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Tuesday, January 21, 2014

वोटों के भिखारी



बड़ा पेट, भोला चेहरा
नेताजी का है सबसे जुदा चेहरा
जमीन से जुड़े कहे जाते थे
जब छुटभैये नेता के शुमार में आते थे
हर छोटे-बड़े कामों में व सभाओं में
जनता के बीच ये चेहरा नजर आता था
बेशक जनता का काम तब भी नहीं हो पाता था
पर नेताजी का अपनापन अपना सा लगता था
                 
धीरे धीरे बदला वक़्त, बदली किस्मत
बड़े नेताओं के कतार में, आ गए नेताजी
बड़े मंच से अब वो बड़े मुद्दे पर दहाड़ते  हैं
अगले क्रम के नेता कहलाते हैं
नेताजी के दिल में करुणा का कारख़ाना होता था
पर वक़्त आने पर उसका फाटक खुल नहीं पाता था

कहते  हैं जब लोग बड़े- पहुंचे हो जाते हैं
तो कीचड़ में पैर ज्यादा फंस जाते हैं
पर जनता को कौन समझाये, इतना तो बनता है
नेताजी के ऊपर पड़े भ्रष्टाचार की छींटो को
साफ करने हेतु पार्टी व सरकारी अमला लग जाता है
एक सूत्री कार्यक्रम फिर होता है,
हार नहीं मानेंगे, ठान लिया है, कर दिखाएंगे
नेताजी को झक सफ़ेद चमकाएंगे

यूं तो मुआ कैमरे का लेंस, इसको देख कर
नेताजी की आँखें, पहले चमचमा उठती थी
पर बदले चश्मे में वो आज तमतमा उठी थी
नेताजी, गुस्से में चिल्लाये, जांच करा लीजिये
पाक साफ हैं, हम, हमें न सीखाइए
नेताजी का आवेश, रुक नहीं पाता था
वैसे भी खुद की गलती पर हर कोई बरसता है

कभी कुछ हजारों की संपत्ति वाले फटेहाल नेताजी
अब बस कुछ अरबों में खेलते हाँ
लेकिन आज भी चुनाव आने पर
वोटों के लिए भिखारी बन तरसते हैं !!  




6 comments:

Anita said...

चित्र बहुत सुंदर हैं...नेताओं की यही कहानियाँ हैं जो राजनीति से भले लोगों को दूर रखती आई हैं पर अब समाज को बदलना होगा और राजनीति को स्वच्छ करना होगा

प्रवीण पाण्डेय said...

सबकी चाह एक है साधो

Aparna Sah said...

Netaji ki puri janampatri ka ullekh....kya khoob..lekin inke is rup ko ab badlana hoga...tabhi desh ka kalyan ho sakega..

abha khare said...

Sundar evam samaayik prastuti

Anju (Anu) Chaudhary said...

नेताओं और राजनीति पर बढ़िया कटाक्ष

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बहुत बढ़िया.