जिंदगी की राहें

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Tuesday, February 5, 2019

बुशर्ट

ह्म्म्म!!
कड़क झक्क सफ़ेद
टंच बुशर्ट !! फीलिंग गुड !!
चुटकी भर रिवाइव पावडर
कुछ बूँद टिनोपाल व नील की
डलवा दी थी न !
कल पहन कर जब निकला था
था प्रसन्नचित
था पहना तने चमकते कॉलर के साथ
धुली सफ़ेद कमीज !!
दिन पूरा गुजरा
गरम ईर्ष्या व जलन भरा दिन
दर्द से लिपटी धूल के साथ
आलोचनाओं की कीचड़ को सहते हुए
हाँ, कुछ खुशियों के परफ्यूम की बूंदे भी
गिरी थी शर्ट पर !!
तभी तो रात तक
सफ़ेद से मटमैली हो गयी बुशर्ट !!
फिर भी मध्यमवर्गीय आदतें
दो दिन तो पहननी थी बुशर्ट !
जबकि कॉलर पर
हो गयी थी जमा
हर तरह की गन्दगी
दिखने लगी थी बदरंग !
कोई नही!!
स्नान कर , महा मृत्युंजय पाठ के साथ
लगा कर डीयों व उड़ेल कर पावडर
जब फिर से पहनी वही कमीज
तो, कॉलर के अन्दर का एक और अस्तर
चढ़ा दिया उसपर !!
अब तो जंच रहा हूँ न!
आखिर जीने के लिए
दोहरी जिंदगी जीनी ही पड़ती है यार!
कॉलर पर कॉलर की तरह !!
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बिहार में एक कहावत है
"ऊपर से फिट-फाट, अन्दर से मोकामा घाट"



5 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल गुरुवार (07-02-2019) को "प्रणय सप्ताह का आरम्भ" (चर्चा अंक-3240) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
पाश्चात्य प्रणय सप्ताह की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन शब्दों के भीतर छिपे विभिन्न सत्य : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

Aman Shrivastav said...

बढ़िया है

Anu Shukla said...

बहुत खूब ..
अद्भुत लेख!

Hindi Panda

Rahul said...

हाहा :)