जिंदगी की राहें

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Wednesday, March 31, 2010

वो बचपन!!!



जाड़े की शाम
धुल धूसरित मैदान
बगल की खेत से
गेहूं के बालियों की सुगंध
और मेरे शरीर से निकलता दुर्गन्ध !
तीन दिनों से
मैंने नहीं किया था स्नान
ऐसा था बचपन महान !
.
दादी की लाड़
दादा का प्यार
माँ से जरुरत के लिए तकरार
पढाई के लिए पापा-चाचा की मार
खेलने के दौरान दोस्तों का झापड़
सर "जी" की छड़ी की बौछाड़
क्यूं नहीं भूल पाता वो बचपन!!
.
घर से स्कूल जाना
बस्ता संभालना
दूसरे हाथों से
निक्कर को ऊपर खींचे रहना
नाक कभी कभी रहती बहती
जैसे कहती, जाओ, मैं नहीं चुप रहती
फिर भी मैया कहती थी
मेरा राजा बेटा सबसे प्यारा ..
प्यारा था वो बचपन सलोना !
.
स्कूल का क्लास
मैडम के आने से पहले
मैं मस्ती में कर रह था अट्टहास
मैडम ने जैसे ही मुझसे कुछ पूछा
रुक गयी सांस
फिर भी उन दिनों की रुकी साँसें ,
देती हैं आज भी खुबसूरत अहसास !
वो बचपन!!
.
स्कूल की छुट्टी के समय की घंटी की टन टन
बस्ते के साथ
दौड़ना , उछलना ...
याद है, कैसे कैसे चंचल छिछोड़े
हरकत करता था बाल मन
सबके मन में
एक खास जगह बनाने की आस लिए
दावं, पेंच खेलता था बचपन
हाय वो बचपन!!
.
वो चंचल शरारतें
चंदामामा की लोरी
दूध की कटोरी
मिश्री की चोरी !
आज भी बहुत सुकून देता है
वो बचपन की यादें
वो यादगार बचपन!!!!!!

.

64 comments:

Prem Prakash said...

Accha likha hai, aur ek baat aur acchi lagi ki apna bachpan bhee bacchaon ko thaatee me diya hai
good.

Khushi said...
This comment has been removed by the author.
Khushi said...

"नाक कभी कभी रहती बहती
जैसे कहती, जाओ, मैं नहीं चुप रहती
फिर भी मैया कहती थी
मेरा राजा बेटा सबसे प्यारा
प्यारा था वो बचपन सलोना".. !

वाह मुकेशजी आपने
बहुत सरलता से बचपन के भोलेपन..,
माँ की ममता..,
पढाई का डर.,
अध्यापक की मार.,
शरारते और
उम्र के अल्हड़पन को व्यक्त किया है.
इतना ही नहीं आज उम्र के इस मोड़ पर
मुझे मेरे बचपन की याद दिला दी.. !
धन्यवाद ..!
स्वस्थ रहिये
खुश रहिये
ऐसे ही लिखते रहिये....खुशी*

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Dhanyawad Samvit jee aur Khushi jee!! aapki bhawnaon ko padh kar achchha laga!!

संत शर्मा said...

बचपन की यादें ताज़ा कर दी आपने | सरल और सुन्दर अभिव्यक्ति |

Himanshu said...

Wow.... Photo bahut achhi hai... aur aapki lines to .... :-)

रश्मि प्रभा... said...

bachpan ... haye kya din the wo bhi kya din the.......per dekho n aagat bachpan kis andaaj me khada hai......bahut pyaari tasweer

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Haan Di!! maine Yashu-Rishu ki tasveer hi laga di......issi bahane!!........:)

anilanjana said...

बचपन और उसकी यादें ..जैसे तपते जीवन पे पड़ती वर्षा की पहली फुआर.. सोंधी महक..न को अहम् न कोई न को भविष्य .. न कोई अतीत...no attachments...इसलिए मासूम निश्चिन्त ..तुम्हारी कविता यादों के गलियारे में ले गयी मुकेश...और अनायास ही हाथ बहती हुई नाक को पोछने के लिए उठ गए ..काश...की वो जिंदगी फिर से आ सके....एक बार फिर बधाई......

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Anjana Di!! agar iss kavita ne aapko itna apne bachpan se rubaru kara saka........to main apne ko bahut khush samajhta hoon!! thanx di!!

anilanjana said...

is kavita ka coverpage bhi tumne bahut hi pyara chuna hai mukesh......tumhara bachpan.inki massom tasveer mein dikh rahahai...olods of blessings

Anju (Anu) Chaudhary said...

bahut accha likha hai aapne...bachpan ki yaade taza hogayi.....मेरे ब्लॉग पे भी दस्तक दे आप ......

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Anu jee! Jarur!!....:)

Unknown said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

bahut accha likha hai bhaiya aapne.... saral aur madhur ...bachpan ka nischal prem,bhawnayein,sabkuch aapki ki kavita ras mai hai... kash bachpan kabhi laut aaye .....aapki kavita padhte hi mujhe meri priya kavita "bachpan" kavita subhadra kumari dwara likhi gayi yaad aa gayi ..kuch aise hai unki lines...

"baar-2 aati hai mujhko madhur yaad bachpan teri ,
gaya le gaya jeevan ki sabse mast khushi meri,
wo chinta-rahit khelna-khana,
wo phirna nirbhaya swajhand .
kaise bhoola ja sakta hai bachpan ka atulit aanand..."

kavita to bahut badi hai ..par aapne bas bachpan yaad dila diya....lekin hamara bachpan thoda alag tha.[:p]..beautiful lines ...as well as beautiful

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Thanx for beautiful comment DIPTI!! very very thanx!!........:)

ρяєєтii said...

bachpan ko apne shabdo main bahut sundar tarike se dhaala hai aapne...

har ek wo ehsaas jo bachpan main hue, aaj yaha padh mann phir machal utha, aur kahne laga Koi lauta de mere bachpan ke din....

putul said...

तुम्हारी कवितायें परंपरावाद , प्रगतिवाद और आधुनिकतावाद के जटिल परिवेश मैं संतुलित भूमि पर टिके रहने की सफल और सार्थक कोशिश का नतीजा है .
आवाजों के सन्नाटे और सन्नाटों की आवाजें पकड़ने की काबिलियत है तुममें.
संवेदना शून्य शहर मैं वर्षों जी कर भी बचपन का ऐसा जीवंत वर्णन कर पाने की क्षमता काम ही नजर आती है .....खूब लिखो और नाम कमाओ , दिल जीतो यही आशीष है ....

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Thanx Preeti!!........tumhare bachpan ki yaad........jarur lautegi.......:) apne beti me dekhna!!

Putul jee, aapne to bahut badi baat kah di..........kash main sach me aisa kuchh likh pata ....maine to bas apne mann kee yado ko sabd dene ki koshsh matr ki hai............anyway! thanx!!

!!अक्षय-मन!! said...

bahut sundarta se saheja hai bachpan ki yadon ko aapne kabil-e-tarif manna padega bade bhai ji....aapko mera shat shat prnaam

geet said...

hiiiiii
tumne bachpan ko bahut hi sundar word mai dikhya hai sath mai jo pic diya hai vo tu bahut hi achcha laga raha hai. bhagwan kare en bachcho ka bachpan yu hi bana rahe

Vandana Shrivastava said...

बहुत सुन्दर होता है बचपन.......इसीलिए इसकी यादें कभी हमारा साथ नहीं छोड़ती...दोनों बेटे बहुत प्यारे लग रहे हैं..!:)

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Thanx Akshay, Geet and Vandana jee!!

choti si kahani se said...

"kiye dhoodh ke kulle maine..."..subhadra kumari chauhan ki " mai bachpan ko dhoondh rahi thi...." yaad aa gayi bhai....ab isse jyada kya kahun....aur fir ye do nanhe shiatano ki chavi is kavita me char chand laga rhai hai.....madam ji ke poochne pe aapki sans ka rukna aur us ruki hui sas ki yad me ab vyakul hona.....masoom abhivyakti....dil ko choo gayi aapki panktiyan....

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Thanx Roli.........:)

वाणी गीत said...

बचपन के दिन भी क्या दिन थे ....
बचपन की याद दिला दी ...

हरकीरत ' हीर' said...

वो चंचल शरारतें
चंदामामा की लोरी
दूध की कटोरी
मिश्री की चोरी !
आज भी बहुत सुकून देता है

कैसे भुला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद .....!!

श्रद्धा जैन said...

he he aapne sari pol khol di........
mujhe laga main hi teen teen din nahi nahati thi
hahaha

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बचपन की मीठी यादें आईसी ही होती हैं...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

Urmi said...

बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! आपकी रचना पढ़कर मैं आपने बचपन के दिनों में चली गयी! कितने सुनहरे दिन थे वो - सुबह सुबह उठकर स्कूल जाना, दादा,दादी,मम्मी पापा सबका प्यार पाना, दोस्तों के साथ खेलना और न जाने कितना कुछ! अब वो सारी बातें यादें बनकर रह गयी! इस उम्दा और भावपूर्ण रचना के लिए बधाई!

adhuri baaten¤¤~~ said...

bahut baddhiya likha hai bhaia :) bachpan yaad aa gaya.... :)

मुकेश कुमार सिन्हा said...

धन्यवाद् वाणी, हरकीरत, श्रद्धा, संगीता जी, बबली और डॉ. अमित!! मैं तहे दिल से आप सबो को धन्यवाद् करता हूँ, जो आप सबो ने मेरे तुकबंदी के लिए समय निकला............:)

Anonymous said...

हाँ बचपन बहुत प्यारा होता है और लगभग सभी का एक सा .
वही खेल -खिलोने,वही शरारतें हर बात वही .
यही कारन है जब भी बचपन से सम्बन्ध रखने वाली कोई कविता या गीत पढते सुनते हैं,मन को भला लगता है.
आपकी कविता पढ़ी जैसे मेरा अपना बचपन आँखों के सामने आ खड़ा हुआ.
'इंजॉय'कीजिये अपने बचपन को अभी अपने बच्चों में बाद में उनके बच्चों में .
एक बच्चा हमारे भीतर एक बचपन हमारे आस पास हमेशा रहता है,उसे जीवंत कर दिया आपने. बधाई बोलू? क्यों बोलू भाई ?
अभी तो आपकी बेस्ट रचना आनी बाकि है ,एक स्पार्क देख रही हूँ यहीं से आप में.
हा हा हा
वो जलती रहे,आग बन जाये.

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dhanyawad Indu jee!! sabse pahle aapkee bebak rai ke liye, aur fir bhai ka darja dene ke liye!! aur ant me mere me wo SPARK hai ya nahi,lekin aapko dikhne ke liye..........kash aisa kuchh ho sake..........:)

"KaushiK" said...

bahut achhe sir....

bachpan ki tashvir ko bahut hi sachai se parstut kiya hai...

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Thanx Kaushik jee!!...:)

Unknown said...

IT IS EXCELLENT............WOH KAGAZ KI KASTHI WOH BARISH KA PAANI............

डॉ. जेन्नी शबनम said...

mukesh ji,
bahut pyari rachna hai bachpan see manbhaawan. par bachpan mein kaha lagta ki itna suhana hai ye din, ye to tab pata chalta jab jiwan ki kathinaiyan shuru hoti. par yaadon mein simta wo bachpan sukhad ehsaas de jata hai, jaise kadi dhoop mein thodi rahat...
shubhkaamnayen.

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Dhanywad........Rooma, Jeny Shabnam jee!!

रेखा श्रीवास्तव said...

मुकेशजी,

बचपन होता ही ऐसा है, की जो छूट गया वो याद रह जाता है और फिर ये कभी नहीं मिलता. सभी का बचपन ऐसा ही होता है और जब कोई अपने बचपन को दुहराता है तो लगता है की ये ही तो मेरा भी बचपन था.

मुकेश कुमार सिन्हा said...

haan Rakha jee.............yahi gujra bachpan, ham me khushiyon ki yaaden bhar jata hai.........:)

Unknown said...

amazing n heart touching.after reading it i went back in my childhood n remembered all those days we used to spend playing in mud getting dirty n hving fun v friends.y.kids are more pressurised under burdon of studies n there childhood is lost somewhere..........thanks god we r not from 21st century golden ........but really childhood days r golden days of life so every child has right to enjoy it to the fullest

मुकेश कुमार सिन्हा said...

thanx Charu for ur beautiful comment!!.........:)

पूनम श्रीवास्तव said...

aaapne to bachpan ka hu b- hu chitran kar diya hai.padh kar barbas hi bachpan ki oor khinchati chali gai.bahut hi achhi prastuti.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

bahut sundar rachna hai...kuch hamari bhi yaadein phir se ubhar ayi...

http://www.indranil-sail.blogspot.com/

मुकेश कुमार सिन्हा said...

thanx Indraneel.........jarur!!

मुकेश कुमार सिन्हा said...

thanx Indraneel.........jarur!!

सुनील गज्जाणी said...

"नाक कभी कभी रहती बहती
जैसे कहती, जाओ, मैं नहीं चुप रहती
फिर भी मैया कहती थी
मेरा राजा बेटा सबसे प्यारा
प्यारा था वो बचपन सलोना".. !

वाह मुकेशजी आपने
बहुत सरलता से बचपन के भोलेपन.., bahut sunder hai , bachpana to chahae kitna hi budda ho wo bhi zina cahta hai, sadhuwad

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

Mukesh ji bachapn se judi bate kafi nazuk aur rochak lagi,sari bachpan yaad aa gayi kuchh khate,meethe yadeno ki tazgi fir pichhe le gayi jo uamr ke ek padaw se pichhe chhut jata hai.....achhi abivaykti..

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Sunil jee and Rajnee ji, achchha laga aap dono ne hamari iss bachpan kee yaadon ko saraha!! dhanyawad!!

Rani Mishra said...

बचपन!!!! क्या कहू इस पर, दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊ, वो मैडम की डांट, वो मम्मी का लाड, वो सडको पर दोड़ना, वो गलियों में भागना, वो मम्मी का दूध की ग्लास ले कर पीछे पीछे आना, वो पापा से पैसो की जिद करना......
आज भी दिल मानाने को तयार नहीं की छुट गया वो बचपन.......
अब नहीं आएगा लौट कर वो बचपन.......
आपकी इस अभिव्यक्ति ने तो वही ला कर खड़ा कर दिया था, जैसे की मम्मी आवाज दे रही हो की रानी उठो बेटा स्कूल नहीं जाना क्या???
बहुत ही सुंदर और साधारण शब्दों में असाधारण अभिव्यक्ति की है आपने........

मुकेश कुमार सिन्हा said...

thanx Rani Mishra jee...:)

Apanatva said...

aap dil aur vivek dono se likhate hai aapne blog par aane ka nimantran diya tha aur dekhiye mai to follower hee ban gayee........

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dhanyawad!! waise aap apne followers list ko dekhen...:D

अजित गुप्ता का कोना said...

बहुत ही सारगर्भित रचना। आरामतलबी में बिताये बचपन में याद करने को कुछ नहीं होता लेकिन फक्‍कड जिन्‍दगी को याद करने का मजा ही कुछ और है।

मुकेश कुमार सिन्हा said...

aap sabke comments mere liye dharohar hain, aur main inko apne pass ta-jindagi rakhna chahta hoon...........sabko fir se dhanyawad!!!!

Anonymous said...

BAHUT KHUB LIKHA HAI...
sach mein woh anmol bachpan sabse khubsurat lamha tha zindagi ka..
bahut khub..
aapko padhkar achha laga ..
pehli baar aapke blog par aaya hoon...
aksar aata rahoonga...
regards.
http://i555.blogspot.com/

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dhanyawad sekhar suman jee!!

अरुणेश मिश्र said...

अनमोल समय की स्वर्णाभ स्मृतियोँ की रचना ।
अति सुन्दर ।

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dhanyawad Arunesh jee!!

Unknown said...

mukesh sir kitta befikra bachchpan tha na apka..pyaara pyaara sa bachpan..iske liye god ji ko thanku bola na aapne..aap aur mam dono working ho na..fir bhi yashu rishu k face se pata chal raha ki wo bhi aapke jaise hi masti aur shararatoun se bhara befikra bachpan gujar rahe..generally wking mumma papa k bachche log bachpan mei bhi mature nazar aate...kash mere mei bhi aapke jaisi writing skill hoti to kya baat hoti...maine chotu sa jealous feel kiya aapse es baat k liye...

मुकेश कुमार सिन्हा said...

thanz VINI..........very very thanx!!

Neelam said...

स्कूल का क्लास
मैडम के आने से पहले
मैं मस्ती में कर रह था अट्टहास
मैडम ने जैसे ही मुझसे कुछ पूछा
रुक गयी सांस
फिर भी उन दिनों की रुकी साँसें ,
देती हैं आज भी खुबसूरत अहसास !
वो बचपन!!
aapne bachpan ke sabhi ahsaason ko khoob achhe se kaha hai..badhai.

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Neelam!! mere ahsaason ko samajhne ke liye dhanyawad!!