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Thursday, May 3, 2012

facebook पे हम !






विभिन्न लुभावनी


बदलती

display picture

के साथ

यहाँ नजर आते हैं हम ।

उस पर दिखते likes

की संख्या से

अपने को खुश करते हैं हम ।

पर आईने के सामने

खुद को खड़ा करने से

बचते हैं हम ।

घर पर trust को तोड़ कर

बहुतों बार विश्वास और भरोसे

से wall को सजाते हैं हम ।

मन व उसकी उड़ान को

key board से computer screen

तक बांध कर रखते हैं हम ।

काम बेशक कम हो

उपलब्धियों की लिस्ट से

खुद को सजाते हैं हम ।

Jeans, t-shirt मे बैठकर

कानो मे लगे earphone

पर Madonna की आवाज के साथ

भारतीय संस्कृति बचाने

की topic पर

हिस्सा लेते हैं हम ।

चमकती आंखे हैं

पर दृष्टि नहीं

दर्द एवं पीड़ा से

लुटपीट कर

अपने को सरताज बनाते हैं हम |

बेशक पूरी जिंदगी

एकाकीपन मे काट दी

दोस्ती पर हर दिन

नए शेर post करते हैं हम ।

गंदी नजर, घृणित सोच के साथ

हर समय female friend

के दिल पर

राज करने की कोशिश

करते हैं हम ।

अपनो से बेशक

मुंह फुलाए रहे

आभासी दुनिया मे

muaaaah.।

kisses..।

love...।

जैसे शब्द जताते हैं हम ।

स्वयं को

दो profile मे

बाँट कर

दोहरी जिंदगी जीने की कोशिश

करते हैं हम.।

अपने काले चेहरे को बेदाग

दिखाते हैं हम..।

ऐसे है हम.।

facebook पे हम ।

- मुकेश सिन्हा

53 comments:

वन्दना said...

सारे कच्चे बखिये उधेड दिये …………शानदार अभिव्यक्ति

शिवम् मिश्रा said...

बड़ी नुकीली है भई ... कब रखवाई धार ... ???
अब इस धार को बनाए रखिएगा ... जय हो !

अरुण चन्द्र रॉय said...

देखने में हास्य लग रहा है लेकिन सन्देश गंभीर है...

Vibha Rani Shrivastava said...

क्या बात है भाई ,बहुत खूब , कडवी पर सच्ची बात आपने लिख ही डाली .... !! नकाबपोशों को अपने चेहरे साफ-साफ दिख रहे होगें न .... ??

मुकेश पाण्डेय चन्दन said...

कड़वा सच फेसबुक का

sangita said...

फेसबुक की तो धज्जियाँ ही उड़ गईं ।मजा आया, पर यही सच्चाई है ।आभार ।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

यही है सोशल नेटवर्क...

वाणी गीत said...

क्या सच ...फेसबुक पर यह सब है ??

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

लगता है ज़्यादातर लोग ऐसा करते हैं .... :):) सच्चाई को कहती अच्छी प्रस्तुति

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

काफी कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी मित्रता सूची मे किस तरह मित्र हैं और किस तरह के मित्रों से हम संपर्क रखना पसंद करते हैं।

मुझे तो फेसबुक भी अभिव्यक्ति के एक सशक्त मंच के रूप मे नज़र आता है।

सादर

Gunjan said...

कभी दुनिया से गपशप की
कभी खुद को भुलाया है
ये ऐसी फेसबुक है
जिसे हमने बनाया है
जिसे देखूँ उसी चेहरे में
दिखता है खुदा मुझको
खुदा भी पूछे कैसे ये
जहाँ तुमने बनाया है

रविकर फैजाबादी said...

उफ़ |
सुन्दर प्रस्तुति ।

आभार ।।

Gunjan said...
This comment has been removed by the author.
kshama said...

kya baat kahee! Mai khud facebook pe to jatee nahee,lekin yahee sun rakha hai!

anilanjana said...

इस सादगी पे कौन न मर जाये ... लड़ते हैं और हाथमें तलवार भी नहीं .....बस..''facebook पे हम' ही हम हैं....कितनी साफगोई से अंतर्मन को शब्दों में उकेर दिया तुमने......अगर हम खुद से इमानदार हैं तो...ये दोहरापन ...इसलिए ..कभी अभिशप्त नहीं हो सकता.....न इस दुनिया में न उस दुनियामें ...विषय.की धार...और उससे उपजी आत्म ग्लानी...पीड़ा...इन प्रभावी ..आम से ..शब्दों में झलक रही है....उसके लिए तुम्हे ढेर सा प्यार मुकेश.....
बस एक बात और कहूँगी.. 'अति सर्वत्र वर्जते'.......बुराई है..तभी तो अच्छाई का महत्व है....और सब कुछ ...खुद के नियंत्रण में है...कम से कम..इन networking sites पे तो निश्चय ही............

Pallavi said...

यशवंत जी की बात से सहमत हूँ।

ऋता शेखर मधु said...

फेसबुक की यही सच्चाई है क्या...?
मैं फेसबुक पर नहीं हूँ...अब तो फेसबुक पर आने से पहले सोचना पड़ेगा:)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
उद्गारों के साथ में, अंकित करना भाव।।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

खरी खरी.....

Deepak Saini said...

बहुत दुखद सच्च्चाई है
बहुत सुन्दर पर्स्तुती

रश्मि प्रभा... said...

likes
की संख्या से
अपने को खुश करते हैं हम ।
पर आईने के सामने
खुद को खड़ा करने से
बचते हैं हम ।
..........
बेशक पूरी जिंदगी
एकाकीपन मे काट दी
दोस्ती पर हर दिन
नए शेर post करते हैं हम ।............ इतना ही रह गया है हाथ में , अनजाने चेहरों की वाहवाही में दिल को बहला रहे हैं हम

Unknown said...

Arre we r doublefaced people these days ,every person has some good as well as bad qualities bt it is upto him only what he wanna show public.But u have shown this reality so trully that its just awesome.not only on FB but we have to act differently at so many places in life.But d courage that u had shown here i mean to accept reality is very tough n u hav done it bravely!!!!
By ...Dimple Kapoor

दर्शन कौर 'दर्शी' said...

सांच को आंच नहीं ...सच कडवा जरुर हैं पर हैं तो यही सच्चाई ...स्त्री -पुरुष दोनों इसमें लिप्त हैं ...

दर्शन कौर 'दर्शी' said...
This comment has been removed by the author.
Anupama Tripathi said...

नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है फेस बुक पर ....
मुझे तो फायदा ही हुआ यहाँ और अच्छे लोगों से ही परिचय हुआ है ....यशवंत जी की बात से सहमत हूँ ....

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

सूचनार्थ: ब्लॉग4वार्ता के पाठकों के लिए खुशखबरी है कि वार्ता का प्रकाशन नित्य प्रिंट मीडिया में भी किया जा रहा है, जिससे चिट्ठाकारों को अधिक पाठक उपलब्ध हो सकें। 

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

kya baat.....kya baat....kya baat!!!

Dr. Vandana Singh said...

बहुत खूब लिखा है.... इंसानी जीवन का दोहरा पन पर बस फेस्बूक तक ही सीमित रहता तो भी ठीक था.... मगर असल जीवन मे...काश !!! .....

मुखौटे.... छुपाते हैं दर्दों ओ गम.... या दे देते हैं जीने के भरम.... सोचने वाली बात है....

rashmi ravija said...

आपने तो सारे फेस्बुकियों के एडिक्ट को उनका असली फेस दिखा दिया...:)

shikha varshney said...

बाप रे ..इतना धारदार..क्या बात है. आइना दिखाती कविता.जाने कितनो को अपने चेहरे दिख रहे होंगे:)

Archana said...

गुस्से में बहुत अच्छा दिखते हो..........नहीं .नहीं---- लिखते हो......गुस्से में बहुत अच्छा लिखते हो ...I like it.... No...No....I love it.......:-)...

Mukesh Kumar Sinha said...

Ritu Bhatia: Yeh asliyat hai....par kuch RISHTON ke Liye...JO yahan PAAYE hain.....JHOOT SABIT HOTA hai.....Mukesh Kumar Sinhaji....!!4 May at 10:29 · UnlikeLike · 3

Mukesh Kumar Sinha said...

Vijay Malhotra: Hum Fb Sabha ke self nominated ruling member ban gayen hain. Mukesh Fb vo pehle jaisa nahin raha. Bahut sahi likha hai. Mukesh Bhai. Abhi tou aage aage dekhiye kya hota hai.4 May at 10:50 · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Vijay Malhotra: Hum Fb Sabha ke self nominated ruling member ban gayen hain. Mukesh Fb vo pehle jaisa nahin raha. Bahut sahi likha hai. Mukesh Bhai. Abhi tou aage aage dekhiye kya hota hai.4 May at 10:50 · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

DrRakesh Ranjan: सम्हमत नहीं हु.......ये niरासवादी सोच आपकी अपनी हो सकती है .....................सच सच है चाहे वो जैस्सा हे हो....हम उन रिश्तो को कैसी भूल saktee है जो इस वजह से हे मिला है ..... do not mind........thanks for remembering me........be in contact in future also.......4 May at 12:46 · UnlikeLike · 3

Mukesh Kumar Sinha said...

Shashi Mittal: sabne sab kuchh kah diya tarif bhi kar di mai to itna hi kahugi apni pic kyu nahi lagai sath me .......maharaj ji ki jai karte wakt darshan bhi ho jate.....4 May at 15:44 · UnlikeLike · 2

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

एक ईमानदार स्वीकारोक्ति और यथार्थ का उदघाटन!! बहुत कुछ ऐसा ही है!! फिलहाल दूर हूँ इस किताब से!!

anju(anu) choudhary said...

फेसबुक का कड़वा सच ......सटीक शब्दों के साथ खूबसूरत अभिव्यक्ति

Reena Maurya said...

फेसबुक का सच....बहुत बढ़िया है...

सदा said...

फेसबुक पर तो नहीं हूँ ... आपको पढ़कर जाना इसका यह रूप भी ... आभार

Mukesh Kumar Sinha said...

Ranjan Sahai: बहुत अच्छे Mukesh भाई. आज के आभासी दुनिया की ये भी एक कड़वी सच्चाई है. ये कतई जरुरी नहीं कि ये सब पे लागू होती ही हो लेकिन कहीं न कहीं से सच तो है ही. सुन्दर लेखनी से निकली हुई एक और उत्कृष्ट रचना. ढेरों बधाई.........5 May at 00:30 · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Darshan Kaur Dhanoe: सांच को आंच नहीं ...सच कडवा जरुर हैं पर हैं तो यही सच्चाई ...स्त्री -पुरुष दोनों इसमें लिप्त हैं ...5 May at 10:18 · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Kadambari Goel Jain: waaaaaaaaaaaah ye to aap ne bahut hi kamaal likha hai Mukesh ......yathaarth bhi....... badhayi !! :)5 May at 12:16 · UnlikeLike · 1

Mukesh Kumar Sinha said...

Gunjan Shrivastava:
खुश तो बहुत थे हम ...
फेसबुक में घर बनाके
लाइक्स..खूब सारे पा के
पर अब...:))
आईना हँसता है
... चेहरे की दुनिया में
चेहरों से यकीन उठ गया
ये आईना भी तो
उल्टी तस्वीर दिखाता है
तो क्या अब आईना भी
गुनहगार हो गया
नहीं.....
कसूरवार हैं हम
क्योंकि ..
हम हैं ..कुछ अपने लिए
कुछ ज़माने के लिए..See more5 May at 17:51 · UnlikeLike · 3

pravesh soni said...

मुकेश जी बेशक आपने सच लिखा है ...लेकिन मै यह कहना चाहूंगी की हकीकी दुनिया मै भी तो इंसान डिप्लोमेटिक होकर ही जीता है यह तो आभासी दुनिया है ,बेशक अनजान चेहरे होते है लेकिन उनसे अपनेपन का अहसास जुड ही जाता है ....चूकीं हम तस्वीर का जेसा रूप देखना चाहते है वो वेसे ही भाव से भर जाती है .....मै यशवंत जी की बात से सहमत हू ....यह बात भी मायने रखती है की हम यहाँ रहकर साबित क्या करना चाहते है ....वेसे अपवाद हर चीज का होता है ..कुछ कम या कुछ ज्यादा लेकिन होता जरुर है ,...आपकी लेखनी को जरुर बधाई देना चाहूंगी ,कमाल का लिखती है .!

संजय @ मो सम कौन ? said...

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है..

Randhir Singh Suman said...

nice

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

क्या बात....क्या बात.....क्या बात....यह तो मेरी चिंता है....किसी और ने कैसे लिख डाली....??

डॉ. जेन्नी शबनम said...

फेसबुक का ये रूप दिमाग में तो था पर शब्द नहीं मिल पा रहा था. दोहरे प्रोफाइल वालों को अपना चेहरा ज़रूर नज़र आएगा. बहुत अच्छा वर्णन, बधाई मुकेश.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वाह सही वर्णन ..यही है सही तस्वीर .लफ्ज़ आपने दे दिए बेबाक बिंदास ..

BHAKTIFINVEST said...

कडवी पर सच्ची बात आपने लिख ही डाली .... !!

Ragini said...

क्या सत्य बखान किया है....गभीर बात हास्य का लेबल ....बहुत बढ़िया...

Ragini said...

क्या सत्य बखान किया है....गभीर बात हास्य का लेबल ....बहुत बढ़िया...