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Tuesday, July 26, 2011

"क्वालिटी ऑफ़ लाइफ"



























कर रहे थे मेहनत
जी रहे थे कुछ रोटियों के साथ..
जो कभी कभी होती
थी बिना सब्जी के साथ...
पर रात की नींद 
होती थी गहरी
होती थी
रंग बिरंगे सपने के साथ 
पर इन्ही सुनहरे सपनो ने
फिर उकसाया
मेहनत की कमाई
महीने में एक बार मिलता वेतन
नहीं दे पायेगा..
ऐश से भरी जिंदगी
कैसे पाओगे
"क्वालिटी ऑफ़ लाइफ" 

क्या करोगे तो 
पा जाओगे ऐसा जीवन
कि हर सांसारिक सुख
हो जाये हासिल
जिसकी हो तमन्ना!!

चाहत थी बड़ी 
पर कोशिश में नहीं था दम
चाहिए था धन..
इसलिए किया 
जीवन मूल्यों से खिलवाड़ 
लिप्त हो गए
करने लगे भ्रष्टाचार
लगाई सरकारी खजाने में
घुसपैठ
हो गए वो सब अपने
जिसके देखे थे सपने...
पर जो न मिल पाया
वो था चैन
उड़ गयी थी घर कि शांति
फिर नहीं देख पा रहा था सपना
क्यूंकि नींद भी तो उड़ गयी थी अपनी .

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ 
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत..............


79 comments:

दर्शन कौर' दर्शी ' said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ चुकी थी चेहरे कि रंगत............?????.

एक अच्छे जीवन को जीने के लिए पैसो की आवश्कता तो होती हैं ..पर अपनी आत्मा को मारकर,अपने मन की शांति को भंग करके, जीने से क्या फायदा ???
ऐसी क्वालिटी लाइफ किस काम की .......

anu said...

वाह......क्या लिखा आज तुमने मुकेश ...बहुत खूब..उम्दा...
बधाई के हक़दार हो आज .....
चैन की नींद के लिए ....आत्मा का जागे रहना जरुरी है ..

शालिनी कौशिक said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत..............
sahi kaha mukesh ji ye to hota hi hai jab ham kisi aprapy ki aur bhagte hain tab .bahut sundar bhavabhivyakti badhai

अरुण चन्द्र रॉय said...

आधुनिक भौतिकवादी जीवन प्रवृत्ति पर सुन्दर चिंतन करती कविता... बढ़िया !

Er. सत्यम शिवम said...

very nice..bhut achaa likha hai aapne:)

संजय भास्कर said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ पाने कि चाहतने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगतउड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत..............
क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
उफ्फ! बहुत गहरी बात कह गये हैं आप

संजय भास्कर said...

कमाल ......लीक से हटकर , आप अपनी बात समझाने में कामयाब रहे हैं मुकेश जी ! शुभकामनायें !!

वन्दना said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ…………गहन चिन्तन का समावेश किया है और एक सच को उकेरा है…………इस उम्दा रचना के लिये हार्दिक बधाई मुकेश्।

दिगम्बर नासवा said...

क्वालिटी ऑफ लाइफ केवल पैसों से नहीं होती ... अच्छा सन्देश देती है आपकी रचना मुकेश जी ...

Mukesh Kumar Sinha said...

@Darshan jee...ham jo kahen, lekin har ki jarurat quality of life...beshak uske karan sapne udd jate hain...!
@Anu... aisa lagta hai aaj khuch khas umda laga tumhe:) dhanyawad!
@Shalini, Arun jee, Satyam......thanx!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सटीक!
बहुत उम्दा!

PRIYANKA RATHORE said...

bahut khoob...aabhar...

manu shrivastav said...

bahut sahi baat likhi hai apane

manu shrivastav said...

bahut sahi likha hai aapne

kshama said...

पर जो न मिल पाया
वो था चैन
उड़ गयी थी घर कि शांति
फिर नहीं देख पा रहा था सपना
क्यूंकि नींद भी तो उड़ गयी थी अपनी .
Hmmm......zindagee khwab bhee dikhatee hai aur neende bhee udatee hai!

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत सच कहा आपने, साध्य का सुख साधन में ही ढल जाता है।

वीना said...

सही कहा है...पर आत्मा को मारकर कुछ हासिल भी हुआ तो क्या फायदा...जीवन तो आत्मा के साथ है...
बहुत सुंदर...

अल्पना वर्मा said...

'क्वालिटी ऑफ लाइफ' का यह भी एक पहलू है ,एक सच है मगर इस सच को समझना कितने लोग चाहते हैं?
अच्छे विचार हैं कविता में.

sushma 'आहुति' said...

जिन्दगी के सच से रूबरू करा दिया आपने...

ZEAL said...

क्या करोगे तो
पा जाओगे ऐसा जीवन
कि हर सांसारिक सुख
हो जाये हासिल
जिसकी हो तमन्ना!!

bahut sundar rachna

.

madhavi said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ----महीने में एक बार मिलता वेतन
नहीं दे पायेगा..
ऐश से भरी जिंदगी
कैसे पाओगे
"क्वालिटी ऑफ़ लाइफ" बहुत अच्छा लिखा है मुकेश जी जिन्दगी की सच्चाई लिखी है hmmmmmmmm

Dr (Miss) Sharad Singh said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत.

बहुत सही...यही हो रहा है आजकल....

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') said...

जिंदगी के सच को बखूबी बयां किया है आपने।

............
प्रेम एक दलदल है..
’चोंच में आकाश’ समा लेने की जिद।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर रचना प्रस्तुत की है आपने!

रश्मि प्रभा... said...

क्वालिटी ऑफ लाइफ की परिभाषा बड़ी पेचीदी हो चली है....

Mukesh Kumar Sinha said...

@संजय भाई ....अच्छी लगती है आपकी कमेंट्स..
@वंदना जी...इतना गहन भी नहीं है...पर शुक्रिया...!
@दिगंबर सर...धन्यवाद्..
@डॉ. शास्त्री, प्रियंका , मनु ............धन्यवाद..

Dorothy said...

खूबसूरत रचना. आभार.
सादर,
डोरोथी.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

एक बेहतरीन कविता रचने के लिए बहुत बहुत ध्न्यवायद सर ।


सादर

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

ज़िंदगी को खूबसूरत बनने के लिए गलत धनद से पैसा कमाना ज़रूरी नहीं ..पर लोंग केवल दिखावा ज्यादा पसंद करते हैं ..

अच्छी प्रस्तुति

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

क्वालिटी ऑफ लाइफ के फेर में बंधुआ मजदूर बन गए हैं!!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत...........

सच है ...बिलकुल सच.... प्रासंगिक भाव लिए रचना

Babli said...

सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ उम्दा रचना लिखा है आपने !ज़बरदस्त प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

mridula pradhan said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत..............
bahut kadari likhi hai......ekdam samyik,bahut pasand aayee.

मनोज कुमार said...

शुष्क और नीरस हो रही इस
ज़िन्दगी को क्वालिटी से संवारिए
चार पल हंसी और ख़ुशी के
बीवी बच्चों के साथ गुज़ारिए!!

anilanjana said...

वक़्त के साथ कदम मिलाने ..बल्कि उससे आगे निकल जाने की मानसिकता नें ...quality of life...की परिभाषा ..को materialistic things तक ही सीमित कर लिया है...संस्कारों ,विचारों भावनाओं का ...संवेदनाओं का अवमूल्यन हो चुका है..क्यूंकि अपाहिज सोच..मात्र ..''रंग बिरंगे सपने के साथ ..सांसारिक सुख''..को ही सफल जीवन मान रहा है...काश..'' क्वालिटी ऑफ़ लाइफ पाने कि चाहत'' में अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को गम न होने दें...
एक गंभीर विषय..जो प्रबुद्ध वर्ग को कम से कम सोचने पे मजबूर करेगा ही...बधाई

Dr. vandana singh said...

सार गर्भित रचना...शब्द चयन मोहित कर गया विचार और सोच तो प्रभावक हैं ही..... आपकी परिपक्वता का बोध कराती रचना... बहुत खूब!!!

Babli said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ...आभार ।

mahendra srivastava said...

क्या बात है
बहुत सुंदर

Mukesh Kumar Sinha said...

by email:
Indu Puri to me
show details 3:53 PM (1 hour ago)
baba! blog pr comment post nhi ho rha.ye lo

' baba! apni kavita me tumne us soch ko hawaa di hai jo vyakti ko sochne pr majboor krta hai.yh sthiti hr vyakti ke mn me vichar paida krti hai wo kya kre kya na kre?ek taraf wo dekhta hai beimani se kma kr log sampann jiwn jiite hain aur ek taraf imaandaari se uska mhina bhi bahut mushkil se ktataa hai.aise me apni aatma ko girwi rakh kr wo sb kuchh haasil kr lene ko galat jante hue bhii galat nhi manta.maine aaj tk kisi imaandaar vyakti ko(midium class ke) ko us oonchai pr nhi dekha.kintu............isme koi shk nhi ek imaandaar vyakti me itna aatm vishvaas hota hai ki..... hjaaron be-imaan usse khauf khaate hain. imaandaari me ek sukun hai.uski aankhon me ek chmak hoti hai wo nidar hota hai.duniya ki koi baat use bhybheet nhi krti.
baba!hm jaison ke liye yhi paryaapt hai.sapne aur mn to chaand ko paa lena chahta hai.pr....
hmari imaandari ne hme ek achchha sukun bhra jiwn jiine kaabil to bnaya hai n? bs bahut hai.hmare bchche yogya bn jaaye....ishwr imaandari ka fl deta hai aisa na hota to sb beimaan bn chuke hote ha ha ha '

कविता रावत said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ चुकी थी चेहरे कि रंगत...
...sabkuch aachha-achha hamesha mere liye ho..isi ke chakkar mein chehre kee rangat kab ud jaati hai pata hi nahi chalta...bahut badiya aadhunikta kee andhi daud mein daudte bhagte logon ko samjhti prastuti..aabhar!

सुनीता शानू said...

आज फ़िर खेली है हमने लिंक्स के साथ छुपमछुपाई चर्चा में आज नई पुरानी हलचल

अनुपमा त्रिपाठी... said...

bahut badhia ..

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !

Udan Tashtari said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत..............


-सच कहती रचना!!!

डॉ. जेन्नी शबनम said...

सही कहा आज के ज़माने के हिसाब से क्वालिटी ऑफ़ लाइफ पाना बड़ा मुश्किल है, ज़मीर बेच दो तो शान्ति, सपना वो भी गायब, इसलिए ज़मीर साथ है तो सब है. बहुत अच्छी विचारशील रचना, बधाई मुकेश.

Mukesh Kumar Sinha said...

@क्षमा जी...अच्छा लगा आपका कमेन्ट.
@@प्रवीण जी, आपके एक पंक्ति का कमेन्ट क्या कहने हैं, उसके...:)
@धन्यवाद् अल्पना जी, वीणा जी, सुषमा, डॉ. दिवा ...:)
@शुक्रिया माधवी, डॉ. शरद, जाकिर भाई, डोरथी , यशवंत.....
@ रश्मि दी., संगीता दी ..बहुत देर कर दी आपने...:डी
@ बड़े भैया......प्रणाम!
@डॉ. मोनिका, मृदुला जी, व बबली हमारा शुक्रिया स्वीकार करें..
@मनोज सर, बहुत सही कहा आपने
@अंजना दी, हम जो भी कहने, सच कहूँ हम सब इस लाइफ को पाने के लिए भाग रहे हैं....:(

Mukesh Kumar Sinha said...

Brajrani Mishra:

bahut achhi rachana.

Maheshwari kaneri said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ…………गहन चिन्तन का समावेश किया है..सार्थक लेख...

मीनाक्षी said...

हमारी ज़िन्दगी किसी की चाहत होगी.... हमें किसी और की ज़िन्दगी की चाहत..... क़्वालिटी ऑफ लाइफ़ पाने की चाहत का कोई अंत नहीं...

वाणी गीत said...

क्या मुकेश तुम भी ...कहा देख ली तुमने भ्रष्टाचारियों के चेहरे की उडी रंगत ?? उनकी क्वालिटी लाइफ वही है , इसलिए वे उसी में खुश और परमसंतुष्ट होते हैं ...

अपनी आत्मा को नहीं मार पाने वाले आप हम जैसे लोग अपने मुताबिक क्वालिटी लाइफ जीते हैं ...हमारे पास जो है , जैसा है, मेहनत का है ...हमारी आत्मसंतुष्टि इसमें है ...

अपना अपना नजरिया सबका !

Babli said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com

kase kahun?by kavita verma said...

quality of life pane ki jugat me jindagi ka sukun kho dena ...sach ghate ka souda hai.....sunder rachna...

Ehsaas said...

bahut achhi soch..bahut chha lekhan...


http://teri-galatfahmi.blogspot.com/

ज्योति सिंह said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत..............
bahut sundar ,darshan ji ke vicharo se main bhi sahmat hoon .daudne par yahi haal hota hai .

KCF said...

आपका स्वागत है यहाँ !
----------------------------
हम रोज़ एक मुद्दा उठाएंगे !

सतीश सक्सेना said...

बहुत खूब....
शुभकामनायें !!

निवेदिता said...

मुकेश ,देर से आयी हूँ पढ़ने .(
बहुत अच्छा लिखा .... और उससे भी अच्छा सोचा ..... शुभकामनायें !!!

प्रतीक माहेश्वरी said...

आहा क्या सही बयां किया है आपने..
लोग इसी चक्कर में अपना ईमान भी दांव पर लगा देते हैं..
पैसे हैं पर चैन नहीं.. ऐसी ज़िन्दगी, ज़िन्दगी कहाँ?

पी के शर्मा said...

hi,,your pos is very good

***Punam*** said...

क्वालिटी लाइफ के चक्कर में लोग अपने संस्कारों,अपने उसूलों,अपने परिवार और खुद अपनों की परिभाषा भूलते जा रहे हैं...कुछ भी कर गुज़र जाना उनकी फितरत में शामिल होता जा रहा है....बहुत खूब. !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
आज के चर्चा मंच पर भी आपकी चर्चा है!

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') said...

आरज़ू चाँद सी निखर जाए,
जिंदगी रौशनी से भर जाए,
बारिशें हों वहाँ पे खुशियों की,
जिस तरफ आपकी नज़र जाए।
जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
------
नमक इश्‍क का हो या..
इसी बहाने बन गया- एक और मील का पत्‍थर।

संजय भास्कर said...

जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

संजय भास्कर said...

Belated happy b'day ..
have loads of fun.

Many many happy returns of the day !!

संजय भास्कर said...

जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाइयां एवं शुभकामनाएं।

संजय भास्कर said...

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें ....आप जीवन में सभी प्रकार की खुशियाँ हासिल करें यही कामना है ....!

संजय भास्कर said...

बहुत बहुत मुबारका जी....

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर प्रभावशाली प्रस्तुति| जन्मदिन की ढ़ेरो शुभकामनाएं|

POOJA... said...

waah...
zindagi ki jaddo-jahad yahi hoti hai... kitne sanjeeda vishya ko itne achhe se varnit kar diya aapne...

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH said...

सार्थक!
आशीष
--
मैंगो शेक!!!

manu shrivastav said...

क्वालिटी ऑफ लाइफ
को पाने के जद्दोजहद में बीत जाती है ज़िन्दगी ,
ज़िन्दगी के अंत में क्वालिटी मिलती जरुर है , बाकिर


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मेरे ब्लॉग पे आपका स्वागत है
ड्रैकुला को खून चाहिए, कृपया डोनेट करिये! पार्ट-1
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आशा जोगळेकर said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत
ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत
उड़ा चुकी थी चेहरे कि रंगत..............

पैसा आवश्यक तो है पर आत्मा को मार कर कदापि नही ।

मेरे भाव said...

आज के जीवन के आपाधापी का गहन विश्लेषण है यह कविता...

Vibha Rani Shrivastava said...

उड़ गयी थी घर कि शांति ,फिर नहीं देख पा रहा था सपना
क्यूंकि नींद भी तो उड़ गयी थी अपनी ,क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत ने उड़ा दी थी चेहरे कि रंगत ,

"क्योकि"
करने लगे भ्रष्टाचार,लगाई सरकारी खजाने में घुसपैठ
हो गए वो सब अपने,जिसके देखे थे सपने...

अब दुःख क्यों.... ??

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

आज 21/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

vidya said...

बहुत खूब...
एक सार्थक लेखन..

सादर.

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पाने कि चाहत ने ही बंठा ढार कर दिया है...
अच्छी रचना...

पंछी said...

Quality of Life needs Quality of Thoughts...nice post :)