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Wednesday, June 25, 2008

कोख से बेटी की पुकार


मम्मा!

मुझे भी,

भैया की तरह,

इस चमकती दमकती दुनिया मैं आने तो दो......


मम्मा!

तुम स्वं बेटी हो

हम जैसी हो

तो क्यों न

बेटी की माँ बन कर देखो.....


मम्मा!!

माना की तुम्हे मामा के तरह

मिला नहीं प्यार

माना की जिंदगी के हर मोर पे

बेटी होने का सहा दर्द बारम्बार.........


मम्मा!!

पर कैसे एक जीवन दायिनी

बन सकती है जीवन हरिणी

कैसे तुम नहीं अपना सकती

अपनी भगिनी..........


मम्मा!

तुम दुर्गा हो, लक्ष्मी हो

हो तुम सरस्वती को रूप

तो फिर इस अबला के भ्रूण को

लेने तो न जीवन को स्वरुप .......


मम्मा!

तेरी कोख से

तेरी बेटी कर रही पुकार

जरुर अपनाना

पालन पोषण करना

फिर तेरी ये नेह

फैलाएगी दुनिया मैं प्यार.......

प्यार.....

42 comments:

abhishek said...
This comment has been removed by the author.
abhishek said...

Bahuit Hi umda likhi hai :)

No wrds to say :)

great job

रश्मि प्रभा said...

मम्मा!!
माना की तुम्हे मामा के तरह
मिला नहीं प्यार
माना की जिंदगी के हर मोड़ पे
बेटी होने का सहा दर्द बारम्बार.........
.............इन पंक्तियों के माध्यम से तुमने विषय को और स्पष्ट किया है.
क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि जो मिलता है,लीग उसे ही दुहराते हैं,
वक़्त को बदलने का सही प्रयास किया है-बहुत अच्छी रचना....

vandana said...

बहुत अच्छी रचना है मुकेश जी..!!

EHSAAS said...

bhaeeya abodh ke ehsaas ko utni hi masumiyat aur utne hi sahaz shabdon main kavita ke roop main sakaar kiya hai.......waastvik arthon main purn bhaav liye saarthak kavita jisme marmikta ka alankaran bhee hai......

.....anupam!
...Ehsaas!

Musings of June said...

@Mukesh

This attempt of yours is certainly worthy of high praise. It's good to see that people are waking up to this reality that the daughters are also to be considered equally significant in value like our sons.

A Kalpana chawla or a Sunita Williams or an Indira Nooyi or a Kiran Bedi made us all proud and were no less than any Son.The sooner Indians realize this the better.

Thanks for the beautiful message through this lovely poem and the lovely sketch.

PS. I may be condoned for not writing in Hindi, as most of you have done, since I lack the necessary tool. Nevertheless the language ought not to be a hindrance, when a social message has to be conveyed.

Mukesh Kumar Sinha said...

thanx to all! thanx!!

masoomshayer said...

padh ke achha laga aise hee likhet rahen

ANil

Sandeep S said...

great mukesh ji

betiyan hoti hi mahaan hein

Prem Prakash said...

bahut barhiya likha hai.

vastava main arthpoorn avam satyata ka put liye huye hai

Jindagi said...

mamma se pukar, pyari hai!!

sarita said...

Thats awesome!!!
now m ur fan :)
keep penning :)

Amma said...

इस दर्द की इससे बेहतर आवाज़ क्या हो सकती थी......
खुश रहो बेटा

Mukesh Kumar Sinha said...

धन्यवाद्!! अम्मा को प्रणाम !

ankit said...

AWESOM..wrote with core deep feelings..outstanding

Shree said...

Ati Uttam!! :)

geeta said...

bete hona tu garv ki baat hai mai bhi kese ki bete hu or aapke kavita pad kar mujhe lagta hai ki ab mujhe unka beta ban kar dikhana hai. esa kya hai jo sirf beta hi kar sakta hai ek bete naih kar sakte hai

Anand Dwivedi said...

waaaaah bhai.vicharo ki yah dhaar yun hi bani rahe!

anilanjana said...

india ..a country wich bows down in reverence to goodness..a country were MAA takes a spritual meaning . ..वहां ये पंक्तियाना ..माना की तुम्हे मामा के तरह
मिला नहीं प्यार..ये बताती है की अपना कहने को उसके पास कुछ भी नहीं...न अपना खून न अपना घर ..फिर बहार वालो से शिकायत कैसी ....हर ज़िम्मेदारी हर फ़र्ज़ बखूबी निभाती रही.. ज़िन्दगी जीने का हक़ खुद पे से गंवाती रही ..पर फिर भी ..हमेशा एक अस्वीकार्य का भाव.. बस कुछ पल ठहर के ..थोड़े से आंसू थोड़ी सी माथे पे शिकन ..और होगया ..ये है हमारी मानवीयता..पर अब दृश्य बदल रहेहैं ..मानसिकता बदल रही है ..कारन..शिक्षा और बढती जागरूकता ..u r very expressive mukesh..proper words at proper place ....god bless u n ur writing skill....

Mukesh Kumar Sinha said...

dhanyawad..........aap sabko!! aapki sarahana hame khushi aur fir se likhne ko prerit karti hai......:)

Mukesh Kumar Sinha said...

Anjana Di aapki baat sahi hai, lekin ye bhi sahi hai.........aaj bhi bharat me janani hi, janadayini hi, mrityudayini ban jaati hai.........aur iss Education ke karan aur jayda aisa ho raha hai, kyon ab sabo ko pata hai Utrasound ke through ham dekh pate hain ki garbh me pal raha sishu............ladka hai ya ladki..........

kuchh maa hi aisee hoti hai, jinke na chahte hui bhi uss garbh ka gala ghonta jata hai!! aadhiktar maayen bhi chahti hain, wo beta hi jane...........

waise ye tasveer badlegi, lekin kab kah nahi sakte

Kyonki ek aur baat, jis state me Education percentage achchha hai, wahan pe male/female ratio jayda hai............

DAISY D GR8 said...

i m speachless sir

ashish said...

waw kya bat hai........

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 22 -12 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज... क्या समझे ? नहीं समझे ? बुद्धू कहीं के ...!!

Mukesh Kumar Sinha said...

thanx sangeeta di:)

वन्दना said...

भ्रूण हत्या पर शानदार रचना।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही मार्मिक और बेहतरीन कविता।

सादर

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

तुम स्वं बेटी हो
हम जैसी हो
तो क्यों न
बेटी की माँ बन कर देखो.....

बहुत प्रभावशाली रचना...
सादर.

Pallavi said...
This comment has been removed by the author.
Pallavi said...

बहुत हे संवेदनशील एवं प्रभावशाली रचना भईया समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है :-)
http://aapki-pasand.blogspot.com/2011/12/blog-post_21.html

सदा said...

भावमय करते शब्‍दों का संगम है इस अभिव्‍यक्ति में ।

प्रतिभा सक्सेना said...

ओ मेरी बिटिया ,तेरी मम्मा लाचार है .उसके वश में होता तो तुझे धारण करने के गौरव से स्वयं को वंचित न करती !

ऋता शेखर 'मधु' said...

सामाजिक विडम्बना की मार्मिक प्रस्तुति...

दिलीप said...

behad maarmik...

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 20/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Madhuresh said...

बहुत अच्छी मार्मिक रचना, शुभकामनाएं!

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 19/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

Dr.vandana singh said...

शब्द शब्द से भाव छलकते.... एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर संवेदनशील रचना... आपकी कलम को सलाम!!!

Rewa said...

behad maarmik...

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत सुन्दर रचना..

दिल से जो भी मांगोगे वह ही मिलेगा, ये गणेश जी का दरबार है,
देवों के देव वक्रतुंडा महाकाया को अपने हर भक्त से प्यार है..
बोलो गणेश भगवान की जय ..

मेरी ओर से आपको एवं आपके परिवार के सदस्यों को श्री गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर सब को शुभ कामनाएं और प्रार्थना करता हूँ कि गणपति सब के मनोरथ सिद्ध करें एवं सबको बुद्धि, विद्या ओर बल प्रदान कर आप की चिंताएं दूर करें.....आप सबका सवाई सिंह आगरा

आप सभी को गणेश चतुर्थी की शुभ कामनाएं..सुगना फाउण्डेशन मेघलासियां

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

संवेदनशील विषयवस्तु पर उम्दा रचना |
मेरी नई पोस्ट:-
मेरा काव्य-पिटारा:बुलाया करो

Dimple Kapoor said...

Mukesh ji aapke blog pe apne ghar ki baat kahun ..acha nhi lag raha bt aaj bhi muje yad hai ..jab maine doosri beti ko janam diya tha to meri sis-in-law ne muje kaha ki tu apni mummy pe chli gayi hai ...tune bhi unki tarah do betion ko janam diya hai ...bhut ajeeb laga tha ki ek aurat hokar vo aise kaise baat kar sakte hain ...bt jo bhi ho ...muje khud pe garv hai ki maine 2 betion ko janam diya n unko bhut sneh diya ...:)