जिंदगी की राहें

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Wednesday, August 1, 2012

"दी", "दीदी" या "दिदिया" ....















रेशम की डोरी
अगर बांधा हो बहना ने
तो खुद ब खुद
बन जाता है रिश्ता
एक अटूट रिश्ता
प्यारे से "भाई व बहन"
के बीच का
जिसमे सिर्फ होती है
एक दुसरे के लिए दुआएं |
एक अदद डोरी
की यही है ताकत |
यही है रक्षा-बंधन!

लेकिन यहीं रिश्ता
यही प्यार
यही आशीर्वाद
मैंने पाया है 
उनसे भी 
जिनको मैंने
प्यार से, सम्मान से
सिर्फ कह पाया
"दी", "दीदी" या "दिदिया" ....
या जिन्होंने मुझे 
कहा है "भैया" !
.
जब भी मैंने सुने हैं 
उनके शब्द
उसमे छलकता है प्यार 
होती है 
दुआओं की बरसात
मैंने पाया है
उनसे अनमोल प्यार
और एक अलग सा सम्मान..
.
मेरी सारी बहना
जिनसे है खून का रिश्ता
या जिनके लिए
अन्दर से निकल पाई 
आवाज
ये ही मेरी हो सकती है 
"बहन"
उन सबको नमन!
दिल से नमन!
जिंदगी की ढेरों खुशियाँ
उनको समर्पण!!
बना रहे तुमसे
रक्षा बंधन !!
युग युग का बंधन !!

49 comments:

Unknown said...

सुन्दर काव्य रचना , सामयिक भी बधाई मनोज जी

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

दिल से मानना ही असल में रिश्ते की सही पहचान है .... बहुत खूबसूरत सोच और उतनी ही सुंदर रचना ।

अरुण चन्द्र रॉय said...

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामना... कविता बढ़िया बनी है... मन को छूती हुई

सदा said...

बना रहे तुमसे
रक्षा बंधन !!
युग युग का बंधन !!
मन को छूते शब्‍दों के साथ भावमय करती प्रस्‍तुति.. आप हमेशा ऐसे ही रहें अपनी सभी बहनों के लिए ...

शिवम् मिश्रा said...

जय हो महाराज ... बहुत खूब ... रक्षाबंधन की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !

ऋता शेखर 'मधु' said...

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ...
बहुत खूबसूरत और स्नेहपूर्ण उद्गार व्यक्त किया है|
सभी बहनों के ढेरों आशीष आपके साथ हैं|

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति....
आपको भी रक्षाबंधन की अनेकों शुभकामनाएं.

अनु

Archana Chaoji said...

मैं तुझसे लड़ती भी हूँ,
झगड़ती भी..
मैं तुझसे बड़ी भी हूँ
छोटी भी..
बाँधा है मैंने तुझको
शब्दों के बन्धन से...
महकता है ये रिश्ता
बिना ही चन्दन के
डोर ये ऐसी नहीं कि टूट जाए झट से..
चलो अब मुँह खोलो और मिठाई खाओ फट से..
ढेर सारे आशीष तुमको मेरे प्यारे भैया
अब चाहे "दी" कहो "दीदी" कहो या कहो "दिदिया"...

विभा रानी श्रीवास्तव said...

या जिन्होंने मुझे
कहा है "भैया" या "बबुआ"
नि:शब्द करती रचना .... !

vandan gupta said...

बेहद भाव पूर्ण ……रक्षाबंधन की शुभकामनायें।

sushmaa kumarri said...

भाई बहन के रिश्ते को बहुत खुबसूरत शब्दों में गढ़ा है अपने....

rashmi ravija said...

बहुत ही प्यारी और सुन्दर रचना..

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत सुन्दर और प्यारी रचना.....
आपको ढेर सारी शुभकामनाये :-)

प्रवीण पाण्डेय said...

सबको ही रक्षाबंधन की शुभकामनायें..

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

दिल से निकली हुई रचना!!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

पावन धागे सी प्यारी कविता ...शुभकामनायें

Mahi S said...

बहुत सुन्दर...रक्षाबंधन की शुभकामनाएं...

anilanjana said...

रक्षाबंधन भावनाओं और संवेदनाओं का बंधन . हमेशा प्यार, विश्वास और समर्पण का बंधन.... बहिन के लिए...अपनी दुआओं से... भाई..के आंगन को महकाए रखने का आश्वासन...सुख,स्वस्थ्य,समृधि से ..देहरी..हरी भारी..रहे रहे...जीवन भरा पूरा रहे... बस राइ भर सी इक्छा ही तो है......ऊपर वाला मान रक्खेगा ही रक्खेगा....दीर्घायु होइए.....सुख दीजिये...संतुष्टि से...भरे पुरे रहिये....और दी......को..अपने सुख दुःख में साझीदार बने का..अवसर देते रहिये...माथे पर चमकती रोली जितना प्यार..अक्षत दुलार के साथ..ढेर सारी दुआओं भारी जादू की झप्पी....hamesha ki tarah sadgi bhari sweekarokti ke liye dher sara pyaar...mukesh

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से आप सभी को रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाये | आपके इस खूबसूरत पोस्ट का एक कतरा हमने सहेज लिया है, एक आध्यात्मिक बंधन :- रक्षाबंधन - ब्लॉग बुलेटिन, के लिए, पाठक आपकी पोस्टों तक पहुंचें और आप उनकी पोस्टों तक, यही उद्देश्य है हमारा, उम्मीद है आपको निराशा नहीं होगी, टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें … धन्यवाद !

निवेदिता श्रीवास्तव said...

अब कभी भी अकेलापन नहीं लगेगा ..... -:)
मेरा ब्लॉग पढना तुम्हारे लिए ही लिखा है ... खुश रहो !!!

रश्मि प्रभा... said...

jiyolakh baras

हरकीरत ' हीर' said...

बना रहे तुमसे
रक्षा बंधन !!
युग युग का बंधन ...:))

रेखा श्रीवास्तव said...

ये रिश्ते सिर्फ मन से बनते हें और मन किसी भी बंधन में एक बार बांध जाता है तो फिर आजीवन बंधा रहता है. कितने भी दूर हो जाएँ फिर भी मन तो मनाता ही रहता है. बहुत सुंदर शब्दों में परिभाषित किया है इस प्यारे रिश्ते को. रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं !

रुनझुन said...

बहुत ही सुन्दर मन को छू लेने वाली रचना.... रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर मन को छूते भाव...रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
श्रावणी पर्व और रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Shweta Agarwal: Dil ka rishta atut hota hai aur behan bhayi ka rishta atut aur amulya....bahut hi mitthe aur sneh bhare shabdon ka tohfa diya hai aapne apni sabhi behno ko is rakhi par.....bahut bahut shubh kaamnayein aapko...:)
Yesterday at 16:17 · Edited · Unlike · 1

Udan Tashtari said...

रक्षाबंधन की शुभकामनायें।

Nityanand Gayen said...

बहुत सुंदर ....

बस्तर की अभिव्यक्ति जैसे कोई झरना said...

भारतीय उपमहाद्वीप की अनेक अनूठी परम्पराओं में से सर्वाधिक भावमय और अद्भुत पर्व है रक्षाबन्धन का। सभी बहनों को सादर नमन! शत-शत चरण वन्दन!!

Satish Saxena said...

इन दुआओं में बड़ी ताकत है ...
आपको शुभकामनायें !

वाणी गीत said...

राखी की अदृश्य डोर का यह बंधन बना रहे ! ...
शुभाशीष और शुभकामनायें !

संजय कुमार चौरसिया said...

पावन धागे सी प्यारी कविता ...शुभकामनायें

Vijay K Shrotryia said...

अच्छी कविता..... बधाई॥

***Punam*** said...

दिल का रिश्ता आजीब होता है...
दूर हो के भी पास रहता है...!!

भाई को ढेर सारी शुभकामनाएं आगत जीवन के लिए!
सुखी रहो....यह आशीर्वाद भी है और आदेश भी..!

Rahul said...

बहुत सुन्दर रचना... रक्षा बंधन का त्योहार अनमोल है...

डॉ. जेन्नी शबनम said...

मुकेश,
बहुत भावुक कविता. इस दिदिया की तरफ से बहुत आशीष. सदा खुश रहो.

Anju (Anu) Chaudhary said...

हर रिश्ते को बहुत खूबी से जीना जानते हों तुम मुकेश ....ईश्वर का आशीष तुम पर सदा बना रहे ....

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Shalini Gupta: bhai-bahan ka ye rishta aise hi kayam rahe..ishwar kare aappar kabhi koi mushqil na aaye..behnoke pyaar aur unki duaon ke saath aap hamesha aage badhte rahein..aapki khushhali aur tarraki ki duaon ke saath aaj kedin aapko yaad karte hue ye likh rahi hoon...hamesha khush rahiye bhaiya..aur is pyari si kavita ke liye bahut dhanyawad
Yesterday at 11:43 · Unlike · 1

मुकेश कुमार सिन्हा said...

झरोख़ा

मृगतृष्णा की दुनिया

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

.


मुकेश जी,
सुंदर सामयिक रचना के लिए आभार !


रक्षाबंधन की अनेकों शुभकामनाएं !

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा है रिश्ते दिल से भी होते हैं ... जो उतने ही मजबूत होते हैं दिटने खून के रिश्ते ....
रक्षा बंधन की बहुत बहुत बधाई ...

नीलिमा शर्मा said...

बहुत सुन्दर और प्यारी रचना....

प्रियंका गुप्ता said...

बहुत सुन्दर सोच है आपकी...। काश! समाज में वे लोग भी इस प्यारे और पवित्र बन्धन की ताकत महसूस करें जो ज़बान से तो किसी को बहन कह देंगे पर मन में गन्दगी भरे रहेंगे...।
आपकी खूबसूरत रचना और पवित्र सोच के लिए मेरी बधाई...।

प्रियंका गुप्ता

vijay kumar sappatti said...

मुकेश भाई , पढ़कर आँखे गीली हो गयी .. आगे क्या कहूँ ...

दिल से बधाई स्वीकार करे.

विजय कुमार
मेरे कहानी का ब्लॉग है : storiesbyvijay.blogspot.com

मेरी कविताओ का ब्लॉग है : poemsofvijay.blogspot.com

Poonam Matia said...

रक्षा बंधन !!
युग युग का बंधन !!// सच कहा मुकेश जी ..इस पावन पर्व की शुभकामनाएं

Aparna Bose said...

bohat khoobsurat bhavabhivyakti... sundar rachna

नीलिमा शर्मा said...

bahut umda likha hain shubhkamnaye

annapurna said...

सुंदर भावभिव्यक्ति , हार्दिक बधाई ।