जिंदगी की राहें

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Tuesday, July 23, 2013

बोतल!



बोतल, बिसलरी या किसी अन्य मिनरल वाटर की 
बोतल, बियर या शराब के अलग अलग ब्रांड का
बोतल, विटामिन टौनिक या जीवन रक्षक दवा का
पर बोतल, थे सारी के सारी खाली, एक दम खाली !!

बोतल थे ढेरों, कबाड़ी वाले छोरे के
नाजुक कंधे पर, अटके बोरे मे ...

बोतल, जब होंगे, ये भरे व सीलबंद
तो होगा हर का अपना वजूद

बोतल, जिसके रैपर पर होगी एमआरपी
अंदर के द्रव की हैसियत होगी अलग अलग

बोतल का द्रव बचाता होगा जान
पर ये भी हो सकता है, हर ले प्राण

बोतल, है न इंसान की तरह ही एकदम
कोई संत, कोई हत्यारा, तो कोई विद्वान

बोतल! बोतल!! अब सिर्फ खाली बोतल
छोड़ो! उसके पुराने रूप को, इसके अंदर के द्रव को
बस देखो, आज, अभी, छोरा खुश है
कमजोर कंधे पर जिसके बोरी मे भरी है बोतल
आज उसके चेहरे पे चमक है
उसके जगमगाते सपने से भरी बोतल............



27 comments:

रविकर said...

उत्तम प्रस्तुति-
आभार आपका-

Anonymous said...

bahut badiya

recent post
अपने ब्लॉग की लिंक को दें rainbow color effect इस छोटे से कोड से

दिगंबर नासवा said...

ये इन्सान ही है जो बोतल को हर रूप में ढाल देता है ... वर्ना उस बेजान की क्या बिसात ...

Aparna Bhagat said...

बोतल में बंद विचारों.. बिम्बों.. के जिन्न को आपने आज़ाद कर दिया.. इश्वर करे वो नाज़ुक कन्धों वाला नन्हा छोरा अलादीन की किस्मत पा जाये...
रोज़मर्रा के जीवन से ले हुयी एक आम सी बात की भावुक प्रस्तुति.. बहुत भाई..

ANULATA RAJ NAIR said...

बढ़िया है जी....
बोतल में जिन्न का ज़िक्र भी कर देते.....

और हाँ बोतल स्त्रीलिंग शब्द है...मिनरल वाटर "का" बोतल कि जगह "की" बोतल लिखना था न...
:-)

अनु

Rajendra kumar said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (25-07-2013) को "ब्लॉग प्रसारण- 66,सावन के बहारों के साथ" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

रंजू भाटिया said...

बहुत बढ़िया लगी आपकी यह रचना ...बोतल भी ढली कविता में ..बढ़िया प्रयास :)

Ranjana verma said...

बढ़िया अभिव्यक्ति बोतल पर.....

Ranjana verma said...

बढ़िया अभिव्यक्ति बोतल पर.....

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत ही उत्तम रचना...
:-)

अज़ीज़ जौनपुरी said...

उत्तम प्रस्तुति

Anju (Anu) Chaudhary said...

वाह ...कितनी उत्तमता से बोतल और बोतल उठाने वाले की खुशी को परिभाषित कर दिया .....बहुत खूब

प्रवीण पाण्डेय said...

भरी बोतलें कितनी मँहगी,
खाली एकदम खाली खाली।

Pallavi saxena said...

बढ़िया पोस्ट... :)

ताऊ रामपुरिया said...

बोतल महिमा अपरंपार है. लाजवाब.

रामराम.

Manjusha negi said...

एक बढ़िया रचना

nayee dunia said...

जी हाँ बोतल के बिना काम भी नहीं चलता , बचपन में दूध की बोतल से ले कर बुढ़ापे में दवाई की बोतल तक ....

कालीपद "प्रसाद" said...


खाली बोतल और संवेदन हीन व्यक्ति एक जैसा है
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HARSHVARDHAN said...

आज की बुलेटिन जन्म दिवस : मनोज कुमार …. ब्लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट (रचना) को भी शामिल किया गया। सादर .... आभार।।

Unknown said...

सुन्दर ,सटीक और सार्थक . बधाई
सादर मदन .कभी यहाँ पर भी पधारें .
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

Anju said...
This comment has been removed by the author.
अनुपमा पाठक said...

बोतल और इंसान के बीच के साम्य को रेखांकित करती रचना...!

Unknown said...

band hai botal me insa,aur botal band hai

सदा said...

वाह ... बहुत ही बढिया

geet said...

बोतल भी कितने तरह की होते है एक बोतल पनि इंसान की जान बचा लेता है ओर बोलता वो इंसान का घर जला देते है बहुत खूब कविता है एक बहुत की अच्छे विचार

Unknown said...

ati uttam

Mahesh Barmate "Maahi" said...

bahut khoob