जिंदगी की राहें

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Thursday, July 23, 2015

भूतनी

from
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एक बूँद जिंदगी के
कह कर डाल देते हैं
बच्चे के मुंह में, पोलियो ड्राप
बेचारा नन्हा कसैले से स्वाद के साथ
जी उठता है ताजिंदगी के लिए !!

कुछ ऐसा ही
एक कश लिया था
'रेड एंड वाइट' के
बिना फ़िल्टर वाले सिगरेट का
बहुत अन्दर तक का
यह सोच कर कि
एक कश उसके नाम का !

और, फिर
जैसे ही उड़ाया, होंठ गोल कर के
धुएं का छल्ला
धूमकेतु सी "तुम"
बहती नजर आयी, दूर तक
एक बार तो सोचा
ये विक्रम वाली बेताल कैसे
बन गयी !! 'तुम'
धत !! भूतनी कही की!!

कुछ भी, कहीं भी, कैसे भी
उड़ कर पहुँच जाती हो तुम !!
भूतनी! भूतनी !! भूतनी !!
चिढ़ती रहो ........
मेरी तो कविता बन गयी न !!



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