जिंदगी की राहें

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Monday, May 11, 2015

दो क्षणिका


खाली कनस्तर सी हो गयी
तुम्हारी स्मृतियाँ, झूठी - सच्ची
रखूं किसी अलमारी में, या
या, कबाड़ी वाले को ही न बेच दूं ??
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ऐसे ही एक ख्याल :)

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मेरी हथेली में
है कटी-फटी रेखाएँ
जीवन, भाग्य और प्रेम की
पर है सिर्फ एक
खुशियों का आभासी द्वीप
अंगूठे के नीचे
ठीक बाएं कोने पर !!
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उम्मीदें जवां हैं :)