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Tuesday, June 9, 2015

मोर



मैं
मेघ की आहट में
मचलता मोर
मेरे रंगीले सपने
जैसे मोर के सुनहले पंख!
मेरी उम्मीद
जैसे छोटा सा उसका
तिकोना चमकता मुकुट!
मेरी वास्तविकता
नाचते मोर के भद्दे पैर!
नजर पड़ी जैसे ही
उन कुरूप पैरों पर
रुक गया नाचना थिरकना
मैं ! एक मोर !
उम्मीद सपने और वास्तविकता के साथ !!
________________________
मैं मोर नहीं उसका भद्दा पैर !!


2 comments:

Arshiya Ali said...

सचमुच, मोर के जीवन का यह एक दुखद पहलू है, जिसे आपने बहुत खूबसूरत ढंग से उजागर किया है। बधाई।
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लज़ीज़ खाना: जी ललचाए, रहा न जाए!!

Onkar said...

वाह, कमाल की रचना