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Wednesday, August 1, 2012

"दी", "दीदी" या "दिदिया" ....















रेशम की डोरी
अगर बांधा हो बहना ने
तो खुद ब खुद
बन जाता है रिश्ता
एक अटूट रिश्ता
प्यारे से "भाई व बहन"
के बीच का
जिसमे सिर्फ होती है
एक दुसरे के लिए दुआएं |
एक अदद डोरी
की यही है ताकत |
यही है रक्षा-बंधन!

लेकिन यहीं रिश्ता
यही प्यार
यही आशीर्वाद
मैंने पाया है 
उनसे भी 
जिनको मैंने
प्यार से, सम्मान से
सिर्फ कह पाया
"दी", "दीदी" या "दिदिया" ....
या जिन्होंने मुझे 
कहा है "भैया" !
.
जब भी मैंने सुने हैं 
उनके शब्द
उसमे छलकता है प्यार 
होती है 
दुआओं की बरसात
मैंने पाया है
उनसे अनमोल प्यार
और एक अलग सा सम्मान..
.
मेरी सारी बहना
जिनसे है खून का रिश्ता
या जिनके लिए
अन्दर से निकल पाई 
आवाज
ये ही मेरी हो सकती है 
"बहन"
उन सबको नमन!
दिल से नमन!
जिंदगी की ढेरों खुशियाँ
उनको समर्पण!!
बना रहे तुमसे
रक्षा बंधन !!
युग युग का बंधन !!
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