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Saturday, July 9, 2016

विंड चाइम




विंड चाइम की घंटियों सी
किचन से आती
तुम्हारी खनकती आवाज का जादू
साथ ही, तुम्हारा बनाया
ज्यादा दूध और 
कम चाय पत्ती वाली चाय का
बेवजह का शुरुर !!

सर चढ़ कर जब बोलता है !
तो बंद आँखों में तैरने लगते हैं
कविताओं के खिलखिलाते शव्द
बेशक लिख न पाऊं कविता !!
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कल इतवार की छुट्टी 
कल काफी बनाना :-)

2.

टूटे बटन के साथ हाफ पेंट
था एक हाथ से पकडे हुए
बह रही थी लार क्यूंकि
दूसरे हाथ की उँगलियाँ
थी लॉलीपॉप जकड़े हुए
हैं न सौंदर्य नैसर्गिक ??

(मुख़्तसर का शब्द: सौन्दर्य)
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4 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 11 जुलाई 2016 को लिंक की गई है............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (11-07-2016) को "बच्चों का संसार निराला" (चर्चा अंक-2400) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Upasna Siag said...

waah, bahut sundar

Onkar said...

सुन्दर अभिव्यक्ति