जिंदगी की राहें

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Wednesday, August 7, 2019

सावन-भादों

ब्लॉगर ऑफ द इयर के उपविजेता का अवार्ड 

तुम्हारी अनुपस्थिति में
है न,
सावन-भादो
बादल

बारिश
बूँदें !
पर,
हर जगह
चमकती-खनकती
तस्वीर
सिर्फ तुम्हारी !
पारदर्शी हो गयी हो क्या?
या
अपवर्तन के बाद
परावर्तित किरणों के समूह सी
ढ़ल जाती हो
तुम !!
बूँद और तुम
दोनों में
शायद है न
प्रिज्मीय गुण !!
तभी तो चमकती हो
छमकती भी हो
चमकते ही रहना
तुम !!



💝

7 comments:

Onkar said...

बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (09-08-2019) को "रिसता नासूर" (चर्चा अंक- 3422) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Sweta sinha said...

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार ९ अगस्त २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

sudha devrani said...

वाह!!!
बहुत सुन्दर...

Rohitas ghorela said...

बहोत प्यारी रचना

मन की वीणा said...

बहुत सार्थक सृजन ।

Prakash Sah said...

वाह! बिल्कुल ही भिन्न रचना। अद्भुत!