Followers

Wednesday, October 16, 2013

प्रेम-कविता




प्रेम! प्यार! इस ठहरती-दौड़ती जिंदगी में कभी एक बार तो आए मानो सितंबर महीने के मेंगों शावर की तरह.. या सुनहली साँझ के चमचमाते सूरज की तरह.. या फिर ऐसे समझो, मन में कोई प्रेम-कविता पनपी..... या फिर! अचानक मूसलाधार बारिश रेनिंग कैट्स एंड डॉग्स... बरसे प्यार, सिर्फ प्यार अंदर तक की संवेदनाएं हो जाएँ गीली ऐसे जैसे सूखे बंजर विस्तार में एक दम से उग आए.. जंगली घास... लहलहाए...... फिर?... फिर क्या ? जिंदगी! जीवन! प्यार! खुशी! सब आपस में गड्मगड.. फिर, बस रच जाएगा एक सुंदर “प्रेम-गीत”! और तब.. तब क्या ? तब भी हवाएँ सूखे पत्तों को उड़ा ले जायेंगी तब भी भौरें करेंगे पुष्प निषेचन पहले के तरह ही पर, प्रेम-गीत वो प्रेममय हो जाएगा बस इतना सा ही अंतर.. इसीलिए तो बस प्रेम! जीवन में एक बार तो आए ... बस एक बार!!



23 comments:

vandana gupta said...

yahi sabse mushkil hai aana mukesh

parul chandra said...

बहुत सुन्दर..

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर.

sushma 'आहुति' said...

बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

कालीपद प्रसाद said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति |
latest post महिषासुर बध (भाग २ )

Ajay Anand said...

अक्सर सोचता हूँ कोई इतना सहज सृजन कैसे कर सकता है. बहुत बढ़ियाँ.

अरुन शर्मा अनन्त said...

नमस्कार आपकी यह रचना वृहस्पतिवार (17-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत गहनता से लिखा है ... सुंदर रवहना ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत गहनता से लिखा है ... सुंदर रवहना ।

दिगम्बर नासवा said...

प्रेम तो बिखरा पड़ा है आस पास ... जीवन की गहरी नज़र उठायें देख लें ...
भावपूर्ण अभिव्यक्ति मुकेश जी ...

shikha varshney said...

प्यार ही प्यार बेशुमार :)

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

सुन्दर भाव... बधाई...

प्रवीण पाण्डेय said...

बस प्यार और क्या।

Meena Pathak said...

बहुत सुन्दर प्रेममय रचना

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

प्रेम रस में पगी सुंदर रचना...

Aparna Sah said...

Gar nahi aaya abtak to aa jayega jald hi....behud bhavpurn rachna....

नीलिमा शर्मा said...

sundar bhav

Upasna Siag said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 19/10/2013 को प्यार और वक्त...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 028 )
- पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

Aparna Khare said...

प्रेम हैं बारिश...जो जब चाहे बरस जाए..
प्रेम हैं ठंडक...कब दिल सिहर जाए पता नही..
प्रेम हैं गर्मी...ना जाने कब रगो मे...उष्मा भर जाए..
उम्दा रचना..

कलम से .... said...

प्रेमगीत बस जाये लेकर आकार
प्रेम तो बस प्रेम हो जाए एक बार
नव जीवन नव कोपल सा मन
नित नई जीवन कल्पना होती साकार

सुंदर रचना ...

वसुंधरा पाण्डेय said...

प्रेम..जीवन का आधार ....बहुत सुन्दर रचना...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

प्रेम को बहुत ही सुंदरता से व्याख्यायित किया है..

Nitish Tiwary said...

बहुत सुंदर रचना है मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है
http://iwillrocknow.blogspot.in/