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Monday, August 26, 2013

नर व मादा



एक स्त्री आ रही थी
पुरुष ने दूर से निहारा
उसका चेहरा
उसकी अदा
उसकी संरचना
उसकी खूबसूरती
उसकी कमर
उसका तनबदन !
और एक खूबसूरत स्त्री आ कर गुजर गई.......

एक पुरुष आ रहा था
वो आया और चला गया
स्त्री ने कहा/सोचा
इंसान अच्छा लगता है ...

एक ने देखा जिस्म
दूजे ने देखे भाव .......
नर व मादा की अलग पहचान

ऐसा ही होता है न........!!


26 comments:

राजेंद्र कुमार said...

बहुत सार्थक अभिव्यक्ति.....

प्रवीण पाण्डेय said...

आकर्षण भिन्नता के कारण होता है, पर लाता निकट है।

कालीपद प्रसाद said...

स्त्री पुरुष में अलग अलग हारमोंस हैं ,यही सोच ,भाव,आकर्षण पैदा करता है अलग अलग परिस्थिति में
latest post आभार !
latest post देश किधर जा रहा है ?

Dimple Kapoor said...

true ..ek aurat aur mard sach mein alag alag sochte hain ..

उपासना सियाग said...

हाँ ऐसा ही होता है ....

expression said...

सबकी अपनी अपनी नज़र...अपना अपना नजरिया......
:-)

अनु

नीलिमा शर्मा said...

soch ka farq hain

Reena Maurya said...

कई हद तक ऐसा ही है..
सबका अपना नजरिया..
बेहतरीन पोस्ट...
:-)

दीपक बाबा said...

आधुनिक युग में स्त्री भी बहुत कुछ सोच सकती है.... उसकी उंचाई, चाल, चेहरा मोहरा इत्यादि.


समानता का ज़माना है साहेब.

अरुण चन्द्र रॉय said...

adam and eve ke case me shayad ulta hua tha.. eve ke karan adam ko bhi dharti par aanaa pada tha... adhik nahi maaloom mujhe phir bhi...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अपना अपना नज़रिया है .... पुरुष की सोच सत्तात्मक होती है इसी लिए वो इस दृष्टि से देखता है ॥नारी भी पुरुष बल के आकर्षण से मुक्त नहीं हो पाती ...

अच्छी प्रस्तुति

Bhavna....The Feelings of Ur Heart said...

jab bhagwan ne dono ko alag hi banaya hai to soch bhi alag hi hogi na

Pallavi saxena said...

हमेशा ऐसा ही हो यह ज़रूरी तो नहीं :)अपना-अपना नज़रिया है।

sushma 'आहुति' said...

भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने....

Ranjana Verma said...

हर की अपनी अपनी पसंद ....

Anju (Anu) Chaudhary said...

बहुत सही सोच को पकड़ा है ....भाव फर्क है तभी तो वो नर और मादा के रूप में इस धरती पे है

दिगम्बर नासवा said...

सोच की भिन्नता को शब्दों में उतारा है ... बहुत खूब ...

Udan Tashtari said...

बहुत खूब ...

avanti singh said...

बेहतरीन पोस्ट..

Pummy said...

बहुत सटीक,सार्थक व सुंदर अभिव्यक्ति ....

( मुझे आप फेसबुक वाली सुनीता सनाढ्य पाण्डेय के नाम से जान पाएंगे...:)...)

Aparna Sah said...

prakriti hi yesi sanrachna ki hai......kitni khubsurat sabdon ,bhavon ke sath aapne abhiwyakti di hai.....wah.

Kailash Sharma said...

बहुत सार्थक और सुन्दर प्रस्तुति...

sushila said...

औरत और मर्द की सोच को बहुत खूबसूरती से बयां किया है आपने । बधाई !

Alaknanda Singh said...

एकदम सटीक आंकलन

ajay yadav said...

बहुत खूब ...अच्छी रचना |
फर्क तो हैं सोच में ...
नई पोस्ट-“जिम्मेदारियाँ..................... हैं ! तेरी मेहरबानियाँ....."

Reeta Tyagi said...

jee Mukesh je ऐसा ही होता है......