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Tuesday, March 18, 2014

मृत्यु



काश ! वतन के लिए

हो पाता शहीद

फिर चरकुटठे काफिन में

लायी जाती ....... !!

मेरा शरीर

अगरबती व लोबान के सुगंध में

फूल-मालाओं से प्रदीप्त होता

शायद, कुछ टोपियाँ भी झुकती

आंखे तो नम होती ही ॥ !!


पर लग रहा

किसी भेड़िये के आतंक से

डर कर, हो जाऊंगा शिथिल

फिर वो नोच लेगा बोटी बोटी

कहीं आत्मा भी न मर जाए

क्योंकि फिर

मरे हुए जानवर सा

बदबू देगा ........ मेरा शरीर !!


पता नहीं !!

भविष्य का ???




साथ में, वेब मैगजीन साहित्य रागिनी में मेरा साक्षात्कार पढ़ें, मुझे अच्छा लगेगा ! 

16 comments:

Aparna S Bhagat said...

hum aam naagrikon ke jeevan mein aise asankhya 'kash' hain.. kya kije....... seedhe dil se nikli abhivyakti mitr...

expression said...

:-(

क्या कहूँ.......
चलो जीवन को और सुन्दर बनायें.....अपनी वैल्यू खुद बढायें.

अनु

Kailash Sharma said...

बहुत मर्मस्पर्शी रचना...

shikha varshney said...

पहले जी कर दिखाएँ फिर सोचेंगे मौत का।
प्रभावी रचना।

अभिषेक कुमार अभी said...

मर्मस्पर्शी रचना.

Shalini Kaushik said...

bhavatmak abhivyakti .happy holi .

parul chandra said...

भावपूर्ण..

Asha Saxena said...

जो जीवन मिले उसे ही यदि सकारथ करें तो मृत्यु
जहां हो जैदी हो आत्मा पर बोझ निश्चित न रहेगा |आत्मा मरेगी नहीं यही सोच हो तो जीवन खुशहाल होगा |

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (19-03-2014) को समाचार आरोग्य, करे यह चर्चा रविकर : चर्चा मंच 1556 पर भी है!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Aditi Poonam said...

देखिये न देश के लिए जो शहीद हुए थे....उनके
क्या हाल थे, स्वजनों तक अपने अंतिम संस्कार
के लिए पहुँचने के लिए न जाने कितना इंतजार करना पड़ा होगा..और उन स्वजनों को जो कुछ सहना पड़ा होगा ...इश्वर ही जनता होगा ...
(अभी हाल ही में हुए नक्सली हमले के सन्दर्भ में )

Aditi Poonam said...

देखिये न देश के लिए जो शहीद हुए थे....उनके
क्या हाल थे, स्वजनों तक अपने अंतिम संस्कार
के लिए पहुँचने के लिए न जाने कितना इंतजार करना पड़ा होगा..और उन स्वजनों को जो कुछ सहना पड़ा होगा ...इश्वर ही जनता होगा ...
(अभी हाल ही में हुए नक्सली हमले के सन्दर्भ में )

Aditi Poonam said...

देखिये न देश के लिए जो शहीद हुए थे....उनके
क्या हाल थे, स्वजनों तक अपने अंतिम संस्कार
के लिए पहुँचने के लिए न जाने कितना इंतजार करना पड़ा होगा..और उन स्वजनों को जो कुछ सहना पड़ा होगा ...इश्वर ही जनता होगा ...
(अभी हाल ही में हुए नक्सली हमले के सन्दर्भ में )

Agyaat said...

बेहद प्रभावी अभिव्यक्ति ! मर्मस्पर्शी !

Upasna Siag said...

mout to aani hi hai uske liye pahle se hi soch ke kyun darna ...

प्रवीण पाण्डेय said...

जीवन का अन्तिम सत्य है, बस गौरवपूर्ण रहे यह।

निवेदिता श्रीवास्तव said...

:(