जिंदगी की राहें

जिंदगी की राहें

Followers

Monday, November 30, 2009

~: फासला :~


दूरियां
हर एक से बना कर रखिये
अपनों के दरमियाँ भी
थोड़ा फासला तो रखिए
दोस्त या दुश्मन
की परख तो रखिये
दिल की किताब में
हर एक का हिसाब तो रखिये
.
जिंदगी
में है कई रंज-औ-गम
पर कुछ गमो को
हमराज बना कर तो रखिये
दोस्ती है
तो गुफ्त-गु और दिल-ऐ-बयां भी कीजिये
मगर
कुछ तो पर्दा भी रखिये
दिल है तो
गमो का बादल भी होगा
पर खुशियों के बरसात की उम्मीद
बरसा कर के तो रखिये
फिर कह रहा हूँ
दूरियां
हर एक से बना कर रखिये
अपनों के दरमियाँ भी
थोड़ा फासला तो रखिए
~मुकेश~



40 comments:

putul said...

sahi hai par hisab rakhne se rishte tootenge jyada ...........

aisa mujhe lagta hai.

ρяєєтii said...

कुछ रिश्ते इन सब हिसाब-किताब से परे होते है,
वहा फासला भी नजदीकियों से प्यारा लगता है,
कहते है न् "परखना मत, परखने से कोई अपना नहीं होता"...
सो हिसाब-किताब की बाते छोडिये और बस ख़ुशी हो या गम, मुस्कुराते रहे और बाटते रहे ...[:)]

रश्मि प्रभा... said...

तुम्हारी सोच, तुम्हारी कलम में ज़िन्दगी का सत्य परिलक्षित होता है
यूँ ही कहने का सिलसिला बनाये रखिये...........

Unknown said...

breathing space...living n working in a comfortable pace...wat else to ask for..
zindgi ka agar yahi falsafa..jumne ..bahut swabhavik rup se ..better say ..ungadh tareeke se likha hai mukesh..hum sab uskakuch ansh bhi apna lein to........bahut se samsyaon ka samadhan anayas hojayega


plz keep writing.....

Himanshu said...

Nice thoughts... keep it up...

GOPAL K.. MAI SHAYAR TO NAHI... said...

Nice Feelings

संतोष कुमार "प्यासा" said...

bahut khoob
badhaai

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

thoda fasla rishton ko majboot banata hai....bahut khoob..badhai

Vichar Kranti said...

कभी-कभी रिश्तों को परखना भी चाहिये, परन्तु ये भी हे की परखना मत परखने में कोई अपना नहीं होता लेकिन परिस्थिति के हिसाब से चलना चाहिये
वेसे आप ने बहुत अच्छा लिखा हे आप का बहुत बहुत धन्यवाद

Unknown said...

didi mai jah tak samjhti hoon....risato me tol mol nahi hona chahiye ...risate to dill se nibhaye jate hai n....or dill ke mamala ho to hisab kitab rakhana bahut mushkil hota hai ...

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dhanyawad.........aap sabo ko!! jinhone apne amulya rai di!!

Ankur Mishra "Yugal" said...

jindagi ki har ashfalta ka hisab rakhna jyada avashyak hai kyuki saflta to turant hi hishab de jati hai hisab to ashfalta ka nikalna hota hai.....................

एहसास said...

jindagee to waise hi chaho na chaho raahen juda kar deti hai,
har rishte ki paribhasha or uskee gehrayee bayaan kar deti hai!!
hum to maati k jev bhar putle hain,
ishara to uska hai, uski marzi hi hame mazboor kar deti hai!!

...mukesh bhaeeya kamaal ka likha hai aapne.....maannn gaye aakhir bhayee to hamare hi ho....!
keep writing bhaeeya...Hum Saath Saath hain!

...Aapka Ehsaas!

मुकेश कुमार सिन्हा said...

thanks mukul........itni pyari baat kahne ke liye...:)

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dhanyawad Ankur jee!!

डॉ. जेन्नी शबनम said...

मुकेश जी,
रश्मि जी के आमंत्रण के फलस्वरूप आपको पढ़ने का सुअवसर मिला, बहुत अच्छा लिखा है आपने| यूँ तो पूरी रचना बेहद सुन्दर है, परन्तु इन पंक्तियों में जीवन का सत्य है जिसे हर इंसान को समझना ज़रूरी है| ज़िन्दगी की ख़ूबसूरती तभी दिखेगी जब थोड़ा फासला बना रहे...
''दूरियाँ हर एक से बना कर रखिये
अपनों के दरमियाँ भी
थोड़ा फासला तो रखिए''
बहुत बधाई और शुभकामनायें!

Khare A said...

"faaslon ki kya baat karte ho gaurav,log pass hokar bhi doori banaye rakhte hai"

aapki kavita bahut achchi hai
likhte rahiye

Anonymous said...

kyo zindgi ki raah me mjboor ho gaye itne qareeb aaye ki hm door ho gaye'' ek geet hai ye
bashi bdr sahb ne likha hai -'' koi hath bhi na milayega jo gle miloge tpak se ,ye nye mijaz ka shar hai jara fasle se mila karo ''
aapki kavita inhi bhavo ko vyakt kar rahi hai,achchhi lagi ...
lucky ho rashmi didi ka aapne sr pr haath to hain
yahn to khud se hi ajnbi hain hm
bdhai

Ankur Mishra "Yugal" said...

Splended..........

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dhanyawad..........aap sabo ka utsahwardhan ke liye!!

Urmi said...

आपको और आपके परिवार को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

geet said...

bahut hi achcha soch lete hai aap pad kar bahut hi achcha mahsoos hua

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dhanyawad Babli aur Geeta jee!!

geet said...

mukeshji aapke sabhi kavita bahut achche hai.
Tamana Karte ho jin khushion ki woh khushiaan aapke kadmon me ho Bhagwan aapko Woh haqeeqat me de Jo socha aapne sapnon me ho

Asha Pandey ojha said...

दूरियां
हर एक से बना कर रखिये
अपनों के दरमियाँ भी
थोड़ा फासला तो रखिए
सच कहा आपने कुछ दूरियां तो अपनों के बीच भी जरुरी है ..वर्ण नजदीकियां ही एक दिन दूरी में बदल जाती है

Vandana Shrivastava said...

जिंदगी
में है कई रंज-औ-गम
पर कुछ गमो को
हमराज बना कर तो रखिये.....
bahut badiya.. :)kyunki kuch hamraz tau aise hone chahiye na jo taumr hamara saath na chodein :)

Gaurav Baranwal said...

Sir ......sahi kaha aap ne. Mayane kahi pada tha -"dusaro ke liye ak raj bankar rahna chahiye."

Gaurav Baranwal said...
This comment has been removed by the author.
Pallavi saxena said...

बहुत ही सुंदर भाव लिए सार्थक रचना...शुभकामनायें

अरुण चन्द्र रॉय said...

बहुत सुन्दर मुकेश जी

Manjusha negi said...

एक बेहतरीन गजल .........बेहद सार्थक

Bhavna....The Feelings of Ur Heart said...

speechless after reading this .... very true each and every sentence to follow in real life .... to maintain FASLE ....too good

विभा रानी श्रीवास्तव said...

इतने वर्षो के बाद आज इस रचना की याद तुम्हें क्यूँ आई
मैं नहीं जानती
मुझे इस रचना की बहुत जरूरत थी
सार्थक अभिव्यक्ति
ख़ुदा खैर करे ......

shalini rastogi said...

दोस्ती है
तो गुफ्त-गु और दिल-ऐ-बयां भी कीजिये
मगर
कुछ तो पर्दा भी रखिये
..... क्या बात है मुकेश जी , बहुत अच्छी बात कही है |

Shalini kaushik said...

बहुत सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति आभार मोदी व् मीडिया -उत्तराखंड त्रासदी से भी बड़ी आपदा
आप भी जानें संपत्ति का अधिकार -४.नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN

Aparna Bose said...

जिंदगी
में है कई रंज-औ-गम
पर कुछ गमो को
हमराज बना कर तो रखिये

.
दोस्ती है
तो गुफ्त-गु और दिल-ऐ-बयां भी कीजिये
मगर
कुछ तो पर्दा भी रखिये
.....बहुत सुंदर भाव

Rewa Tibrewal said...

umda soch...par kayi bar nahi ye possible ho nahi pata

Sadhana Vaid said...

बेहतरीन ख़याल और बेहतरीन प्रस्तुति ! बहुत सुंदर मुकेश जी !

nayee dunia said...

बहुत सुंदर

नीलिमा शर्मा said...

'दूरियाँ हर एक से बना कर रखिये
अपनों के दरमियाँ भी
थोड़ा फासला तो रखिए''सार्थक रचना