2

Mukesh Kumar Sinha said...

Anand Dwivedi: bahut sari nayi ummeedon ke liye dil se bahut sari shubhkamnaayen mukesh !
bahut hi sundar kavita...dwand ko tumne bakgoobi darshaya hai.
20 hours ago · UnlikeLike ·

Mukesh Kumar Sinha said...

Shubhra Majumdar: आईने के ओट से..मुझे दिखा दी थी
मेरी ही अपरमित क्षमताओं की पोटली
और जगा दी थी मुझमेंफिर से उम्मीदबहुत सारे उम्मीद....Bahut khoob
20 hours ago · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Riya Love: sukar ha aapko kisi councellor ki jarurat nahi padi ...abhasi chehre ne hi positivity la di .......councellor ki fees bacha di .......hadd h aap ka aabhasi b kanjoosh nikla ....:DDDD
kavita acchi lagi padhne me ....q ki ye koi kavita hi nahi thi ye to aap biti thi :)))))

19 hours ago · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Roli Bindal Lath: kya kar liya ab tak, kya pa liya ab tak.....ye to wo nanha chehra bayan kar hi raha hai bhaiya, jo apke chehre ke sath yahan dikh raha hai aur usi chehre me jhankta wo chehra bhi jo aapke jeevan se juda hai......in sbahi chehron ki khushi bhi ek pyari dharohar hai ab tak ki adhi umr ki ......aur inke sath apke ujjwal bhavishy ki dher sari shubhkamnayen
16 hours ago · UnlikeLike · 2

Mukesh Kumar Sinha said...

Shweta Agarwal: Aabhasi mein....Zindagi ka sach bayaan ho gaya.....bahut badhiya likha hai aapne Mukeshji....Insaan ko Zindagi mein har haal mein khush rehna chahiye...yahi bataya hai aapne apni is rachna mein.
15 hours ago · UnlikeLike · 2

Mukesh Kumar Sinha said...

Archana Chaoji: एक लाईन पूरी कविता की जान ..जिसके लिए आभार --"क्या नहीं कर पाया? सिर्फ ये तो बता? " आभासी का एक प्रश्न ....जीवन में चमक दे गया ..शुक्रिया
2 hours ago · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Ravi S Prasad: अपने ही अक्स में

कुछ नया सा..अनोखा आकर्षण....Bas aise hi jagmagate rahiye :)
14 hours ago · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Vijaya Mishra वाह बहुत खूब ..
आधी से ज्यादा जिंदगी गयी बीत...

वो बोला...

... हुंह! अभी आधी जिंदगी पड़ी है मित्र...

मैंने कहा..

.....तो क्या हुआ? क्या कर लिया?
...See more
17 hours ago · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Kavita Rathi: Dushman ka double role...waise ye dusra wala samajhdar hai..
17 hours ago · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Sunita Tiwari: wah wah..............amazing......
18 hours ago · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Chanda Jaiswal: waah ...bada hi sundar varnan Mukesh jee
21 hours ago · UnlikeLike · 1

Mahesh Barmate said...

बहुत खूब...
देरी से आने के लिए क्षमा...
मेरे ब्लॉग पे आपका स्वागत है...

http://mymaahi.blogspot.in/2012/02/blog-post.html

Neelam said...

jise abhaas hota hai wo satya hi kehta hai... bahut sunder bhaav liye sunder rachna. badhaayi Mukesh ji.

Vijay Kumar Sappatti said...

कुछ कुछ मेरा सा .. अपना सा ..